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Dehradun: आरएसएस के 100 वर्ष पर प्रमुख जन गोष्ठी; संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पूर्व सैनिकों से किया संवाद
Mon, 23 Feb 2026 05:13 PM IST
अलका त्यागी
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Mon, 23 Feb 2026 05:13 PM IST
सार
Dehradun News: संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि पूर्व सैनिकों को हम संघ की बात बताएंगे तो उनके लिए समझना ज्यादा आसान है।
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प्रमुख जन गोष्ठी में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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विस्तार
संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर देहरादून में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी के दूसरे दिन आज संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने पूर्व सैनिकों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि सेना के लोग संघ के बौद्धिक पहलु को छोड़ दें तो बाकी पूरी ट्रेनिंग पा चुके होते हैं। हथियारों की ट्रेनिंग हम नहीं देते, क्योंकि उसके लिए सेना है।
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पूर्व सैनिकों को हम संघ की बात बताएंगे तो उनके लिए समझना ज्यादा आसान है। सेना की तरह की समाज भी चल सकता है। इस दौरान पूर्व सैनिकों ने कई पहलुओं पर सवाल पूछे, जिसका संघ प्रमुख से बेबाकी से जवाब दिया। कार्यक्रम में मंच पर उनके साथ उत्तराखंड प्रांत संघ चालक बहादुर सिंह बिष्ट, क्षेत्र संचालक सूर्य प्रकाश टोंक मौजूद रहे।
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अंग्रेजों से पहले हम सात बार हुए परतंत्र
संघ प्रमुख डॉ. भागवत ने कहा कि अंग्रेज हमें गुलाम बनाने वाले पहले नहीं थे। उनसे पहले सात बार हम परतंत्र हुए। बार-बार कुछ लोग आकर हमें गुलाम बना लेते थे। डॉ. आंबेडकर ने भी माना कि हमारी फूट ने उन्हें तश्तरी में हमारी आजादी सौंपी। सबको चिंता थी कि अपने समाज में एकता नहीं है। मैं कौन हूं, मुझे पता नहीं तो अपने कौन हैं, ये भी पता नहीं चलता। समाज को एकता, गुणवत्ता वाला बनाएं। डॉ. हेडगेवार ने माना कि विविधता ही हमारी एकता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य तैयार करने की मैथोडोलॉजी का नाम ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ है।
देश-विदेश में भारत के प्रति भ्रामक प्रचार किया गया
संघ प्रमुख ने कहा कि एक समय पड़ोसी देश पाकिस्तान सहित सभी भारतीय थे। उन्होंने नकार दिया कि वो भारतीय हैं, लेकिन हम भारतीय हैं और रहेंगे। हम आगे बढ़ रहे हैं। 75 साल से बाकी सब देश दुख में हैं। भारत एक है। भाव से बंधा हुआ, भूमि से जुड़ा एक पूरा समाज भारत है। पड़ोसी देश भी जान रहे हैं कि यही सत्य है। हमने संकटकाल में उनकी मदद की। जल्द वो इसको समझेंगे। उनका अच्छा रहे तो हमारा भी अच्छा रहेगा। भारत में और दूसरे देशों में हमारे देश के प्रति भ्रामक प्रचार का अभियान चला है।
हमें किसी पूजा पद्धति पर आपत्ति नहीं, देश के साथ एकनिष्ठ हों
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि खानपान, पूजा, कर्मकांड में हम अटके नहीं। देशकाल परिस्थिति के हिसाब से सब सही है। मिलजुलकर रहो। हमारा ये स्वभाव ही हिन्दू है। ये संज्ञा नहीं विशेषण है। हिन्दू धर्म विश्व, मानव धर्म है। ऐसा आचरण हमने जीवित रखा। हम इतिहास के उतार चढ़ाव के बीच इसको बनाने का काम करते रहे। इस देश की पहचान बताने वाला शब्द हिन्दू है। हिन्दू को पता है कि वो हिन्दू है, लेकिन अंग्रेजों ने फूट डालने के लिए हमें बांटने का काम किया। जो विचाधारा बाहर से आई(ईसाई, इस्लाम व अन्य),वो उनकी पूजा पद्धति है। हमें किसी पूजा पद्धति पर कोई आपत्ति नहीं। सबकी नसों में एक ही खून है। डीएनए एक ही है। हमारे आपके वही पूर्वज हैं। देश के साथ एकनिष्ठ हों। ये होने से आदमी हिन्दू होता है। इसके लिए कुछ छोड़ना नहीं पड़ता।