इस बैंक का अनोखा काम, जमा करता है शिव नाम
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पैसा तो आता जाता है, लेकिन शास्त्रों के अनुसार भक्ति ऐसा धन है जो कभी न खत्म होता है और न मिटता है। भक्ति रूपी धन वैसे तो सदैव साथ रहता है, लेकिन आप चाहें तो इसे जमा करा सकते हैं और बढ़ते हुए भी देख सकते हैं। शिव नाम लेखन बैंक ऐसा ही एक प्रयास है।
यहां से मिलने वाले निशुल्क पर्चे पर आप ‘ओम नम: शिवाय’ लिखकर जमा करा सकते हैं। आपने कितने पर्चे भरे, इसका पूरा ब्योरा बैंक के कार्यालय में हमेशा सुरक्षित रहेगा। खास बात यह है कि यह पूरी प्रक्रिया निशुल्क है। इस बैंक में पूरे देश से पर्चे आते हैं।
बैंक एवं संस्थान के अध्यक्ष महंत परमानंद महाराज ने बताया कि बैंक की शाखा हरिद्वार में भी है। भक्तों की मांग को देखते हुए जल्द ही अन्य राज्यों में भी इसकी शाखाएं खोली जाएंगी। दूसरे राज्यों में रहने वाले भक्त डाक से भी पर्चा निशुल्क मांगा सकते हैं। अभी तक भागलपुर बिहार निवासी भक्त गंगा राम ढाई लाख से अधिक बार ओम नम: शिवाय लिख बैंक में जमा का चुके हैं। उन्हें हाल ही में सम्मानित किया गया था।
भक्तों का रिकार्ड कंप्यूटर में सुरक्षित
महंत परमानंद महाराज ने बताया कि शिव नाम लेखन बैंक का मुख्य कार्यालय मोहनकुटी, पीपल धाम पार्क रोड, लक्ष्मण चौक, देहरादून में है। यहां सभी भक्तों का रिकार्ड कंप्यूटर में सुरक्षित किया जाता है। कार्यालय में पांच से अधिक स्टाफ हैं। अगर कोई भक्त यह जानना चाहे कि उसने कितनी बार ‘ओम नम: शिवाय’ लिखा है तो यह जानकारी तुरंत दी जाती है।
मंदिर के निर्माण में काम आता शिव नाम
महाराज ने बताया कि भक्तों के रिकार्ड को सुरक्षित रखा जाता है। नए मंदिर बनाते समय नींव में इन पत्रों को इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने बताया कि मूर्ति सिद्घ करने के लिए इसकी जरूरत पड़ती है। इन पत्रों की डिमांड बहुत है। ज्यादा रिकार्ड होने पर गंगा में प्रवाह किया जाता है। इससे भक्तों को संतुष्टी मिलती है।
शिव का भजन करने वालों की अकाल मृत्यु नहीं होती। शिव ही ऐसे देवता हैं जिनकी आराधना से मृत्यु को जीता जा सकता है। शिव संहारकर्ता देवता हैं, वे ही प्रत्येक मनुष्य के पापों का संहार कर, मुक्ति दे सकते हैं। शिव नाम का जप ही कलयुग के प्रभाव को दूर कर सकता है। शिव को ही बुद्धि व धन का देवता भी माना जाता है। इसलिए मुक्ति, बुद्धि व धन या मानसिक शांति के लिए ओम नम: शिवाय का जप करना चाहिए।
- महंत परमानंद महाराज