फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   dehradun tribal hostel closed

सिस्टम की सुस्ती से आदिवासी छात्राएं हुईं 'बेघर'

Mon, 07 Oct 2013 12:47 PM IST
मनीष त्रिपाठी/अमर उजाला, विकासनगर
मनीष त्रिपाठी/अमर उजाला, विकासनगर Updated Mon, 07 Oct 2013 12:47 PM IST
विज्ञापन
dehradun tribal hostel closed

राजधानी देहरादून के जौनसार बावर क्षेत्र में बोक्सा जनजाति की छात्राएं इन दिनों सिस्टम की सुस्ती की वजह से घर बैठी हुईं हैं। 2006 में लाखा मंडल से जुडली (धर्मावाला) में शिफ्ट हुए बालिका छात्रावास के बंद होने से इन लड़कियों को पिछले 15 दिनों से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

विज्ञापन


जौनसार बावर क्षेत्र में बोक्सा जनजाति की छात्राओं को पढ़ाई के दौरान रहने में दिक्कतों का सामना न करना पड़े इसके लिए सामाजिक संगठन भारतीय आदिम जाति सेवक संघ ने लाखा मंडल में आश्रम पद्धति बालिका छात्रावास खोला था। इसे 2006 में लाखा मंडल से जुडली (धर्मावाला) में शिफ्ट किया गया। यहां यह किराए के भवन में चल रहा था। इसमें रहकर लड़कियां आसपास के स्कूलों में पढ़ाई करती थी।
विज्ञापन


छात्राएं छात्रावास छोड़कर घर चली गई
मामले को बार-बार संबंधित विभाग के अधिकारी के संज्ञान में लाया गया लेकिन उसने कोई कार्रवाई नहीं की। अब जबकि छात्राएं छात्रावास छोड़कर घर चली गई हैं तो अधिकारी कह रहे हैं कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। इसकी जांच कराएंगे। जब तक जांच होगी छात्राएं घर बैठी रहेंगी। इस बीच उनकी पढ़ाई का क्या होगा, जबकि छमाही परीक्षाएं होने वाली हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


छात्रावास को चलाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से एक छात्रा के लिए दस माह के खर्च के लिए नौ सौ रुपये मिलने थे। जो जनजाति निदेशालय को बार-बार पत्र लिखने पर भी नहीं मिला। छात्रावास में आरंभ में 64 छात्राएं रहती थीं, लेकिन आर्थिक दिक्कतों की वजह से छात्राएं जाती रही तो केवल 25 लड़कियां बची थी। 15 दिन पहले छात्रावास को बंद करने की वजह से 25 छात्राएं भी घर चली गईं। अब इनकी पढ़ाई बंद हो गई है।

फरवरी में अमर उजाला ने छापी थी खबर
अमर उजाला ने फरवरी माह में मामले को प्रमुखता से उठाया तो अधिकारी नए सिरे से छात्रावास को धन मुहैया कराने की बात करने लगे। लेकिन इसी बीच अधिकारी बदल गए और मामला आया गया हो गया। फरवरी माह से लेकर अब तक छात्रावास से जुड़ी फाइल तहसील में धूल फांक रही है।


यह मिलना था छात्राओं को
केंद्र सरकार द्वारा गैर सरकारी संस्थाओं को जनजातिय क्षेत्र की बालिकाओं के शैक्षणिक उत्थान के लिए छात्रावास खोलने पर प्रति छात्रा के हिसाब से आर्थिक मदद दी जाती है। नियमों के मुताबिक हास्टल में रहने वाली प्रति छात्रा के लिए केंद्र के मानकों के हिसाब से दस महीने का 900 रुपए बजट तय है। छात्राओं को मुफ्त में यूनिफार्म, भोजन, स्टेशनरी, मेडिकल, कल्चरल एक्टिविटी के लिए भी दिए पैसे देने का प्रावधान है। पिछले तीन साल से भारतीय आदिम जाति सेवक संघ द्वारा जुडली में खोले गए छात्रावास को कोई मदद नहीं दी गई।

राशन और किराए के अभाव में 15 दिन पूर्व मजबूरी में छात्राओं को घर भेजना पड़ा। मेरी आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं की मैं सारा खर्च उठा सकूं।
-मीना श्रीवास्तव, वार्डन
मामले में जानकारी नहीं है। इसकी जांच की जाएगी और कारण जाना जाएगा कि आखिर क्यों अभी तक छात्रावास को धन नहीं मिला।
-टीकम सिंह पंवार जनजातीय निदेशक
मैंने अभी-अभी चार्ज लिया है। मामला संज्ञान में नहीं है। इस मामले से संबंधित जानकारी मिलने पर ही मैं कुछ कह सकूंगा।
-एके पांडेय एसडीएम विकासनगर

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed