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Dehradun News: सती चरित्र की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु
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ज्वाला मंदिर सेलाकुई में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास दीपक पोखरियाल ने सृष्टि की रचना और सती चरित्र की कथा सुनाई। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। भजनों पर श्रद्धालु खूब निहाल हुए।
कथा व्यास ने सृष्टि की रचना के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि पृथ्वी को पाताल लोक से लाने के लिए श्री हरि विष्णु ने वराह अवतार लिया। सबसे पहले भगवान श्री हरि विष्णु की नाभि से कमल के फूल पर बैठे ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई। भगवान श्री हरि कृष्ण के आदेश के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की। मनु और शतरूपा से पांच संतान दो पुत्र और तीन कन्या हुईं। एक व्यक्ति पृथ्वी को पाताल पुरी ले गया। पृथ्वी को वापस लाने के लिए भगवान श्री हरि विष्णु ने वराह अवतार लिया।
उन्होंने विस्तार से सती चरित्र की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भागवत कथा का प्रत्येक प्रसंग मानव जाति को संदेश देता है। पूर्व जन्म के सद् कर्म के चलते ही कथा सुनने का सुअवसर प्राप्त होता है। कथा का श्रवण जरूर करना चाहिए। इस मौके पर आचार्य पंकज गोदियाल, वीर सिंह रावत, अनिता गुसाई, सुरेंद्र गुसाई, रुकमणी सजवाण, सरिता, नीमा आदि मौजूद रहे।
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कथा व्यास ने सृष्टि की रचना के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि पृथ्वी को पाताल लोक से लाने के लिए श्री हरि विष्णु ने वराह अवतार लिया। सबसे पहले भगवान श्री हरि विष्णु की नाभि से कमल के फूल पर बैठे ब्रह्मा जी की उत्पत्ति हुई। भगवान श्री हरि कृष्ण के आदेश के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की। मनु और शतरूपा से पांच संतान दो पुत्र और तीन कन्या हुईं। एक व्यक्ति पृथ्वी को पाताल पुरी ले गया। पृथ्वी को वापस लाने के लिए भगवान श्री हरि विष्णु ने वराह अवतार लिया।
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उन्होंने विस्तार से सती चरित्र की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भागवत कथा का प्रत्येक प्रसंग मानव जाति को संदेश देता है। पूर्व जन्म के सद् कर्म के चलते ही कथा सुनने का सुअवसर प्राप्त होता है। कथा का श्रवण जरूर करना चाहिए। इस मौके पर आचार्य पंकज गोदियाल, वीर सिंह रावत, अनिता गुसाई, सुरेंद्र गुसाई, रुकमणी सजवाण, सरिता, नीमा आदि मौजूद रहे।
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