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बीमारियों ने बदला कथा सुनने का तरीका

Wed, 14 Aug 2013 04:54 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Wed, 14 Aug 2013 04:54 PM IST
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Diseases changed the way of listen narrative

पदम-पुराण के अनुसार ज्ञान की गंगा हमेशा ऊपर से नीचे की ओर बहनी चाहिए। इसका मतलब है कथावाचक को ऊंचे स्थान पर और श्रोताओं को जमीन पर बैठकर कथा सुननी चाहिए। लेकिन जोड़ों के दर्द, कमर या घुटनों में दर्द से पीड़ित लोगों के लिए कुर्सी पर बैठना मजबूरी हो गया है।

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इन दिनों अखिल गढ़वाल सभा में आयोजित शिव-महापुराण का श्रवण करने वाले अधिकतर भक्त कुर्सियों पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। जमीन पर बैठने में असमर्थ लोगों के लिए आयोजक भी अलग से कुर्सियों की व्यवस्था करा रहे हैं।
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गठिया, स्पांडिलाइटिस, जोडों में दर्द, जोडों का जाम होना, अधिक वजन, बवासीर की शिकायत, कमर दर्द आदि बीमारियों के चलते लोग फर्श पर नहीं बैठ पाते। मौजूदा जीवनशैली के चलते ऐसे रोगी बढ़ रहे हैं। अस्पताल की ओपीडी में रोज ही ऐसे रोगी आते हैं।
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- डॉ. एसडी जोशी, फिजीशियन, दून अस्पताल

लोग किसी भी तरह की दिक्कत के चलते यदि फर्श पर नहीं बैठ सकते, तो वे कुर्सी या किसी ऊंचे स्थान पर बैठ सकते हैं। शर्त यह है कि उनका स्थान व्यासजी की गद्दी से नीचे हो। किसी भी सूरत में दोनों एक बराबरी में ना बैठे हों।

- आचार्य शिवप्रसाद ममगाईं, कथा व्यास

पदम-पुराण के अनुसार व्यास जी को ऊपर और श्रोताओं को नीचे बैठना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बीमार है, बुजुर्ग है तो ऐसे लोगों को ऊपर कुर्सी आदि में बैठने की छूट दी गई है।
- आचार्य भरत राम तिवारी, उपाध्यक्ष उत्तराखंड विद्वत सभा

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