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‘कूड़े’ में देहरादून नगर निगम की योजनाएं
सुनीत द्विवेदी / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 24 Jan 2017 11:13 AM IST
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नगर निगम देहरादून
- फोटो : file photo
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दो साल में नगर निगम ने कई योजनाएं बनाईं, लेकिन इनमें से अधिकांश योजनाएं केवल कागजों में ही सिमट कर रह गईं।
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बात चाहे डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की हो या फिर सड़क पर लगी स्ट्रीट लाइटों की। हर जगह बुरा हाल है। ये वे उदाहरण हैं, जिनसे हम रोजाना जूझते हैं। यदि योजनाओं की समय पर मॉनीटरिंग होती तो शायद शहर की सूरत कुछ और ही होती। पर निगम ने पिछले दो साल में अन्य कई बड़े सपने शहर के लोगों को दिखाए। जो अब सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं।
अभी तक खुले से शौचमुक्त नहीं हुए 40 वार्ड
स्वच्छ भारत मिशन के तहत निगम के सभी वार्डों को खुले से शौचमुक्त बनाया जाना था, लेकिन अब तक केवल 20 वार्डों में ही निगम को कामयाबी मिली है। ऐसे में 2017 में होने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण में देहरादून की रैंकिंग में कैसे सुधार होगा? अंदाजा लगाया जा सकता है।
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सपना बना सर्विस डक्ट
पलटन बाजार के सुंदरीकरण के लिए सर्विस डक्ट का प्रस्ताव बनाया गया था। फुटपाथ तोड़कर टेलीफोन, बिजली और पानी की लाइनों को भूमिगत किया जाना था। ऊर्जा निगम के साथ ही अन्य विभागों ने इसका सर्वे कराया, लेकिन सहमति के बाद भी प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका।
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अब तक नहीं हुआ गांधी पार्क का सुंदरीकरण
दो साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन अब तक गांधी पार्क के सुंदरीकरण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। दिसंबर 2016 में अमृत योजना के तहत गांधी पार्क में चिल्ड्रेन पार्क का शिलान्यास किया गया। साढ़े चार करोड़ के इस प्रोजेक्ट के लिए पहली किश्त के रूप में डेढ़ करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं।
अंडरग्राउंड डस्टबिन की योजना भी नहीं चढ़ी परवान
गंदगी हटाने के लिए शहर में 80 अंडर ग्राउंड डस्टबिन लगाई जानी थी। सभी डस्टबिन जर्मन टेक्नोलॉजी पर आधारित थी। पर दो सालों में निगम क्षेत्र में केवल 16 अंडरग्राउंड डस्टबिन लगाई गई हैं। बाकी डस्टबिन लगाने के लिए अब तक निगम जगह नहीं ढूंढ सका है।
दो साल बाद भी ठप है मोबाइल टायलेट योजना
शहर के मुख्य बाजारों में टायलेट की कमी है। इसे देखते हुए निगम ने दो वर्ष पहले छह मोबाइल टायलेट खरीदने का प्रस्ताव बनाया था। जो अभी तक पूरा नहीं हुआ। फिलहाल कहा जा रहा है कि इस वर्ष यह योजना पूरी हो जाएगी।
गोबर गैस ऊर्जा संयंत्र
नगर निगम क्षेत्र में दर्जनों डेयरियां हैं। इनसे बड़ी मात्रा में गोबर निकलता है। इसके लिए करीब दो साल पहले पटेल नगर के ब्राह्मणवाला में गोबर गैस ऊर्जा संयंत्र प्लांट लगाने का प्रस्ताव तैयार हुआ था। इसके तहत करीब एक हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन होना था। निगम ने इसकी डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी। इसके बाद से योजना ठंडे बस्ते में है।
दो साल से भी ज्यादा पुरानी योजनाएं
- नगर निगम को घंटाघर का सुंदरीकरण करना था, जो करीब 11 साल बाद भी पूरी नहीं हो सका है। फिलहाल, ओएनजीसी ने कुछ माह पहले 78 लाख की डीपीआर को मंजूरी दी है।
- 2008 से शीशमबाड़ा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाए जाने की योजना थी। जो आठ साल में भी पूरी नहीं हुई। महापौर ने प्लांट 31 जनवरी तक तैयार होने का दावा किया है। पर मौजूदा हालत देखते हुए नहीं लगता कि मई से पहले प्लांट तैयार हो सकेगा।
ये सारी योजनाएं मेरे कार्यकाल से पहले की हैं। फिर भी इन्हें दिखवाया जा रहा है। रुके हुए कार्यों को जल्द ही शुरू कराया जाएगा।
- रवनीत चीमा, नगर आयुक्त