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भक्तों को खींच लाई बदरी-केदार की ताकत

अमर उजाला, पीपलकोटी Updated Wed, 23 Oct 2013 05:22 PM IST
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devotee reached badrinath and kedarnath after lot of problem

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आपदा के खौफ को दरकिनार कर और रास्ते में मुश्किलों को झेलते हुए भी श्रद्घालु आस्था के धाम बदरीनाथ और केदारनाथ पहुंच रहे हैं।
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बुधवार को बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा पर आया कर्नाटक के तीर्थयात्रियों का सात सदस्यीय दल बदरीनाथ की खूबसूरती देख रोमांचित हो उठा। दल ने करीब चार घंटे तक बदरीनाथ धाम में पूजा-अर्चना की।
धाम में इन दिनों तीर्थयात्रियों की आमद घट गई है। ऐसे में तीर्थयात्रियों को मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना करने का पूरा समय मिल रहा है।

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उत्तराखंड की आपदा के बारे में पढ़ा
कर्नाटक के तीर्थयात्री जी. मुनिअप्पा, राजन अन्ना, वी. हनुमंता और एम रामकृष्णा का कहना है कि अखबार और टीवी चैनलों में उत्तराखंड की आपदा के बारे में पढ़ा।

हमारा बदरीनाथ यात्रा का शेड्यूल दो वर्ष से बना हुआ था, जब आपदा के बाद यात्रा शुरू होने के बारे में सुना तो बदरीनाथ में मत्था टेकने चले आए।

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तीर्थयात्रियों ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के लिए हवाई सेवा का विस्तार किया जाना चाहिए। कहते हैं कि मन में आस्था लिए बदरीनाथ पहुंचे, जिससे मन में आपदा का कोई भय नहीं रहा। यात्रा में बहुत आनंद आया, अपने गांव जाकर यात्रा का वृतांत गांव के लोगों को सुनाएंगे।

बाइक से पहुंचे बदरीधाम

पटना में सेवारत हल्द्वानी के विनीत चौधरी की आस्था के आगे आपदा भी नतमस्तक हो गई। विनीत पटना से बाइक से 809 किमी की दूरी तय कर बदरीनाथ मत्था टेकने पहुंचे।

हालांकि आपदा से उन्हें यात्रा शेड्यूल में परिवर्तन करना पड़ा। जोशीमठ से हनुमान चट्टी तक जानलेवा बने बदरीनाथ हाईवे पर जान जोखिम में डालकर मोटर साइकिल से वह 22 अक्तूबर को बदरीनाथ पहुंचे। यहां एक रात गुजारने के बाद वह 23 अक्तूबर को पटना के लिए लौट गए। विनीत का कहना है कि आस्था उसे यहां खींच लाई है।

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केदारनाथ धाम में मत्था टेकने पहुंचे

बदरीनाथ से पहले वह केदारनाथ धाम में मत्था टेकने पहुंचे। विनीत बताते हैं कि बदरीनाथ और केदारनाथ के रास्ते खतरनाक बने हुए हैं। परेशानी ज्यादा केदारनाथ में हुई।

गुप्तकाशी पहुंचते ही एक बार मन बनाया कि अगले वर्ष केदारनाथ के दर्शन करुंगा, लेकिन दृढ़ संकल्प बनाकर केदारनाथ को चल पड़ा। वे कहते हैं कि केदार बाबा का आदेश था तो पहुंच ही गया।
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