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'पुलिस का दावा 'लाइव', दस बजे सो जाएगी पुलिस'

Sat, 30 Aug 2014 10:00 AM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 30 Aug 2014 10:00 AM IST
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dehradun police expose in night at city

एक ही दिन में दो रईसजादों ने शराब और रफ्तार के रोमांच में तीन बेकसूरों की जिंदगी छीन ली तब जाकर मित्र पुलिस जागी।

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शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर सख्ती के लिए शुक्रवार शाम पांच बजे से रात दस बजे तक चेकिंग अभियान चलाने का दावा किया। लेकिन दोपहर में बताई गई पुलिस की योजनाएं अंधेरा होते ही हवा हो गईं।

अमर उजाला की टीम ने शाम पांच बजे से रात दस बजे तक पुलिस की कार्रवाई की पड़ताल की तो हकीकत कुछ और ही नजर आई। बताए गए प्वाइंटों पर न तो पुलिस के बैरियर दिखे, न ही पुलिस कर्मचारी चेकिंग करते नजर आए। कम से कम पटेलनगर, बसंत विहार, कोतवाली क्षेत्र में तो ऐसा ही नजारा दिखाई दिया।
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रात 08:20 बजे

dehradun police expose in night at city

पटेलनगर कोतवाली क्षेत्र का मंडी तिराहा। रोज की तरह यहां पुलिस तैनात थी। एक उप निरीक्षक जेब में हाथ डालकर इधर-उधर टहल रहे थे। बाकी पुलिसकर्मी इधर-उधर फोन पर बात करने में मशगूल थे। यहां वाहनों की स्पीड कम करने के लिए न तो कोई बैरियर लगाया गया था और न ही किसी तरह की चेकिंग की जा रही थी। पुलिस के पास एल्कोमीटर तक नहीं था।

रात 08:45 बजे
बसंत विहार का जीएमएस रोड पर देना बैंक का चेकिंग प्वाइंट वीरान था। अमर उजाला का कैमरा चमका तो बैंक परिसर के भीतर बैठे एक दारोगा अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए दौड़कर सड़क की तरफ चले गए। दारोगा के साथ दो सिपाही की ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन दोनों सिपाही नहीं थे। चेकिंग का तो कोई सवाल ही नहीं था।

रात 09:05 बजे
शहर कोतवाली के भूसा स्टोर पर चेकिंग प्वाइंट होने का दावा किया गया था, लेकिन यहां तो कुछ भी नजर नहीं आया। न कोई पुलिसकर्मी तैनात था और न ही चेकिंग के लिए कोई बैरियर लगा था। जाहिर है कि कागजों में किए गए आदेशों का हकीकत में पालन नहीं हो पाया है।

पुराने चेक प्वाइंट, नया आदेश

dehradun police expose in night at city

शराब और रफ्तार पर रोक लगाने के मामले में लेबल नया, बोतल पुरानी वाली कहावत नजर आ रही है। दरअसल, पुलिस ने जो चेकिंग प्वाइंट बनाए हैं, वहां पहले से ही पुलिस की तैनाती रहती है। यदि पुलिस पहले से ही अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करती तो नई व्यवस्था को लागू करने की जरूरत नहीं पड़ती।

आदेश अनुपालन की फुरसत नहीं
अफसरों के आदेश भी पुलिस के लिए बेमानी हो रहे हैं। पहले दिन व्यवस्था बनाने के लिए नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों ने कोई जिम्मेदारी नहीं समझी। पुलिस के साथ यातायात पुलिस के अधिकारी भी कार्रवाई का बखान करते रहे, लेकिन किसी ने भी सड़क पर आकर सच से रूबरू होने की जहमत नहीं उठाई।

टल गए बडे़ हादसे
शहर में शुक्रवार रात दो बड़े हादसे टल गए। तूफानी रफ्तार से दौड़ रही स्कार्पियो कार जीएमएस रोड पर बाइकसवार को बचाने के प्रयास में डिवाइडर से टकराने से बाल-बाल बच गई। भूसा स्टोर के कट पर यातायात संचालन की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण तीन वाहन टकराने से इंच भर से बच गए। दोनों हादसे होते तो बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता था।

चेकिंग प्वाइंट व्यवस्था का शुक्रवार को पहला दिन था। हो सकता है कि कुछ कमियां रह गई हों। कुछ प्वाइंट मैंने खुद चेक किए, वहां पुलिस चेकिंग कर रही थी। शनिवार से चेकिंग को और प्रभावी बनाएंगे। देर रात तक एनआईवीएच गेट वैल्यू होटल चौक और आरा घर समेत चार स्थानों पर एल्कोमीटर लगाकर वाहन चालकों की चेकिंग की गई।
- अजय सिंह, एसपी सिटी

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रात को ट्रैफिक भगवान भरोसे

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पुलिस ने दावा किया है कि वह शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक शहर में 30 प्वाइंटों पर चेकिंगअभियान चलाएगी। लेकिन पिछले दिनों शराब के नशे में तेज रफ्तार के कारण जितनी भी घटनाएं हुई हैं सभी रात 10 बजे के बाद हुई हैं।

शराब के नशे में वाहन चालक गाड़ी को तभी हवाई जहाज बना रहे हैं जब सड़क पर ट्रैफिक कम हो जाता है और इसी समय सड़कों से पुलिस गायब हो जाती है। ऐसे में पुलिस के अभियान की हवा निकलनी स्वाभाविक है।

बता दें कि अक्सर रात नौ बजे के बाद शहर के चौराहों से पुलिस कर्मचारी गायब हो जाते हैं। इसके बाद पूरी यातायात व्यवस्था भगवान भरोसे हो जाती है। यदि किसी चौराहे पर पुलिस वाले होते भी हैं तो वह ट्रैफिक को नियंत्रित नहीं करते हैं। लोग अपनी मर्जी से जहां चाहें वाहन दौड़ाते हैं।

इसका नतीजा यह होता है कि रात को लोग शराब पीकर वाहन चलाते हैं और उन्हें रोकने टोकने वाला कोई नहीं होता है। यदि रात को यातायात व्यवस्था के नियमों का पालन कराने में सख्ती की जाए तो कोई भी शराब पीकर गाड़ी चलाने की जुर्रत नहीं करेगा। चूंकि रात को वाहनों की चेकिंग नहीं होती और चौराहों पर पुलिस वाले नहीं होते हैं इसलिए लोग शराब पीकर तेजी से वाहन चलाते हैं।

ट्रैफिक नियंत्रण की व्यवस्था चुस्त नहीं

dehradun police expose in night at city

राजधानी में यातायात नियंत्रित करने के लिए कोई व्यवस्था दिखाई नहीं देती है। सड़कों पर ट्रैफिक सिग्नल बनाए तो गए हैं लेकिन उनकी निगरानी के लिए कोई नहीं होता है। यदि किसी चौराहे पर पुलिस वाले तैनात भी किए गए हैं तो उनकी दिलचस्पी वाहनों को नियंत्रित करने में कम होती है।

कई बार देखा गया है कि चौराहों पर चालक अपनी मर्जी से वाहनों को इधर-उधर भगा रहे होते हैं। इस वजह से चौराहों पर जाम लग जाता है। इस अव्यवस्था की वजह से लोगों को परेशानी तो होती ही है हादसे भी होते हैं। एक ताजा सर्वे के अनुसार देश भर में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में से 50 फीसदी हादसे ट्रैफिक जंक्शन पर होते हैं।

पुलिस ऐसे करे ट्रैफिक कंट्रोल

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शहर के लगभग सभी व्यस्त चौराहों पर ट्रैफिक लाइट लगाई जाए। इसके अलावा प्रत्येक चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की जाए। चौराहों पर ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए बूथ बनाएं जाएं, जहां एक सिपाही हमेशा तैनात रहे।

प्रत्येक चौराहे पर दो सिपाही एक बाइक के साथ तैनात किए जाएं, ताकि यदि कोई वाहन चालक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करके भागता है तो दौड़ाकर पकड़ा जाए और उसे चालान काटकर सबक सिखाया जाए। चौराहों पर तैनात पुलिस वालों को आधुनिक संचार सेवाओं की सुविधा दी जाए, ताकि उनका एक से दूसरे चौराहे के पुलिस के जवान से संपर्क बना रहे। यदि कोई वाहन चालक एक चौराहे से भागता है तो वहां से सूचना प्रसारित की जाए और वह अगले चौराहे तक पकड़ लिया जाए।

हालांकि एसपी ट्रैफिक प्रदीप कुमार का कहना है कि ऐसी व्यवस्था है। चौराहों पर सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। सीपीयू भी सुबह 8 बजे से रात 1 बजे तैनात रहती है। चौराहों पर तैनात पुलिस कर्मी नियमों का उल्लंघन कर भागने वाले वाहन चालकों की सूचना सीपीयू को देते हैं। फिर सवाल यह उठता है कि यदि व्यवस्था लागू है तो उसका कोई परिणाम क्यों नहीं निकल रहा है?

रात में हो वाहनों की चेकिंग और चौराहों पर सख्ती

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पुलिस को चाहिए कि वह रात 9 बजे से 1 बजे तक तेजी से चलने वाले वाहनों की चेकिंग करे। यदि कोई चालक शराब पीकर वाहन चलाता मिले तो उसका चालान करे।

हालांकि, एसपी ट्रैफिक प्रदीप कुमार राय दावा करते हैं कि पुलिस ने एक जनवरी 2013 से 15 अगस्त तक 257 वाहन चालकों का चालान किया है। यदि इस आंकड़े पर यकीन किया जाए तो पिछले साढ़े सात माह में प्रति माह औसतन 34 चालान किए गए हैं। यानी हर रोज एक।

जाहिर है कि यह कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। होना यह चाहिए कि शराब पीकर वाहन चलाने वालों की चेकिंग की व्यवस्था स्थायी हो। इसके अलावा चौराहों पर तैनात पुलिस वाले भी सख्ती दिखाएं। तेजी से चलने वाले वाहनों को रोककर उनका चालान करें।

यदि कोई वाहन तेजी से निकलता है तो उसकी सूचना तत्काल अगले चौराहे पर तैनात पुलिस वालों को दें। हालांकि, एसपी ट्रैफिक दावा करते हैं कि उन्होंने ऐसी व्यवस्था बना रखी है। यदि कोई वाहन चालक ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करके भागता है तो उसे पकड़ने के लिए सिटी पेट्रोल यूनिट (सीपीयू) को जानकारी दी जाती है। सीपीयू संबंधित वाहन चालक को पकड़कर चालान कर देती है। लेकिन इसका कोई असर दिखाई नहीं देता है।

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