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Dehradun : मुरादाबाद मंडल में दून समेत सभी रूटों पर बगैर कवच दौड़ रही हैं ट्रेनें, हादसे का जोखिम बरकरार
Sun, 04 Jun 2023 05:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा
करन सिंह दयाल, देहरादून
करन सिंह दयाल, देहरादून
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 04 Jun 2023 05:36 AM IST
सार
मुरादाबाद मंडल से रोजाना 275 ट्रेनें देश के विभिन्न शहरों के लिए निकलती हैं, जबकि अकेले देहरादून स्टेशन से साप्ताहिक और नियमित ट्रेनों को मिलाकर रोजाना 17 ट्रेनों दौड़ती हैं।
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- फोटो : iStock
विस्तार
मुरादाबाद मंडल में देहरादून समेत सभी रूटों पर भी ट्रेनें बगैर कवच तकनीक के दौड़ रही हैं। मुरादाबाद मंडल से रोजाना 275 ट्रेनें देश के विभिन्न शहरों के लिए निकलती हैं, जबकि अकेले देहरादून स्टेशन से साप्ताहिक और नियमित ट्रेनों को मिलाकर रोजाना 17 ट्रेनों दौड़ती हैं। इससे इन रूटों पर भी खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद सुरक्षा के लिए रेलवे कवच तकनीक का प्रयोग इन रूटों पर नहीं कर पा रहा है।
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ओडिशा के बालासोर में भीषण ट्रेन हादसे के बाद कहा जा रहा है कि रेल मंत्रालय की कवच तकनीक का प्रयोग अगर इस रूट पर हुआ होता तो हादसे को रोका जा सकता था। दरअसल, भारतीय रेलवे ने ट्रेनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रेन कोलिजन अवॉइडेंस सिस्टम (टीसीएएस) के नाम से देश में एक स्वचालित सुरक्षा प्रणाली विकसित की गई है। इसे ‘कवच’ नाम दिया गया है। यह प्रणाली ट्रेन के लोको पायलट का एक विश्वसनीय साथी है।
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अगर लोको पायलट कहीं गति को नियंत्रित करना या ब्रेक लगाना भूल जाता है तो कवच प्रणाली ब्रेक इंटरफेस यूनिट के माध्यम से ट्रेन को नियंत्रित करती है। जबकि, घने कोहरे, बरसात जैसे मौसम के दौरान भी ट्रेन संचालन की सुरक्षा और दक्षता सुनिश्चित करती है। केंद्र सरकार की ओर से बीते साल 2022 में इस प्रणाली को लाया गया था।
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