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घंटों बंद रहा मसूरी मार्ग, आपदा कंट्रोल रूम ने नहीं उठाया फोन

Sun, 24 Jul 2016 07:51 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, मसूरी
ब्यूरो / अमर उजाला, मसूरी Updated Sun, 24 Jul 2016 07:51 PM IST
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dehradun mussoorie route block, control room not pick call
मसूरी मार्ग - फोटो : file photo

मसूरी में बीती शनिवार रात हुई मूसलाधार बारिश के चलते मसूरी-देहरादून मार्ग पर भट्टा गांव के पास पहाड़ी दरकने से सड़क पर भारी मात्रा मे मलबा एकत्र हो गया। जिससे मार्ग यातायात के लिए अवरूद्घ हो गया।

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आलम यह था कि जब मार्ग खुलवाने के लिए शहर कोतवाल और सीओ रामेश्वर प्रसाद डिमरी ने लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं को मोबाइल पर सूचना देनी चाही तो फोन नहीं उठा। जिसका खामियाजा देश-विदेश से आए पर्यटक और स्थानीय लोगों को झेलना पड़ा।
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लोगों के वाहन लगभग दो घंटे तक जहां के तहां फंसे रहे। चौकाने वाली बात यह रही कि पुलिस क्षेत्राधिकारी रामेश्वर प्रसाद डिमरी ने आपदा कंट्रोल रूम में फोन लगाया तो वहां से भी कोई जबाव नहीं मिला।
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काफी देर तक मोबाइल पर संपर्क करने के बाद पी डब्लू डी के अभियंता ने फोन उठाया। उसके बाद जेसीबी भिजवाकर मलबा हटाया गया। दो घंटे बाद मार्ग यातायात के लिए खुला। बतातें चले कि रविवार सुबह लगभग नौ बजे भट्टा गांव के समीप पहाड़ी दरकने से मलबा सड़क पर जमा हो गया।

दो घंटे बाद मार्ग खुल गया। जिससे अपने गंतव्य को जाने वाले पर्यटक और अन्य लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मलबा हटने बाद पर्यटकों के वाहन मसूरी की और खिसके। मगर किंक्रेग में निर्माणाधीन मल्टी स्टोरी पार्किंग सड़क बेहद संकरी होने से वाहन कछुए की तरह रेंगते आगे बढ़े।

गौरतलब है कि कि मसूरी और राजधानी की दूरी लगभग तीस किलोमीटर है। पर्यटन नगरी वीआईपी टाउन भी है। साथ ही यहा पर लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, आईटीबीपी और आईटीएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थान हैं। जहां वीआईपी मूवमेंट बना रहता है। और राजधानी से सबसे नजदीक है। इसके बाद भी लोक निर्माण विभाग और आपदा कंट्रोल रूम की स्थिति यह है।

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड के दूरदराज गांव और कस्बों को जोड़ने वाले मार्गों की क्या स्थिति होगी। सीओ रामेश्वर प्रसाद डिमरी ने बताया मौके पर जेसीबी होती तो महज आधा घंटे में मार्ग खुल जाता।


यहां यह बताना भी जरूरी है कि मसूरी-देहरादून मार्ग पर भट्टा गांव से चूनाखाला और कोल्हूखेत के पास ही मार्ग भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील है। इसलिए इन स्थानो पर बरसात के दिनों में जेसीबी का रहना नितांत आवश्यक है।

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