वकीलों के परिवार की बिटिया बनी जज, बढ़ाया दून का मान
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हिमाचल प्रदेश न्यायिक सेवा में पांचवा स्थान हासिल करने पर विभूति बहुगुणा का लॉ कॉलेज, उत्तरांचल विश्वविद्यालय में भव्य स्वागत किया गया। विभूति ने वर्ष 2014 में लॉ कॉलेज देहरादून से बीए एलएलबी की डिग्री हासिल की थी। उन्हें विवि में गोल्ड मेडल मिला था।
उत्तरांचल विवि परिसर में विवि के चांसलर जितेंद्र जोशी ने विभूति को प्रतीक चिन्ह देकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि छोटे से अंतराल में लॉ कॉलेज से जज बनने वालों में विभूति का 13वां नंबर है। इससे पहले सात छात्र और पांच शिक्षक अलग-अलग राज्यों में जज बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि विभूति जैसे मेधावी छात्रों का सम्मान करना संस्थान के लिए गर्व की बात है। विभूति ने इस दौरान लॉ के छात्रों को कामयाबी के टिप्स भी दिए।
इस अवसर पर वाइस चांसलर प्रो. एससी जोशी, प्राचार्य डा. राजेश बहुगुणा, डा. पूनम रावत, कुमार आशुतोष, डा. अनिल दीक्षित, डा. प्रभा लामा, डा. विनोद कुमार, केके तिवारी, डा. अमित उपाध्याय, कुलजीत सिंह, अमित उनियाल, डा. बीएन दूबे, प्रवीन लखेड़ा, रजित शर्मा, डा. जितेंद्र सिंह, नीता बिष्ट, दीपांकर जोशी, डा. सुशीम शुक्ला आदि मौजूद रहे।
जज बनकर मां का सपना किया पूरा
हिमाचल में जज बनने वाली दून की विभूति बहुगुणा का वकील बनने से लेकर जज तक का सफर कानूनी माहौल की देन रहा है। परिवार में वह तीसरी वकील हैं। उनके पिता और बड़े भाई भी वकील हैं। पिता उत्तरांचल विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज में प्रिंसिपल हैं जबकि भाई एक प्राइवेट कंपनी में लीगल मैनेजर हैं।
विभूति ने बताया कि उनकी मां चाहती थीं कि वह जज बनें। हिमाचल न्यायिक सेवा परीक्षा में पांचवां स्थान हासिल करने वाली विभूति ने बताया कि बचपन से ही उन्हें घर में कानूनी माहौल मिला। पिता डॉ. राजेश बहुगुणा ने वकालत करने के बाद वकालत पढ़ाने का पेशा अपना लिया।
पहले डीएवी पीजी कॉलेज में पढ़ाने के बाद वह लॉ कॉलेज प्रेमनगर में लंबे समय से बतौर प्राचार्य अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसी माहौल की वजह से उनके बड़े भाई विश्वनाथ ने एलएलबी की और इन दिनों वह एक निजी कंपनी में बतौर लीगल मैनेजर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
गुरु नानक एकेडमी से 69 प्रतिशत अंकों के साथ 10वीं और 80 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं करने वाली विभूति बहुगुणा ने लॉ कॉलेज से बीए एलएलबी करते हुए गोल्ड मेडल हासिल किया। विभूति की मां रायपुर ब्लॉक की ब्लॉक प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि मां का हमेशा से एक सपना रहा है कि वह एक दिन जज बनें। लिहाजा, आज मां का सपना भी पूरा हो गया। परिवार में इससे खुशी की लहर है।
अपने प्रदेश में सेवा करने का सपना
भले ही विभूति का चयन हिमाचल न्यायिक सेवा में हो गया हो लेकिन, उनका सपना अपने प्रदेश में सेवाएं देने का है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की न्यायिक सेवा परीक्षा में वह प्री पास कर चुकी हैं। अभी मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू होना बाकी है। वह इसमें शामिल होंगी। अगर यहां चयन हो गया तो निश्चित तौर पर वह उत्तराखंड को ही प्राथमिकता देंगी।
विभूति के टिप्स
- कोर सब्जेक्ट सीआरपीसी, एविडेंस, आईपीसी, खासतौर से संविधान में कांसेप्ट ज्यादा से ज्यादा क्लियर करने चाहिए। ज्यादातर राज्यों में यही विषय प्राथमिकता में होते हैं। जिस राज्य का एग्जाम देने जा रहे हैं, उसके कानून भी पढ़ने चाहिए।
- जो भी परीक्षा दो, उसके लिए पुराने प्रश्न पत्रों से तैयारी जरूर करें। इससे काफी फायदा होगा।
- किसी भी प्री परीक्षा की तैयारी में मल्टीपल च्वाइस वाले प्रश्नों की तैयारी को प्रमुखता से शामिल करें।
- प्री के बाद मेंस में तीन घंटे का टाइम मैनेजमेंट सबसे अहम होता है। कोशिश करें कि पेपर छूटना नहीं चाहिए। किसी भी तथ्य को इग्नोर न करें।
- रोजाना कम से कम एक हिंदी का अखबार और एक अंग्रेजी का समाचार पत्र जरूर पढ़ें। इससे देशभर की घटनाओं, बदलावों से आप अपडेट रहेंगे। अखबारों में एडिटोरियल पेज काफी अहम होता है।
- इंटरव्यू में केवल प्रश्न पूछना ही मकसद नहीं होता है। वहां आपका धैर्य, इस पद के लिहाज से आपकी पर्सनालिटी आदि के भी मायने होते हैं।
यूथ के लिए मैसेज
किसी भी प्रतियोगिता के लिए धैर्य सबसे ज्यादा अहम हैं। अगर प्रतियोगिता में जा रहे हैं और विफल हो जाएं तो घबराएं नहीं। लगातार हार्डवर्क को बनाए रखें। यह भरोसा रखें कि एक दिन आपका भी चयन जरूर होगा। इसी सोच के साथ तैयारी में जुटे रहें।