{"_id":"c4416aad3c3de347674b673233947066","slug":"difficulties-faced-by-people-moving-assembly-session","type":"story","status":"publish","title_hn":"'सरकारी' चौराहे पर खड़ा बेचारा 'आम आदमी'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
'सरकारी' चौराहे पर खड़ा बेचारा 'आम आदमी'
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 18 Sep 2013 11:45 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विधानसभा सत्र के दौरान माननीयों की शांति भंग न हो, इसके लिए पुलिस-प्रशासन ने रिस्पना से लेकर जोगीवाला तक बैरियर तो तान दिए हैं।
विज्ञापन
लेकिन, तीन दिन तक यह सत्र आम जनता पर किस कदर भारी पड़ता है, इसकी सुध कोई नहीं लेता।
पढ़ें, ...यहां पिंडदान से धुलेंगे 21 जन्मों के पाप
स्कूली बच्चों को ज्यादा परेशानी
सबसे ज्यादा परेशानी उन स्कूली बच्चों को उठानी पड़ी, जिनके घर रिस्पना से जोगीवाला के बीच पड़ते हैं, लेकिन उन्हें बैरियर पर ही रोक लिया गया।
दिक्कत यह रही कि बैरियरों ने इन मासूमों के माता-पिता को भी उन तक पहुंचने नहीं दिया। इधर, नौनिहाल परेशान रहे और उधर माता-पिता की पेशानी पर बल।
घर पहुंचने में कई घंटे लग गए
तय वक्त पर स्कूल से छुट्टी के बावजूद इन बच्चों को घर पहुंचने में कई घंटे लग गए। दूसरी ओर, दूसरे जिलों से आए और गलती से रिस्पना पर उतर गए लोग बैरियरों पर फंसे रहे। इलाज कराने जा रहे रोगियों की भी बुरी हालत रही।
विज्ञापन
पढ़ें, विधायक चैपिंयन की 'गोली' का मामूली निशाना
विज्ञापन
वहीं, रिस्पना के आसपास के व्यापारियों के लिए तो सत्र जैसे अभिशाप सा बन गया है। जितने दिन सत्र चलता है, इन व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ता है।
केस 1
रिस्पना पर एक स्कूली बच्ची पहुंची। उसका घर पास ही था, लेकिन बैरियर और वहां तैनात भारी पुलिस फोर्स देख वह घबरा गई। पुलिसकर्मी बैरियर की ओर बढ़ते लोगों को हाथों या लाठियों के इशारे से रुकने और लौटने को कह रहे थे। कुछ पल ठिठकी बच्ची साहस जुटाकर आगे खड़े हैलमेट पहने और हाथ में लाठी थामे दारोगा के पास पहुंची।
पढ़ें, MBBS में दाखिले का एक और मौका
मासूम ने कहा,‘अंकल, प्लीज मुझे घर जाने दो न, आज मम्मी भी स्कूल लेने नहीं आई। मुझे दूसरा रास्ता नहीं पता।’ लेकिन नियमों से बंधे दारोगाजी सिवाय यह समझाने के कुछ नहीं कर सके कि आगे रास्ता ब्लॉक है और वह कुछ नहीं कर सकते। बच्ची रुआंसी हो गई। तेज धूप में पसीने से तरबतर बच्ची ने दूसरे बच्चों संग घर जाने के दूसरे रास्ते की तलाश की।
हालांकि, पास खड़ी एक महिला कांस्टेबल उसकी मदद को बढ़ी। उसने बच्ची को रास्ता बताया और कुछ दूरी तक छोड़ने भी गई। लेकिन दिनभर यहां आए कई दूसरे बच्चों को इस तरह मदद नहीं मिल सकी।
पढ़ें, दून घाटी के हर शख्स तक डेंगू की दखल
केस 2
रिस्पना पुल पर अमर उजाला टीम को कई ऐसे लोग मिले जो अन्य जिलों से आए थे। रिस्पना पर उतर गए, लेकिन बैरियर बंद होने से सिटी बसों और विक्रमों का संचालन नहीं हो रहा था। ऐसे में भारीभरकम बैग लेकर इन लोगों को पसीने से सराबोर होकर कई किलोमीटर पैदल चलने के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचा।
पढ़ें, केदारनाथः मिल गया भोले का नाग..
उत्तरकाशी से आए कुछ लोगों ने बताया कि वे बीमार हैं। दून अस्पताल में इलाज चल रहा है, लेकिन बैरियर की वजह से वे यहीं फंस गए हैं। इनमें कुछ बुजुर्ग थे, जो ज्यादा चल भी नहीं सकते थे। ऐसे में किसी ने दून में रहने वाले अपने रिश्तेदार को बुलाकर व्यवस्था की तो कुछ बैरियर खुलने के इंतजार में दिनभर यहीं बैठे रह गए।
केस 3
रिस्पना पुल से लेकर जोगीवाला तक करीब दो सौ छोटे-बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। सत्र की शुरुआत के बावजूद दुकानदारों ने अपनी दुकानें खोली तो थीं, लेकिन दिनभर एक भी ग्राहक इस ओर नहीं फटका। यहां तक कि चाय-पानी की ठेलियों, पान-बीड़ी के खोखे भी सुनसान नजर आए। कोई आता भी कैसे, सारे रास्ते ब्लॉक जो कर दिए गए थे। अगले तीन दिन तक यही स्थिति बनी रहने से इन दुकानदारों को नुकसान की चिंता सताने लगी है।
पढ़ें, ...इसका मतलब झूठ बोल रहे हैं 'चैंपियन'
क्या कहते हैं पीड़ित
इस समस्या के लिए किसे दोषी कहें। यह कैसा सत्र चल रहा है जिसमें आम लोग परेशान है। निश्चित तौर पर विधानसभा को कहीं और शिफ्ट करना चाहिए।
- रश्मि, छात्रा डीबीएस कालेज
पढ़ें, बोले चैंपियन, गोली से नहीं पटाखे से हुआ घायल
अगले तीन दिन तक हम लोगों को बहुत समस्या होने वाली है। घर बैरियर के पास ही है। लेकिन अब रूट डायवर्जन के कारण चार किमी घूम कर जाना है। इस समस्या से पता नहीं कब निजात मिलेगी।
- मोनिका, छात्रा
विधानसभा सत्र होने की सूचना हमें जैसे ही मिलती है दिल घबरा जाता है। इस सत्र के कारण पूरा धंधा चौपट हो जाता है। तीन दिन तक यह समस्या बनी रहेगी।
- मनेंद्र सिंह, व्यापारी