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जैसा मर्जी वैसा घर बना लें आपदा प्रभावित!
अमर उजाला/रुद्रप्रयाग
Updated Wed, 09 Oct 2013 06:37 PM IST
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सरकार की नई आवास नीति के तहत आपदा से बेघर हो गए लोगों के अस्थायी पुनर्वास की कार्रवाई शुरू हो गई है। नीति के तहत प्रभावितों को स्थायी भवन निर्माण या प्री-फेब्रिकेटेड भवन के विकल्प दिए जा रहे हैं।
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हालांकि चंद्रापुरी और अगस्त्यमुनि में प्रभावितों ने दोनों विकल्पों को नकार दिया है। प्रदेश में आपदा से सर्वाधिक प्रभावित जनपदों रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में आपदा प्रभावितों के लिए छत का इंतजाम किया जाना है।
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प्री-फेब्रिकेटेड या कंक्रीट-ईंट के भवन
अकेले रुद्रप्रयाग में लगभग सवा चार सौ घरों का निर्माण होना है। प्रभावितों को 15 नवंबर से पूर्व सुरक्षित भवनों में शिफ्ट किया जाना है। प्रभावितों के अस्थायी पुनर्वास से पूर्व प्रशासन उनसे राय ले रहा है कि उनको प्री-फेब्रिकेटेड या कंक्रीट-ईंट के भवन चाहिए। इसके लिए उनको तीन कैटेगिरी में विभाजित किया गया है।
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अपर जिलाधिकारी राघव लंघर ने बताया कि प्रभावितों को तर्कसंगत सभी प्रकार के विकल्प दिए जा रहे हैं। यदि प्रभावित स्वयं अपना भवन बनाते हैं, तो उनको सरकार किश्तवार पांच लाख रुपये देगी (पूर्व में दिए गए गृह अनुदान दो लाख रुपये के अतिरिक्त)। लेकिन भवन बनाने से पहले उनको नक्शा पास कराना पडे़गा, ताकि भूकंपरोधी तकनीकी का प्रयोग हो।
तीन हजार रुपये किराये का भुगतान
स्वयं भवन बनाने वाले प्रभावित को भवन बनने तक की समयावधि या दो साल तक प्रतिमाह तीन हजार रुपये किराये का भुगतान किया जाएगा। यदि वह चाहते हैं कि सरकार मकान बनवाए, तो प्री-फेब्रिकेटेड हट्स का निर्माण किया जाएगा। इन भवनों का 10 साल का बीमा किया जाएगा।