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आठवीं तक फेल न करने की नीति में बदलाव की मांग

Fri, 21 Oct 2016 01:42 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 21 Oct 2016 01:42 AM IST
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demand to change policy for eighth standard student.
मंत्री प्रसाद नैथानी - फोटो : file photo

शिक्षा के अधिकार अधिनियम की फिर से समीक्षा कर आठवीं तक बच्चों को फेल न करने की पॉलिसी में बदलाव किया जाए। वहीं शिक्षकों के चयन के लिए अलग से आयोग गठित हो। आरटीई के विस्तारीकरण एवं नई शिक्षा नीति को लेकर इंडिया हैबिटेट सेंटर नई दिल्ली में हुई बैठक में उत्तराखंड की ओर से शिक्षा मंत्री ने इसकी मांग की। उन्होंने कहा कि आरटीई के तहत बच्चों की प्रतिपूर्ति पर खर्च 91 करोड़ रुपया अवमुक्त किया जाए।

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राज्य मंत्री मानव संसाधन विकास मंत्रालय महेंद्रनाथ पांडे की अध्यक्षता में हुई बैठक में उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात के शिक्षा मंत्रियों और शिक्षाविदों ने अपने विचार रखे। उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए कक्षा एक से आठवीं तक बच्चों को फेल न करने की नीति में बदलाव किया जाए।
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शिक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत 25 प्रतिशत बच्चों का प्रवेश प्राइवेट विद्यालयों में किया जाता है, इससे राज्य सरकार के कोष से अरबों रुपया खर्च हो रहा है, जिससे अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो रहे हैं। साथ ही इससे सरकारी विद्यालयों में छात्र संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया की बच्चों की प्रतिपूर्ति के लिए 91 करोड़ रुपया जो राज्य सरकार द्वारा खर्च किया गया है तत्काल अवमुक्त किया जाए।

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पूरे देश में हो एक जैसी शिक्षा व्यवस्था

demand to change policy for eighth standard student.
मंत्री प्रसाद नैथानी - फोटो : अमरउजाला

स्कूलों को समय पर शिक्षक मिल सकें इसके लिए शिक्षकों के चयन के लिए अलग से आयोग का गठन किया जाए। स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत के लिए आवश्यक है कि देशभर के प्राथमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा एवं योग की कक्षाएं संचालित हों और इनमें बीपीएड व योगा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का चयन किया जाए।

वहीं प्राथमिक कक्षाओं में प्रवेश की आयु तीन वर्ष रखी जाए एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों का सुधार किया जाए। शिक्षा मंत्री ने इन केंद्रों में कार्यरत सहायिकाओं एवं कार्यकत्रियों का वेतन बढ़ाए जाने, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत कार्यरत प्रयोगशाला सहायकों का वेतन केंद्र सरकार से अवमुक्त करने की मांग की।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि पूरे देश में एक जैसी शिक्षा व्यवस्था होनी चाहिए सभी अध्यापक कर्मचारी एवं अधिकारी यदि सरकारी विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाएं तो शिक्षा गुणवत्ता में सुधार होगा। बैठक में अपर सचिव विद्यालय शिक्षा, मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार रीना रे, निर्देशक सुरभि जैन आदि मौजूद रहे।

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