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'उत्तराखंड में सक्रिय हैं माओवादी, शिविर का खुलासा'
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 25 Oct 2013 11:19 PM IST
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राज्य की आंतरिक सुरक्षा को लेकर आयोजित पुलिस विभाग की एक कार्यशाला में यह बात तो सामने आई कि माओवाद से अकेले पुलिस नहीं निपट सकती।
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इसके लिए जिला प्रशासन की भागीदारी के बगैर सफलता नहीं मिल सकती। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा खुद इस कार्यशाला में दो घंटे तक जमे रहे। उन्होंने कहा कि स्मार्ट अफसर वहीं है जिसके पास समय रहते पर्याप्त सूचनाएं होती हैं।
नक्सली प्रशिक्षण शिविर का खुलासा
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि वर्ष 2004 में जनपद नैनीताल के सुदूर सौफुटिया नामक जंगल क्षेत्र में माओवादियों द्वारा संचालित किए जा रहे नक्सली प्रशिक्षण शिविर का खुलासा होने पर इस समस्या की ओर ध्यान गया। ये गतिविधियां वहीं होती है जहां विकास और रोजगार का अभाव होता है।
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नेपाल का माओवाद भारत विरोधी
उत्तराखंड में अभी नक्सल हिंसा प्रकाश में नहीं आई लेकिन कुमाऊं मंडल के नेपाल से सटे जनपद संवेदनशील है। नेपाल में जब भी माओवादी हिंसा होती है तो उसका हमारे देश पर भी असर पड़ता है और नेपाल का माओवाद भारत विरोधी वातावरण उत्पन्न कर रहा है।
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राज्य पुलिस ने माओवादी गतिविधियों में लिप्त 16 अभियुक्तों को गिरफ्तारी की है। कुमाऊं परिक्षेत्र वामपंथी दृष्टि से अधिक संवेदनशील है। इसलिए यहां के जनपदों में स्पेशल ऑपरेशनल टास्क फोर्स का गठन किया गया है। जिसमें पुलिस एवं अभिसूचना तंत्र संयुक्त रूप से काम्बिंग करते हुए राष्ट्रविरोधी तत्वों पर नजर रखते हैं।
पृष्ठभूमि में नक्सलवाद व माओवाद
पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने कहा देश में अलग अलग हिस्सों में अलग तरह का आतंकवाद है। नार्थ (जम्मू कश्मीर) व नार्थ ईस्ट में आतंकवाद के पीछे विदेशी ताकते हैं।
लेकिन सेंट्रल इंडिया के आतंकवाद की पृष्ठभूमि में नक्सलवाद व माओवाद है। पुलिस कार्रवाई के अलावा आर्थिक तौर पर भी बड़े कदम उठाने पर ही इसका समाधान होगा। कार्यशाला का संचालन आईजी दीपम सेठ ने किया।