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देहरादूनः ‘जीआईएस एप्लीकेशन’ से रुकेंगे महिला अपराध, ऐसे होगी मॉनीटरिंग

Thu, 19 Dec 2019 12:12 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 19 Dec 2019 12:12 PM IST
सार

  • 39वें आईएनसीए कांग्रेस में वैज्ञानिकों ने दी जानकारी
  • वैज्ञानिकों ने पश्चिम बंगाल के कई जिलों में किया सर्वे

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Dehradun: Women crime will stop with 'GIS application', monitoring like this
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

हैदराबाद और उन्नाव में युवतियों के साथ हुई आपराधिक घटनाओं को लेकर पूरे देश में मचे बवाल के बीच यह खबर सुकून देने वाली है। विज्ञानियों ने एक ऐसा ‘जीआईएस एप्लीकेशन’ तैयार किया है जिसके जरिए न सिर्फ महिलाओं के साथ होने वाले आपराधिक कृत्यों को रोका जा सकेगा बल्कि उन इलाकों की बारीकी से निगरानी की जा सकेगी जहां दुराचार और हत्या जैसी घटनाएं अधिक होती हैं।

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भारतीय राष्ट्रीय कार्टोग्राफी संघ (आईएनसीए) की ओर से देहरादून में आयोजित 39वें अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस में वैज्ञानिकों ने इस तकनीक के बारे में जानकारी दी। विद्यासागर विवि की प्रोफेसर एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नीलांजना दास चटर्जी ने ‘स्पेशियो टेंपोरल एनालिसिस ऑफ क्राइम अगेंस्ट वूमेन इन वेस्ट बंगाल’ विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों कूचबिहार, दीनाजपुर, मुर्शिदाबाद, मालदा, नादिया, 24 परगना, आसनसोल जिलों में कई माह सर्वे और इनका जीआईएस डाटा तैयार किया है।
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इसे तैयार करते समय दुराचार, हत्या, छेड़खानी जैसी घटनाओं को शामिल किया। कई माह के सर्वे के बाद इन सभी जिलों का जीआईएस एप्लीकेशन तैयार किया। डॉ. नीलांजना दास चटर्जी ने बताया कि उनकी टीम ने एनविवो और इरडास सॉफ्टवेयर तैयार किया है।
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इसके माध्यम से अधिकारी माउस क्लिक करते ही जानकारी हासिल कर सकेंगे कि उनके जिले में ऐसे कौन-कौन से इलाके हैं जहां दुराचार, हत्या व हिंसक घटनाएं अधिक हैं। डॉ. चटर्जी का मानना है कि इस प्रकार का डाटा पूरे देश में इकट्ठा करने के साथ ही सॉफ्टवेयर में उसकी फीडिंग कर अपराधों पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।

सभी आबादी क्षेत्रों के नक्शे बनाएगा भारतीय सर्वेक्षण विभाग 

देश-दुनिया में तेजी से बदल रही सामरिक परिस्थितियों के मद्देनजर मानचित्रों को बनाने में डिजिटल तकनीक का और अधिक इस्तेमाल करना होगा। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल तकनीक, सूचना व प्रौद्योगिकी और मानचित्र कला के बीच बेहतर समन्वय से मानचित्रों को बनाने में जहां सुविधाएं हुई हैं, वहीं चुनौतियां भी बढ़ गई हैं। उक्त बातें हाईड्रोग्राफी विभाग के चीफ  हाईड्रोग्राफ र वाइस एडमिरल विनय ने कही। वह बुधवार को भारतीय राष्ट्रीय कार्टोग्राफी संघ (आईएनसीए) की ओर से आयोजित 39वें अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

आईएनसीए के अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस को संबोधित करते हुए महासर्वेक्षक लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कुमार (वीएसएम) ने कहा कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने विभिन्न राज्य सरकारों के साथ मिलकर सभी आबादी क्षेत्रों का ड्रोन के माध्यम से सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। जल्द पूरे देश में भारतीय सर्वेक्षण विभाग की ओर से आबादी के नक्शे बनाए जाएंगे। हरियाणा में किए जा रहे आबादी सर्वेक्षण का काम पूरा कर लिया है। इसे सभी राज्यों में लागू करने और समय सीमा में पूरा करने का निर्णय लिया है।

कर्नाटक व महाराष्ट्र में भी आबादी का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। यूपी, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, गोवा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इसे शुरू कराने के लिए वार्ताएं चल रही हैं। उन्होंने बताया कि बाढ़ से बचाव के लिए राष्ट्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत नदियों के लिडार मैपिंग द्वारा बेहद सूक्ष्म मानचित्र तैयार किए जा रहे हैं। जिसे राष्ट्रीय जल शक्ति मंत्रालय संबंधित विभागों को साझा करेगा। इस मैपिंग के माध्यम से राज्य सरकारों को बाढ़ से बचाव के प्रबंधन करने में मदद मिलेगी। 

शांति निकेतन विवि के प्रोफेसर विजय झा ने बताया कि ऐसे डाटा को न केवल बनाना जरूरी है, बल्कि उसका विभिन्न विभागों में साझा करना भी आवश्यक है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अपर महासर्वेक्षक नवीन तोमर ने कहा कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग की स्थापना 40 साल पूर्व 1979 में हुई थी। यह भारतीय राष्ट्रीय कार्टोग्राफी  संघ का वार्षिक कांग्रेस चित्रकला से संबंधित विचार विमर्श का एक मुख्य मंच है। कांग्रेस में दर्जनभर से अधिक वैज्ञानिकों ने कार्टोग्राफी डिजिटल मैप के क्षेत्र में किए गए कई शोधपत्र पढ़े।

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