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विकास और पर्यावरण का पहिया अब एक साथ
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 18 Feb 2016 03:32 AM IST
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राष्ट्रीय राजमार्गों और रेल लाइन के चलते वन्य जीवों और पर्यावरण की क्षति बचाने के लिए भारतीय वन्य जीव संस्थान ने ‘डेवलपमेंट विथ डिजाइन’ का विकल्प दिया है। इससे विकास के पहिये भी चलेंगे और वन्य जीव, पर्यावरण भी नष्ट नहीं होगा।
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केंद्र सरकार के निर्देश पर भारतीय वन्य जीव संस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) और रेलवे बोर्ड के आला अधिकारियों के लिए तीन दिवसीय कार्यशाला की बुधवार को शुरुआत हुई। इसमें बताया गया की ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए। सारे विभाग समन्वय बैठाकर ही प्रोजेक्ट बनाएं और वन्य जीवों के वैज्ञानिक प्रबंधन का ध्यान रखें।
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केंद्र के निर्देश पर शुरू हुआ काम
राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) छह और सात से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। एनएच-34 से असम का काजीरंगा नेशनल पार्क, रेल प्रोजेक्ट्स से राजाजी नेशनल पार्क के वन्य जीव प्रभावित हो रहे हैं।
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पश्चिम बंगाल में रेल लाइन से वन्य जीव कटा करते हैं। इस संबंध में केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ‘विकास बिना विनाश’ का नारा दे चुके हैं। केंद्र सरकार के निर्देश पर इसी कड़ी में भारतीय वन्य जीव संस्थान ने ‘डेवलपमेंट विद डिजाइन’ का विकल्प दिया है।
सिर्फ वन विभाग पर जिम्मेदारी न छोड़ें
वन्य जीव संस्थान के निदेशक डॉ. वीबी माथुर ने बताया कि प्रोजेक्ट बनाने में विभाग एक-दूसरे से सलाह मशविरा नहीं करते। इसी वजह से बहुत से प्रोजेक्ट को पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिल पाती।
सिर्फ वन विभाग पर जिम्मेदारी न छोड़ें, हर विभाग अपने यहां इको सिस्टम से संबंधित सेल बनाए, इसके मशविरे पर प्रोजेक्ट बनें। कार्यशाला में रेलवे बोर्ड (ट्रैफिक सर्विसेस) के डा. वी मुखोपाध्याय, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के बीएस बोनाल और एनच के अधिकारी रहे।