{"_id":"ca969c73d7b33b4abf46d205569cc0fc","slug":"disaster-affected-people-suffer-by-disease","type":"story","status":"publish","title_hn":"आपदा से बचे तो बीमारी बन रही मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आपदा से बचे तो बीमारी बन रही मौत
अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 12 Dec 2013 10:11 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आपदा के झटके से चमोली के कुंजामही कोट के मजदूर राजेंद्र लाल (32) ने किसी तरह अपने को बचा लिया।
विज्ञापन
पढ़ें, मोदी के लिए जमीन से लेकर हवाओं तक रहेगा पहरा
लेकिन अब मौत ब्रेन ट्यूमर ट्युमर न उसके सामने आ गई है। उसके पास इतना पैसा नहीं है कि सर्जरी करा सके। अपने पिता की इकलौती संतान राजेंद्र के तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं।
विज्ञापन
बीपीएल कार्ड धारक
उसे बुधवार को दून अस्पताल में भर्ती किया गया। वह बीपीएल कार्ड धारक भी है। राजेंद्रलाल ने बताया कि एक महीने पहले उसे आंखों में दिक्कत महसूस हुई। उसे धुंधला दिखने लगा।
विज्ञापन
पढ़ें, सिस्टम की मिलीभगत से हो रहा राजाजी पार्क पर 'कब्जा'
परेशानी बढ़ी तो यहां दून अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में दिखाने के लिए आया था। उसने सीनियर आई सर्जन डा. बीसी रमोला से आंखों की जांच कराई। लक्षणों के आधार पर डॉ. रमोला ने सीटी स्कैन कराया तो ब्रेन ट्यूमर निकला।
राजेंद्र की हालत देखकर डाक्टरों ने उसे राज्य व्याधि निधि से आर्थिक सहयोग मांगने की सलाह दी। विभागीय लोगों का कहना है कि इसकी प्रक्रिया इतनी जटिल है कि मरीज मर जाएगा लेकिन पैसा नहीं आ पाएगा।
सही सर्जरी एसजीपीजीआई चंडीगढ़ और एम्स में होगी
डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह के ट्यूमर की सही सर्जरी एसजीपीजीआई चंडीगढ़ और एम्स में होनी चाहिए। हिमालयन इंस्टीट्यूट में भी सर्जरी संभव हो सकती है। दून अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. डीपी तिवारी इस वक्त अवकाश पर हैं।
पढ़ें, नहीं गली अधिकारियों की 'दाल', उतरेगी बत्ती
वैसे बड़ी सर्जरी के लिए यहां डॉक्टर तो हैं लेकिन ओटी और प्रशिक्षित स्टाफ नहीं है। फिलहाल रोगी को वार्ड नंबर आठ के बेड नंबर दो पर भर्ती किया गया है।