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नारी निकेतनः भूखी थी संवासिनियां, दवा हुई बेअसर
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 19 Jan 2016 11:10 AM IST
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देहरादून नारी निकेतन में संवासिनियों की मौत के लिए वहां की अव्यवस्थाएं पूरी तरह जिम्मेदार थीं।
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सूत्रों की माने तो इसकी पुष्टि जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट से भी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक नारी निकेतन प्रशासन मानसिक विक्षिप्त संवासिनियों को दवा तो देता रहा, लेकिन पेट में अन्न नहीं होने से दवाओं का असर नहीं हुआ।
एनिमिया और डायरिया से ग्रस्त संवासिनियों को जब जिला अस्पताल में लाया गया तो उनकी हालत इतनी खराब थी कि उन्हें बचाया नहीं जा सका। नारी निकेतन में लगातार हो रही संवासिनियों की मौत से उठे सवालों के बाद सरकार ने जिला प्रशासन को जांच के आदेश दिए थे।
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दिसंबर 2015 अंतिम सप्ताह में जिलाधिकारी रविनाथ रमन ने अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व झरना कामठान को जांच सौंपी थी। सोमवार को एडीएम झरना कामठान ने डीएम को रिपोर्ट सौंप दी। सूत्रों की माने तो रिपोर्ट में संवासिनियों की मौत के लिए नारी निकेतन की अव्यवस्थाओं को दोषी ठहराया गया है।
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मानसिक विक्षिप्त संवासिनियों को भोजन और दवा देने के लिए अलग से पर्याप्त और प्रशिक्षित स्टाफ नहीं होने से उनकी ठीक से देखभाल नहीं हो पाती है। संवासिनियों को स्टाफ भोजन परोसता है पर किसी ने यह नहीं देखा की संवासिनियां इसे खाती भी हैं या नहीं। ऐसे में कई दिन तक खाना नहीं खाने से संवासिनियां कुपोषण, एनीमिया की शिकार हो जाती हैं।
स्टाफ समय-समय पर इन संवासिनियों को जरूरी दवाएं देता है पर पेट में भोजन नहीं होने से दवाओं का उल्टा असर होने लगा और उनकी हालत बिगड़ने लगती है।
सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि संवासिनियों को अति गंभीर हालत में दून अस्पताल में भर्ती कराया गया पर ऐसे में डॉक्टरों के पास भी उनका स्वास्थ्य सुधारने का ज्यादा मौका नहीं मिल पाता है। यही वजह है कि ज्यादातर संवासिनियों की मौत दून अस्पताल में हो गई। उन्हें बड़े अस्पताल रेफर करने का भी समय नहीं मिल पाया।
अब भी नहीं मिले पूरे रिकार्ड
जांच टीम में एडीएम झरना कामठान के साथ जिला समाज कल्याण अधिकारी अनुराग शंखधर और मुख्य चिकित्साधिकारी एसपी अग्रवाल को भी शामिल किया गया।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, जिन संवासिनियों की मौत हुई उनकी केस हिस्ट्री, नारी निकेतन में दाखिल करते समय सेहत की स्थिति, भोजन व्यवस्था, उनको दी जा रही दवाओं, दून अस्पताल में भर्ती के रिकार्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आदि के रिकार्ड टीम ने खंगाले हैं। सूत्रों के अनुसार, हालांकि पिछले तीन चार सालों में मृत हुई कुछ संवासिनियों के पूरे रिकार्ड अब भी टीम को नहीं मिले हैं।
‘एडीएम की अध्यक्षता में गठित टीम की जांच रिपोर्ट हमें मिल गई है। जांच में सामने आई खामियों को हर स्तर पर दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। मानसिक रूप से विक्षिप्त संवासिनियों के रहने के लिए सेलाकुई में दो एकड़ जमीन पहले ही समाज कल्याण विभाग को दे दी गई है। ताकि सेलाकुई मानसिक अस्पताल के डॉक्टर और प्रशिक्षित स्टाफ उनकी सेहत पर लगातार नजर रख सकें। शासन से बजट मिलते ही यहां भवन का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।’
- रविनाथ रमन, जिलाधिकारी
राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम पहुंची नारी निकेतन
राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम सोमवार को नारी निकेतन पहुंचकर एक-एक संवासिनियों से काफी देर तक बातचीत की। हालांकि, इस संबंध में टीम ने मीडिया को कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। यही नहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम अपने साथ राज्य महिला आयोग के किसी सदस्य को नारी निकेतन नहीं ले गई थी।
नारी निकेतन प्रकरण के संबंध में जब राज्य महिला आयोग ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से राष्ट्रीय महिला आयोग को पत्र भेजा गया। सोमवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रेखा शर्मा बीजापुर गेस्ट हाउस पहुंची। यहां से वह नारी निकेतन गईं।
राज्य महिला आयोग के पदाधिकारियों को इंतजार था कि शायद उन्हें भी साथ ले जाएं, लेकिन रेखा ने ऐसा नहीं किया। वह अपनी टीम के साथ नारी निकेतन की संवासिनियों से मिलीं। एक-एक संवासिनी से बात की। नारी निकेतन की व्यवस्थाएं देखी। स्टाफ को और बेहतरी के निर्देश दिए। घंटों नारी निकेतन में रही टीम ने मीडिया वालों से बात करने से मना कर दिया। रेखा ने कहा कि मीडिया से मंगलवार को राज्य महिला आयोग के कार्यालय में बातचीत की जाएगी।
हमें नहीं पता क्या हुई बातचीत
राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम के नारी निकेतन जाने के संबंध में जब राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजिनी कैंतुरा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमें नारी निकेतन चलने के लिए नहीं कहा गया। प्रोटोकॉल के तहत राज्य महिला आयोग की सचिव उन्हें रिसीव करने गई थीं, लेकिन वह भी लौट आई। राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम की नारी निकेतन में संवासिनियों से क्या बातचीत हुई, हमें नहीं पता। मंगलवार को वह हमारे कार्यालय आ रही हैं तब शायद कुछ पता चले।