{"_id":"9d630996-eecd-11e2-b293-001e671f54a0","slug":"disaster-makes-politics-in-uttarakhand","type":"story","status":"publish","title_hn":"आपदा आए तो क्या, बयाना तो लेना ही है...!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आपदा आए तो क्या, बयाना तो लेना ही है...!
देहरादून/ इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 17 Jul 2013 04:12 PM IST
विज्ञापन
राज्य में आई आपदा से हर कोई हलकान था। लेकिन रसूख वाले एक हाकिम के दफ्तर में अफसरों को पोस्टिंग दिलाने की शतरंज बिछी थी। भले ही बहाना आपदा का ही क्यों ना हो।
विज्ञापन
अपने चहेते एक नए अफसर को बुलाया और कहा हेलीकॉप्टर से रुद्रप्रयाग पहुंच जाओ। कलक्टरी करनी है। इतना सुनते ही नया रंगरूट कुछ सकपका गया लेकिन उड़ान भरी और आपदा ग्रस्त रुद्रप्रयाग पहुंच गया।
विज्ञापन
वहां से उसने चौथे तल पर संपर्क कर अपनी तैनाती पूछी तो सीएम ऑफिस ने पूछा कि किसके कहने पर गए हो। इतना पूछे जाने पर इस अफसर की समझ में सब आ गया। इसी बीच सरकार ने वहां पर पुराने समय जिले के कलक्टर रह चुके दिलीप जावलकर को भेज दिया।
विज्ञापन
लेकिन फिर भी इस बड़े हाकिम ने एडवोकेसी नहीं छोड़ी, प्रदेश की आपदा पर ध्यान देने के बजाय चहेते को एडजस्ट कराकर ही दम लिया। अब भैय्या खुद ही समझ लीजिए जहां लीडरान निकम्मे हो जाए तब भला ब्यूरोक्रेसी को भी क्या दोष देना। अपने ही सिक्के खोटे हैं जी यहां।