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Dehradun News: दृष्टिबाधित छात्र ब्रेल पुस्तक से पहली बार पढ़ रहे गणित-विज्ञान

Sat, 04 Jan 2025 01:48 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jan 2025 01:48 AM IST
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Disabled students studying mathematics for the first time
राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान में पहली बार दृष्टिबाधित छात्र ब्रेल पुस्तक से गणित और विज्ञान पढ़ रहे हैं। यहां पिछले साल ही यह पढ़ाई शुरू हुई है। इससे दृष्टिबाधित छात्र भी इंजीनियरिंग में जा सकेंगे। केंद्रीय ब्रेल प्रेस में इन पुस्तकों की छपाई की जा रही है। इससे पहले तक छात्र केवल आर्ट के विषय ही पढ़ते थे।
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आज विश्व ब्रेल दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन वैश्विक स्तर पर दृष्टिबाधितों के लिए अहम है। इस दिन को लुईस ब्रेल नाम के शख्स के जन्मदिन पर मनाया जाता है। लुईस ब्रेल एक आविष्कारक थे, जिन्होंने ब्रेल लिपि का आविष्कार किया था। ब्रेल लिपि आंखों से देख न पाने वाले लोगों की भाषा है। इसका उपयोग वे लिखने-पढ़ने के लिए करते हैं। दून के राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान में फिलहाल 250 दृष्टिबाधित बच्चे पढ़ाई करते हैं। पिछले साल ही 11 और 12 के दृष्टिबाधित छात्रों के लिए संस्थान में गणित और विज्ञान की पढ़ाई शुरू हुई है।
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कई राज्यों के लिए दून में छपे थे ब्रेल बैलेट पेपर
एनआईईपीवीडी की केंद्रीय ब्रेल प्रेस दून में स्थित है। लोकसभा चुनाव में इसी प्रेस में उत्तराखंड ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब सहित छह राज्यों के दिव्यांग मतदाताओं के लिए ब्रेल बैलेट पेपर तैयार किए गए थे। इस प्रेस की स्थापना 1951 में की गई थी, ताकि दिव्यांगजनों के लिए ब्रेल भाषा में पुस्तक छापी जा सके। 2009 के बाद से इस प्रेस में ब्रेल बैलेट पेपर सहित अन्य कार्य भी होने लगे।
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क्या है ब्रेल लिपि
ब्रेल एक स्पर्शनीय प्रणाली है, जो अंधे और आंशिक रूप से दृष्टिहीन लोगों को पढ़ने और लिखने के माध्यम से साक्षरता प्राप्त करने में सहायता करती है। ब्रेल को स्पर्श करके पढ़ा जाता है, अक्षरों और प्रतीकों को महसूस करने के लिए उंगलियों के पैड का उपयोग किया जाता है। किसी भी उम्र में ब्रेल सीखना संभव है। अंधे और दृष्टिहीन लोगों के लिए साक्षरता तक पहुंचने की विधि के रूप में ब्रेल बेहद महत्वपूर्ण है।
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