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Dehradun: जेहादी ड्रग्स मामला; बदनाम ग्रीन हर्बल फैक्टरी को कहां से मिला कच्चा माल?, एनसीबी तलाश रही लिंक

Mon, 18 May 2026 10:09 PM IST
Alka Tyagi माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Mon, 18 May 2026 10:09 PM IST
सार

फैक्टरी में इस ड्रग्स का निर्माण बंद था लेकिन अब भी यहां दूसरी प्रतिबंधित दवाई बनाई जा रही थी। सवाल अब भी यह है कि इस ड्रग्स के लिए कच्चा माल कहां से देहरादून पहुंचा था।

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Dehradun Jihadi Drugs Case From Where Did Notorious Green Herbal Factory Procure Raw Materials
एनसीबी - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

जेहादी ड्रग्स (कैप्टागन) के मामले में देहरादून के सेलाकुई की बदनाम ग्रीन हर्बल फैक्टरी का नाम जुड़ा है। इसमें बड़े पैमाने पर यह खतरनाक ड्रग्स बनाई गई है। नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने फैक्टरी को तो सील कर दिया है लेकिन बड़ा सवाल अब भी यह है कि इस ड्रग्स के लिए कच्चा माल कहां से देहरादून पहुंचा था।

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फिलहाल फैक्टरी में इस ड्रग्स का निर्माण बंद था लेकिन अब भी यहां दूसरी प्रतिबंधित दवाई बनाई जा रही थी। एनसीबी ने इस इस दवा को भी सील कर दिया है। बता दें कि यह फैक्टरी पहले भी विवादों में आई थी। वर्ष 2024 में स्थानीय पुलिस ने यहां पर बड़े पैमाने पर बनाई जा रही नकली दवाएं बरामद की थीं। इसके बाद इस फैक्टरी को सील कर दिया गया था। पिछले साल न्यायालय के आदेश पर सील खुली और ग्रीन हर्बल में फिर से वही गतिविधियां शुरू हो गईं।
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इस बार बात नकली दवाओं तक ही सीमित नहीं रही बल्कि खतरनाक प्रतिबंधित ड्रग्स कैप्टागन के निर्माण तक पहुंच गई। बताया जा रहा है कि इस कंपनी ने करीब छह महीनों तक ड्रग्स माफिया के कहने पर कैप्टागन को बनाया था। इनकी तादात लाखों गोलियों में हो सकती है।
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ऐसे में अब एनसीबी इस बात की जांच कर रही है कि देहरादून में इस ड्रग्स के लिए कच्चा माल कहां से आया? ऐसे में संजय कुमार से पूछताछ के बाद ही कुछ खुलासा होने की उम्मीद है। बता दें कि एनसीबी ने पिछले दिनों 182 करोड़ रुपये की कैप्टागन ड्रग्स बरामद की थी जिसके बाद देशभर में कार्रवाई की जा रही है। कैप्टागन ड्रग्स को जेहादी ड्रग्स भी कहा जाता है।

एनसीबी मुख्यालय की ओर से स्थानीय इकाई को इस फैक्टरी के बारे में सूचना दी गई थी। एडिशनल डायरेक्टर एनसीबी देहरादून देवानंद ने बताया कि टीम ने यहां की सभी मशीनों को सील कर दिया है और संचालक संजय कुमार को गिरफ्तार कर दिल्ली मुख्यालय टीम को सौंप दिया है।

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