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दिल्ली ट्रैक्टर रैली हिंसा: उत्तराखंड लौटे किसानों ने उपद्रव को बताया सोचा समझा षड्यंत्र, कहा-आंदोलन रहेगा जारी

Wed, 27 Jan 2021 07:17 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 27 Jan 2021 07:17 PM IST
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Delhi violent clash on republic day 2021: Uttarakhand farmers Told this violence was conspiracy
दिल्ली में ट्रैक्टर रैली - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा को किसानों ने साजिश करार दिया है। किसानों का कहना है कि एक सोची समझी साजिश के तहत किसान आंदोलन को तोड़ने के लिए षड्यंत्र रचा गया। 

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किसानों का कहना है कि दिल्ली में जो कुछ हुआ उसकी निंदा करते हैं। आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। किसानों का कहना है कि जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं हो जाते, तब तक रुकेंगे नहीं, भटकेंगे नहीं। आंदोलन जारी रहेगा। 
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यह भी पढ़ें: दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान हुए बवाल के बाद उत्तराखंड की सीमाओं पर भी अलर्ट जारी
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किसानों को रोकने के खड़े किए थे कबाड़ के वाहन 
दिल्ली में हुई ट्रैक्टर परेड में हरिद्वार और आसपास के किसान भी शामिल हुए थे। परेड में शामिल होने के बाद किसान लौट आए हैं। लौटने पर उन्होंने आम लोगों के साथ ही मीडिया के लोगों से भी अपने अनुभव साझा किया। इन लोगों का कहना है कि किसानों को रोकने के लिए कबाड़ से भरे वाहनों को सड़क के बीचोंबीच खड़ा कर दिया था। बिना मरीज की एंबुलेंस को दौड़ाया जा रहा था। 

किसानों को भटकाया जा रहा था

भारतीय किसान यूनियन तोमर गुट के जिलाध्यक्ष चौधरी विकेश बालियान के साथ जगजीतपुर, ज्वालापुर की धीरवाली, रोहालकी, बोंगला, बहादराबाद और बहादुरपुर जट से भी किसान दिल्ली गए थे। विकेश बालियान ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने ट्रैक्टरों को रोकने के लिए कबाड़ से भरे वाहनों और सरकारी बसों को भी खड़ा कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि वह जब गाजीपुर बॉर्डर निकले तो आईटीओ पर जाकर रोक लिया गया।

यहां इंटरनेट सेवा को भी बंद कर दी थी। किसानों के ट्रैक्टर रोककर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। ट्रैक्टरों में तोड़फोड़ की गई। डिवाइडर तोड़कर यातायात बार-बार परिवर्तित कर किसानों को भटकाया जा रहा था। किसानों ने बताया कि पुलिस की कार्यप्रणाली से साफ झलक रहा था कि आंदोलन भटकाने के लिए कार्य किया जा रहा है। 

किसान अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से परेड निकाल रहे थे। कुछ असामाजिक तत्वों ने आंदोलन को असफल बनाने के लिए इस प्रकार की घटना को अंजाम दिया। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। 
- लक्ष्मीचंद, मीरपुर

दिल्ली में किसानों के साथ जो कुछ हुआ है। यह सब केंद्र सरकार के इशारे पर पुलिस ने किया है। किसान अपनी मांग को लेकर चुप होकर बैठने वाले नहीं हैं। पुलिस के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज होने चाहिए।
- सुखदेव पाल, किसान, बिशनपुर कुंडी

जो घटना में शामिल थे उन्हें सजा मिले

दिल्ली में 26 जनवरी को हुई घटना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इस घटनाक्रम की पुरजोर निंदा की जानी चाहिए। जो भी लोग इस घटनाक्रम में शामिल हैं, उनको सजा होनी चाहिए।
- श्याम प्रसाद शर्मा, रसूलपुर लालढांग

लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात कहने और रखने का हक है। ये कानून वास्तव में किसानों के हित में नहीं हैं। किसानों के साथ मारपीट में केंद्र सरकार की भूमिका को भी नकारा नहीं जा सकता है।
- अरविंद कुमार, कोटमुरादनगर

किसान और जवान की देशभक्ति पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगाया जा सकता। लाल किले पर हुई घटना की निंदा की जाती है। लाल किले के अंदर सरकार व पुलिस की साजिश से ही उपद्रवी लोग अंदर गए। 
- विकास सिंह सैनी, प्रदेशाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन अंबावत 

किसानों की एकता को देखकर आंदोलन को असफल करने के लिए लाल किले पर कोई अन्य  झंडा फहराना भाजपा की साजिश है। ताकि आंदोलन को असफल घोषित किया जा सके। 
- राजदीप मैनवाल, जिलाध्यक्ष युवा राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन 

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