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निजी स्कूलों की आई शामत, शिकंजा कसेगी उत्तराखंड सरकार

Fri, 11 Mar 2016 09:24 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 11 Mar 2016 09:24 AM IST
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discussion on private school in uttarakhand assembly session
निजी स्कूलों की आई शामत - फोटो : concept photo

उत्तराखंड में निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए कानून बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने माना कि यह गंभीर विषय है। उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव से पहले विधानसभा का एक और सत्र गैरसैंण में आयोजित होगा।

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शुक्रवार को शाम चार बजे प्रदेश का बजट सदन पटल पर रखा जाना है। मुख्यमंत्री ने संभावित घोषणाओं और नीतिगत निर्णयों को पूरा करने के लिए वित्त मंत्री से बजट में सौ करोड़ रुपये अतिरिक्त दिए जाने का आग्रह किया है। हालांकि प्रश्नकाल शुरू होते ही दायित्वधारियों की नियुक्ति के मुद्दे पर भारी शोरशराबा हुआ और विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया।
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शून्य काल शुरू हुआ तो नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने स्पीकर की मंजूरी के बाद नियम 58 में चर्चा के दौरान मुख्य सचिव के उस आदेश को सदन पटल पर रखा, जिसमें मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बगैर भी कई दायित्वधारियों की नियुक्ति कर दी गई है।
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बृहस्पतिवार को सदन में निजी स्कूलों की मनमानी और दायित्वधारियों की नियुक्ति का मुद्दा ही छाया रहा। भाजपा के गणेश जोशी के सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने माना कि राज्यभर के पब्लिक स्कूलों में प्रवेश और शिक्षण शुल्क में बढ़ोत्तरी की शिकायतें मिली हैं।

भाजपा के ही मदन कौशिक के अनुपूरक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि पहले से गठित कमेटियों की रिपोर्ट आने के साथ ही निजी स्कूलों के लिए कानून का खाका तैयार कर लिया गया है।

उम्मीद है कि इसी सत्र में निजी स्कूलों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कानून बना दिया जाएगा। कौशिक ने पहले इन स्कूलों में आईटीई के तहत 25 प्रतिशत दाखिले का मुद्दा उठाया तो मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकरण सरकार के संज्ञान में है और इसका मूल्यांकन किया जा रहा है।

शून्यकाल में ही भाजपा के मदन कौशिक ने कहा कि सदन में गृहमंत्री की घोषणा के एक साल बाद भी गांव खेड़ाजट्ट में दो भाइयों की हत्या के मामले में पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये का मुआवजा अब तक नहीं मिला है। उधर, मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकक्ष में अनौपचारिक बातचीत में कई मुद्दों पर सांकेतिक तौर पर रोशनी डाली।

उन्होंने कहा कि चुनावी वर्ष है और मौजूदा सरकार का आखिरी बजट सत्र है। इसलिए संभावित घोषणाओं और निर्णय लागू करने के लिए सौ करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान करने का आग्रह वित्त मंत्री से किया है। उन्होंने कहा कि 2016-17 के बजट को सरकार ने इतना विस्तृत बनाने का प्रयास किया है कि यह बजट 2017-18 के बजट की आधारभूत पृष्ठभूमि का काम करेगा।


इससे विकास दर प्रभावित नहीं होगी। विकास दर बढ़ेगी तो प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के दो लाख अवसर उपलब्ध होंगे। यदि मौजूदा 13 प्रतिशत की विकास दर ही रही तो 50 से 55 हजार तक रोजगार मुहैया कराए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उपनल के कर्मियों को नियमित करने का तो कोई रास्ता नहीं है, लेकिन सरकार उनका मानदेय बढ़ाएगी।

मंत्रियों के कमजोर प्रदर्शन पर उन्होंने इतना ही कहा कि होमवर्क पूरा रहता है, लेकिन माननीय सदस्य ही सवाल से भटक जाते हैं तो मंत्री की क्या गलती है?

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