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Dehradun News: बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आखिरी दम तक कार्य करती रहीं जौनसार बावर की पहली महिला स्नातक देविका चौहान

Thu, 11 Apr 2024 03:26 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 11 Apr 2024 03:26 AM IST
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Devika Chauhan, the first female graduate of Jaunsar Bawar, worked till her last breath to make her daughters self-reliant.
नवरात्र में देवी के शक्ति स्वरूप की उपासना की जाती है। धर्म शास्त्रों में नारी को सृजन, शक्ति और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर की पहली महिला स्नातक देविका चौहान साक्षात नारी शक्ति का प्रमाण रही हैं। उन्होंने क्षेत्र की बेटियों को शिक्षा के साथ समाज में बराबरी का हक पाने का रास्ता दिखाया। सर्वधर्म में विश्वास रखने वाली देविका चौहान जरूरतमंद बेटियों को पढ़ाकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए आखिरी दम तक कार्य करती रहीं।
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वर्ष 1933 में कालसी तहसील क्षेत्र के रक्ताड़ गांव के राजपूत परिवार में जन्मी देविका चौहान सामाजिक मान्यताओं और दिव्यांगता की चुनौती से पार पाकर अपने पिता के सपने को पूरा किया। जब देविका पांचवी कक्षा में थी तो पिता का निधन हो गया। मां ने कष्ट सहकर बेटी को पढ़ाया। चाचा और चाची ने भी देविका की पढ़ाई पूरी करवाने के लिए हरसंभव प्रयास किया।
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आखिरकार वर्ष 1956 का वह दिन आया जब देविका ने स्नातक (बीएससी) पास कर इतिहास रच दिया। वह जौनसार बावर की पहली महिला स्नातक बन गई। यह 50 का वह दशक था जब जौनसार बावर में बालिका शिक्षा के प्रति जागरूकता का अभाव था। स्नातक करने से पहले ही देविका ब्लॉक समन्यवक (महिला) की लिखित परीक्षा और साक्षात्कार पास कर सरकारी नौकरी पा चुकी थीं। उसके बाद उन्होंने अविभाजित उत्तरप्रदेश के समय खंड विकास अधिकारी से लेकर सहायक निदेशक समाज कल्याण तक के पद पर कार्य किया। सेवा के दौरान वह बालिका शिक्षा और जनजातीय क्षेत्रों के हित के लिए संघर्षरत रहीं। सेवानिवृत होने के बाद वर्ष 1997 में वह कालसी की पहली महिला ब्लॉक प्रमुख बनीं। सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से उन्होंने बालिकाओं को पढ़ाने, नौकरी लगाने और जरूररतमंद कन्याओं का विवाह करवाने का कार्य किया। कई बालिकाएं उनके पास रहकर ही पढ़ाई करती थीं। वह आज भी वह जौनसार बावर की बेटियों की रोल मॉडल हैं।
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लोक पंचायत के संस्थापक सदस्य भारत सिंह चौहान ने बताया कि 50 के दशक में देविका चौहान की बड़ी उपलब्धि से बेटियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने की प्रेरणा मिली। बताया कि आज जौनसार बावर की बेटियां शिक्षा से लेकर खेल तक हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
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