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उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी पर लगा 25000 रुपये का जुर्माना
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विकासनगर। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत अपीलार्थी को सूचना उपलब्ध न कराने और विलंब के संबंध में स्पष्टीकरण न देने पर राज्य सूचना आयुक्त चंद्र सिंह नपलच्याल ने उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी और तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी/उपजिलाधिकारी विकासनगर जितेंद्र कुमार पर 25000 रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माने की यह राशि उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी के वेतन/देयकों से काट कर तीन किश्तों में राजकोष में जमा कराई जाएगी।
आरटीआई कार्यकर्ता और विकासनगर निवासी आशीष कुमार पिपानिया ने मई 2018 में तत्कालीन एसडीएम/लोक सूचना अधिकारी से कुछ बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी थी। तय समय पर सूचना उपलब्ध न होने पर आशीष पिपानिया ने प्रथम अपीलीय अधिकारी/जिलाधिकारी का दरवाजा खटखटाया था। जिस पर 26 जून 2018 को जिलाधिकारी ने आदेश पारित कर एसडीएम को सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन इसके बाद भी तत्कालीन एसडीएम जितेंद्र कुमार ने 27 फरवरी 2019 तक लोक सूचना अधिकारी के पद पर बने रहने के बावजूद अपीलार्थी को न तो सूचनाएं दी न ही सूचना उपलब्ध कराने में हुई देरी से संबंधित कारण डीएम को बताया गया। जिससे नाराज होकर अपीलार्थी ने मामले में राज्य सूचना आयुक्त का दरवाजा खटखटाया था। सभी पहुलओं पर विचार विमर्श करने के बाद राज्य सूचना आयुक्त ने सूचना उपलब्ध न कराने पर तत्कालीन एसडीएम को दोषी माना। जिस पर उन्हें 225 दिनों की देरी से सूचना उपलब्ध कराने पर 250 प्रतिदिन के हिसाब से अधिकतम 25 हजार रुपये का अर्थ दंड लगाया है।
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आरटीआई कार्यकर्ता और विकासनगर निवासी आशीष कुमार पिपानिया ने मई 2018 में तत्कालीन एसडीएम/लोक सूचना अधिकारी से कुछ बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी थी। तय समय पर सूचना उपलब्ध न होने पर आशीष पिपानिया ने प्रथम अपीलीय अधिकारी/जिलाधिकारी का दरवाजा खटखटाया था। जिस पर 26 जून 2018 को जिलाधिकारी ने आदेश पारित कर एसडीएम को सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन इसके बाद भी तत्कालीन एसडीएम जितेंद्र कुमार ने 27 फरवरी 2019 तक लोक सूचना अधिकारी के पद पर बने रहने के बावजूद अपीलार्थी को न तो सूचनाएं दी न ही सूचना उपलब्ध कराने में हुई देरी से संबंधित कारण डीएम को बताया गया। जिससे नाराज होकर अपीलार्थी ने मामले में राज्य सूचना आयुक्त का दरवाजा खटखटाया था। सभी पहुलओं पर विचार विमर्श करने के बाद राज्य सूचना आयुक्त ने सूचना उपलब्ध न कराने पर तत्कालीन एसडीएम को दोषी माना। जिस पर उन्हें 225 दिनों की देरी से सूचना उपलब्ध कराने पर 250 प्रतिदिन के हिसाब से अधिकतम 25 हजार रुपये का अर्थ दंड लगाया है।
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