फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Dehradun Tea Gardens Golden History Challenged Chinese Tea Brokers in London Declared It the Finest

Uttarakhand: राजधानी दून की चाय ने कभी चीन की चाय को दी थी टक्कर, बागानों का रहा है एक स्वर्णिम इतिहास

Sat, 23 May 2026 05:46 PM IST
Renu Saklani रुद्रेश कुमार, माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
रुद्रेश कुमार, माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Sat, 23 May 2026 05:46 PM IST
सार

दून की चाय ने कभी चीन की चाय को टक्कर दी थी। लंदन के दलालों ने इसे चीन की चाय से भी बेहतर बताया था। 1881 में देहरादून में कुल 87 चाय बागान थे।

विज्ञापन
Dehradun Tea Gardens Golden History Challenged Chinese Tea Brokers in London Declared It the Finest
देहरादून चाय बागान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दून के चाय बागानों का एक स्वर्णिम इतिहास रहा है। सबसे पहले और अच्छी चाय बनाने वाले देश चीन को अगर किसी ने टक्कर दी थी तो वह थी देहरादून की चाय। इसकी पुष्टि खुद लंदन के बाजार के दलालों ने चाय के नमूनों से की थी।

विज्ञापन


दून में वर्ष 1881 में 87 चाय बागान होते थे जिनका सर्वोच्च उत्पादन 8.5 पाउंड (लगभग 4 लाख किलो) तक पहुंच गया था। इसके बाद 1907 में बाजार के कुछ निर्णयों के कारण चाय बाजार में बेहद उथल-पुथल मची जिसका असर देहरादून के चाय बाजार पर भी पड़ा। अंग्रेजी शासनकाल में वर्ष 1911 में प्रकाशित गजट में देहरादून की चाय का विस्तार से वर्णन मिलता है।
विज्ञापन


वर्ष 1840 में देहरादून के कौलागढ़ को चाय की खेती के लिए मुफीद मानते हुए चाय बागान लगाने की योजना अंग्रेज सरकार ने बनाई थी। यह काम सहारनपुर गार्डन के डॉ. जेमसन को दिया गया था। शुरुआत में यहां 400 एकड़ भूमि में चाय के पौधे लगाए गए।

विज्ञापन
विज्ञापन

अंग्रेजों के लिए थी खुशखबरी
पहली बार 1946 में यहां की पत्तियों को लंदन के दलालों को भेजा गया जो कि चाय का कारोबार दूसरे देशों में करते थे। उन्होंने जब चाय को पकाकर इसकी गुणवत्ता को परखा तो रिपोर्ट भेजी की देहरादून की चाय में चीन की चाय जैसा उससे भी बेहतर स्वाद है। हालांकि, उन्होंने इसकी गंध को अच्छा लेकिन सुगंध को थोड़ा कमजोर बताया था। यह अंग्रेजों के लिए एक खुशखबरी थी क्योंकि उस वक्त यह माना जा रहा था कि देहरादून की चाय असम और बंगाल की चाय से मुकाबला नहीं कर पाएगी। इसका एक कारण यह भी था कि ये दोनों क्षेत्र उस वक्त के सबसे बड़े बाजार कलकत्ता (अब कोलकाता) के बेहद करीब थे। वहीं से ज्यादातर विदेशी कारोबार होता था। इसके बाद वर्ष 1951 में एक अफसर जो कि चाय की खेती को देखने के लिए चीन में नियुक्त किया गया था ने यहां के पौधों को कमजोर बताया। हालांकि, एक बार फिर लंदन को इसके नमूने भेजे गए जिन्होंने फिर से यही पुष्टि की कि देहरादून की चाय अव्वल है और चीन की चाय के बराबर कई मामलों में उससे भी अधिक है।

1881 में शिखर पर पहुंच गया था उत्पादन
इन परिणामों के चलते देहरादून चाय बाजार जैसे गदगद हो गया। 1863 में चाय बागान का क्षेत्रफल 1700 एकड़ पहुंच गया। यह अगले 10 वर्षों में 2000 एकड़ को पार कर गया जिनसे 2.07 लाख पाउंड पत्तियों का उत्पादन होने लगा। वर्ष 1872 में ही यहां के चाय बागानों को कुल 20 हजार पौंड में नाहन के राजा को बेच दिया गया। अंग्रेजी शासन की निगरानी में उत्पादन जारी रहा और 1881 में यह अपने शिखर पर पहुंच गया। यहां 4.4 हजार एकड़ में चाय के बागान हुए जिनकी संख्या 87 पहुंच गई। इनसे लगभग साढ़े आठ लाख पाउंड चाय पत्तियों का उत्पादन होने लगा।
 

दून की ग्रीन टी ने 1872 में बनाई पहचान
देहरादून के चाय बागानों से उस वक्त तक केवल काली चाय का उत्पादन होता था। 1872 में यहां ग्रीन टी बनाई जाने लगी जिसकी प्रक्रिया काली चाय बनाने से थोड़ी अलग थी। इसमें 40-40 मिनट तक गर्म करने, सुखाने और अन्य प्रक्रियाएं शामिल थीं। इस चाय को काबुल और मध्य एशिया तक पहुंचाया जाने लगा। उस वक्त जब चीन अपनी चाय को लगभग 10 आना प्रति पाउंड बेचता था देहरादून की ग्रीन टी 13 आना प्रति पाउंड तक बिकने लगी थी। यह सब लगभग 30 वर्षों तक चला और यहां के चाय बागान के मालिकों की पौ बारह होने लगी।

1907 में चीन की चाय पर शुल्क समाप्ति से धड़ाम हुआ बाजार
चीन उस वक्त और आज भी चाय बाजार का बादशाह रहा है। वर्ष 1907 में भारत का चाय बाजार एक बड़ी गिरावट के दौर में आ गया। इसका कारण भी चीन ही बना। उस वक्त भारत और मध्य एशिया के देश चीन की चाय पर शुल्क (टैरिफ) लगाया करते थे। वर्ष 1907 में यह टैरिफ हटा दिया गया जिससे चीन से चाय का आयात सस्ता होने लगा। देहरादून की जो चाय 13 आना प्रति पाउंड बिकती थी वह आठ आना और इससे भी कम आ गई। धीरे-धीरे उत्पादन गिरने लगा। कुछ छोटे चाय बागान तो बंद ही कर दिए गए।

चाय-साय नहीं, हाई-फाई
कभी गल्ली-मोहल्लों के नुक्कड़ और टपरी पर मिलने वाली साधारण चाय अब हाई-फाई अंदाज में लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है। बदलते समय और लाइफस्टाइल के साथ चाय का स्वरूप भी पूरी तरह बदल चुका है। अब सिर्फ दूध-पत्ती वाली चाय ही नहीं बल्कि ग्रीन टी, लेमन टी, कुल्हड़ चाय, मसाला चाय, तंदूरी चाय, चॉकलेट चाय और फ्लेवर टी जैसे दर्जनों विकल्प बाजार में उपलब्ध हैं। शहर में तेजी से बढ़ते कैफे कल्चर ने चाय को एक नया प्लेटफॉर्म दिया है। पहले जहां लोग चाय के लिए टपरी या छोटे ढाबों पर जुटते थे वहीं अब युवा और परिवार आकर्षक कैफे और रेस्टोरेंट में बैठकर चाय का आनंद ले रहे हैं। इन कैफे में चाय को खास अंदाज में परोसा जा रहा है जो ग्राहकों को अलग अनुभव देता है। चाय के इस बदले स्वरूप में सोशल मीडिया की भी बड़ी भूमिका है। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर ट्रेंडिंग तंदूरी चाय या कुल्हड़ चाय ने युवाओं को खासा आकर्षित किया है। लोग सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि प्रेजेंटेशन और फोटो क्लिक करने के लिए भी इन कैफे की ओर रुख कर रहे हैं।
 

युवाओं की पहली पसंद बनी स्पेशल टी

युवाओं में अब नई-नई तरह की चाय का स्वाद लेने का ट्रेंड बढ़ रहा है। कॉलेज-स्कूल के छात्र और ऑफिस जाने वाले लोग अब दोस्तों के साथ कैफे में बैठकर चाय के साथ बातचीत करना पसंद कर रहे हैं। इससे चाय सिर्फ एक पेय नहीं बल्कि सोशल एक्सपीरियंस बन चुकी है।

ये भी पढे़ं...Uttarakhand: मुख्य सचिव ने की उच्चस्तरीय बैठक, चारधाम यात्रा, हीट वेव और मानसून तैयारियों को लेकर दिए निर्देश

रोजगार के नए अवसर भी बढ़े
चाय के इस हाई-फाई रूप ने रोजगार के नए दरवाजे भी खोले हैं। शहर में कई युवाओं ने टी-स्टार्टअप भी शुरू किया है। छोटे-छोटे टी कैफे और फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिये लोग अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। उधर, भले चाय ने आधुनिक रूप ले लिया है लेकिन आज भी अदरक-इलायची वाली पारंपरिक चाय का स्वाद लोगों के दिलों में बसा हुआ है। सुबह की शुरुआत और शाम की थकान मिटाने के लिए आज भी वही देसी चाय सबसे ज्यादा पसंद की जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed