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उत्तराखंड की नौकरशाही में तकरार, धर्मसंकट में प्रचंड बहुमत की सरकार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 13 Apr 2018 03:18 PM IST
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उत्तराखंड सरकार में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अफसरों और प्रमोटी आईएएस अफसरों में इन दिनों तकरार चल रही है। खींचतान इस हद तक जा पहुंची है कि एक आईएएस अफसर कानूनी कार्रवाई के विकल्प तक विचार कर रही है। नौकरशाही के बीच छिड़ी इस तकरार ने प्रचंड बहुमत की सरकार को धर्मसंकट में डाल दिया है।
ट्रांसफर और पोस्टिंग विवाद की जड़
इस सारे झगड़े की जड़ ट्रांसफर और पोस्टिंग मानी जा रही है। आरोप है कि प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद से ही प्रमोटी आईएएस अफसरों को महत्वपूर्ण पोस्टिंग से किनारे रखा गया है। अहम पदों पर आईएएस अफसरों का ही कब्जा है। इसके विपरीत प्रमोशन से आईएएस बने अफसर अहम जिम्मेदारियों के लिए तरस गए हैं।
अहम पदों पर आईएएस अफसरों का कब्जा
पिछले एक साल से सचिवालय में तैनात प्रमोटी आईएएस अफसरों को तो सामान्य प्रशासन, सचिवालय प्रशासन, अल्पसंख्यक कल्याण, पुनर्गठन, प्रोटोकाल, संस्कृत शिक्षा सरीखे विभागों में सौंपे गए। एक प्रमोटी आईएएस अफसर को जो अहम पद दिए गए थे, उन्हें धीरे-धीरे करके हटा दिया गया। प्रमोटी आईएएस अफसर इसे खुद के साथ भेदभाव की कार्रवाई के तौर पर देख रहे हैं। अहम पदों पर सीधी भर्ती के आईएएस अफसरों का कब्जा है।
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लंबी छुट्टी पर गए हरबंस चुघ
सचिव पद पर तैनात प्रमोटी आईएएस अफसर हरबंस सिंह चुघ के लंबी छुट्टी को उनकी कथित नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि चुघ उनसे लगातार अहम विभाग हटाए जाने से नाराज हैं। चुघ से पहले खेल विभाग हटाया गया और उसके बाद राजस्व विभाग भी वापस ले लिया गया। अब उनके पास श्रम, कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग ही रह गया है।
शुरू हुई दबाव की मुहिम
पानी सिर के ऊपर आ जाने पर प्रमोटी अफसरों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया। पिछले दिनों उन्होंने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह से शिकायत की। दबाव बनाने की उनकी इस कवायद के बाद आईएएस लॉबी भी हरकत में आ गई है। आईएएस अफसर एसोसिएशन के सचिव आनंद बर्द्धन ने जिस अप्रत्याशित ढंग से 17 अप्रैल को बैठक बुलाई है, उसे प्रमोटी अफसरों की दबाव की मुहिम से जोड़कर देखा जा रहा है।
धर्मसंकट में सरकार
इस साल कई अहम विकास योजनाओं को अंजाम देने की तैयारी में जुटी त्रिवेंद्र सरकार के लिए नौकरशाही की तकरार ने अजीब धर्मसंकट पैदा कर दिया है। वह किसकी बात मानें और किसकी काटे। बहरहाल, इस मामले में मुख्यमंत्री के दखल किए जाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
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ट्रांसफर और पोस्टिंग विवाद की जड़
इस सारे झगड़े की जड़ ट्रांसफर और पोस्टिंग मानी जा रही है। आरोप है कि प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद से ही प्रमोटी आईएएस अफसरों को महत्वपूर्ण पोस्टिंग से किनारे रखा गया है। अहम पदों पर आईएएस अफसरों का ही कब्जा है। इसके विपरीत प्रमोशन से आईएएस बने अफसर अहम जिम्मेदारियों के लिए तरस गए हैं।
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अहम पदों पर आईएएस अफसरों का कब्जा
पिछले एक साल से सचिवालय में तैनात प्रमोटी आईएएस अफसरों को तो सामान्य प्रशासन, सचिवालय प्रशासन, अल्पसंख्यक कल्याण, पुनर्गठन, प्रोटोकाल, संस्कृत शिक्षा सरीखे विभागों में सौंपे गए। एक प्रमोटी आईएएस अफसर को जो अहम पद दिए गए थे, उन्हें धीरे-धीरे करके हटा दिया गया। प्रमोटी आईएएस अफसर इसे खुद के साथ भेदभाव की कार्रवाई के तौर पर देख रहे हैं। अहम पदों पर सीधी भर्ती के आईएएस अफसरों का कब्जा है।
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लंबी छुट्टी पर गए हरबंस चुघ
सचिव पद पर तैनात प्रमोटी आईएएस अफसर हरबंस सिंह चुघ के लंबी छुट्टी को उनकी कथित नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि चुघ उनसे लगातार अहम विभाग हटाए जाने से नाराज हैं। चुघ से पहले खेल विभाग हटाया गया और उसके बाद राजस्व विभाग भी वापस ले लिया गया। अब उनके पास श्रम, कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग ही रह गया है।
शुरू हुई दबाव की मुहिम
पानी सिर के ऊपर आ जाने पर प्रमोटी अफसरों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया। पिछले दिनों उन्होंने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह से शिकायत की। दबाव बनाने की उनकी इस कवायद के बाद आईएएस लॉबी भी हरकत में आ गई है। आईएएस अफसर एसोसिएशन के सचिव आनंद बर्द्धन ने जिस अप्रत्याशित ढंग से 17 अप्रैल को बैठक बुलाई है, उसे प्रमोटी अफसरों की दबाव की मुहिम से जोड़कर देखा जा रहा है।
धर्मसंकट में सरकार
इस साल कई अहम विकास योजनाओं को अंजाम देने की तैयारी में जुटी त्रिवेंद्र सरकार के लिए नौकरशाही की तकरार ने अजीब धर्मसंकट पैदा कर दिया है। वह किसकी बात मानें और किसकी काटे। बहरहाल, इस मामले में मुख्यमंत्री के दखल किए जाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।