बेटे न पूछे हाल तो बुजुर्ग ऐसे सिखा सकते हैं उन्हें सबक
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बेटे की उपेक्षा का दंश झेल रही बुजुर्ग महिला को देहरादून में एसएसपी ने मकान गिरवी रखकर बैंक से बतौर ब्याज रकम लेने की राह दिखाई है।
यही नहीं बैंक प्रबंधक से बात कर सीनियर सिटीजन सेल के एक पुलिस कर्मचारी की ड्यूटी भी लगा दी है। कप्तान ने दावा किया कि इससे न तो उन्हें खर्च में दिक्कत आएगी और दूसरा दावेदारों को रकम भुगतान करने पर ही संपत्ति के मूल कागजात मिल पाएंगे।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पुष्पक ज्योति से सोमवार को एक बुजुर्ग महिला मिलकर बिलख उठी। बताया कि उसका तीन बेटे हैं, जिनमें से दो बाहर हैं, जबकि तीसरा साथ में रहता है। बेटे न तो उसका ख्याल रखते हैं और न ही किसी तरह का खर्च दे रहे हैं।
पति की मौत के बाद उसके सामने सुबह-शाम दो रोटी का भी संकट है। एसएसपी ने बेटों को सबक सिखाने के लिए सलाह दी तो महिला इसके लिए तैयार हो गई। कप्तान ने बैंक के प्रबंधक से बात कर रिवर्स मोर्गेज स्कीम की जानकारी ली। महिला को बताया कि वह अपना मकान बैंक में गिरवी रखकर उसके आधार पर निर्धारित अवधि तक ब्याज ले सकती हैं।
बेटों को करना होगा उस राशि का भुगतान
इससे उसका खर्च भी चलता रहेगा और दूसरा बेटों पर भी मकान का दबाव बना रहेगा। संपत्ति का दावेदार होने के कारण बेटों को ही उस राशि का भुगतान करना होगा।
यदि बेटा रकम नहीं देता तो ऐसी स्थिति में बैंक नियमानुसार मकान की नीलामी करा देगा। एसएसपी ने बैंक की पचारिकता पूरी करने के लिए सीनियर सिटीजन सेल के एक पुलिस कर्मचारी की ड्यूटी लगा दी है।
मकान की मालिक होने के कारण बुजुर्ग महिला अपने जीवन यापन के लिए कोई भी फैसला ले सकती है। पीड़ित महिला को बैंक से रिवर्स मौर्गेज स्कीम का लाभ दिलाने की कार्रवाई शुरू करा दी है। ऐसे में कम से कम वह किसी की मोहताज नहीं रहेगी। बेटों को यदि संपत्ति चाहिए तो मां की देखभाल की जिम्मेदारी निभानी होगी।
- पुष्पक ज्योति, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
क्या है रिवर्स मौर्गेज स्कीम
भारतीय स्टेट बैंक द्वारा अकेले रह रहे सीनियर सिटीजन के लिए रिवर्स मौर्गेज स्कीम चलाई जा रही है। इसके तहत बच्चों की उपेक्षा का शिकार होने वाले बुजुर्गों को आत्मनिर्भर बनाया जाता है। इसके तहत बैंक सीनियर सिटीजन की संपत्ति की कीमत लगाकर एक निर्धारित अवधि तक उसका ब्याज उपलब्ध कराता है।
मकान मालिक के साथ कोई दुर्घटना होने पर मालिकाना हक जताने वालों से ब्याज समेत उस राशि को जमा कराने के लिए कहा जाता है। यदि रकम उपलब्ध हो जाती है तो बैंक मकान के मूल कागजात लौटा देता है।
इनकार करने की स्थिति में अग्रिम कार्रवाई अमल में लाई जाती है। इस स्कीम का लाभ उठाने के लिए संपत्ति नाम होने के साथ आवेदन करने वाले की उम्र 60 साल या इससे अधिक होनी चाहिए। संपत्ति पर सात से लेकर आठ प्रतिशत ब्याज मिल सकता है।