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दोबारा पास कराना होगा हाउसिंग प्रोजेक्ट का नक्शा

Thu, 07 Jul 2016 03:07 PM IST
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 07 Jul 2016 03:07 PM IST
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dehradun housing project map
- फोटो : Demo pic

देहरादून में निर्माणाधीन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को अपना नक्शा दोबारा पास कराना पड़ेगा। इकोनॉमिकल वीकर सेक्शन के लिए प्रोजेक्ट में निर्माण ना करवाने वाले बिल्डरों के लिए यह आवश्यक होगा।

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रिवाइज्ड मैप में उन्हें साफ करना होगा कि पहले मैप में उन्होंने जिस जमीन पर इडब्ल्यूएस के लिए फ्लैट दर्शाए हैं, उस जमीन पर अब क्या होगा। एमडीडीए के शेल्टर फंड में बिल्डर करीब आठ करोड़ रुपये की धनराशि जमा करा चुके हैं। 
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दरअसल नवंबर 2011 में जारी शासनादेश के अनुसार प्रत्येक ग्रुप हाउसिंग और कॉलोनी के ले आउट प्रोजेक्ट में 10 फीसदी फ्लैट व प्लाट दुर्बल आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए तैयार करने होते हैं। इनका आवंटन संबंधित प्राधिकरण, जिला प्रशासन और संबंधित बिल्डर या कॉलोनाइजर संयुक्त रूप से करते हैं।
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30 मार्च 2016 को राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर शासनादेश जारी करते हुए ईडब्ल्यूएस फ्लैट और प्लाट ना देने वालों को उसकी कीमत के बराबर धनराशि (शेल्टर फंड) संबंधित प्राधिकरण को जमा कराने के निर्देश दिए। जिससे कि प्राधिकरण गरीबों के लिए आवासीय परियोजना तैयार कर सके। इसके बाद प्राधिकरण ने चार जून को सभी बिल्डरों को इडब्ल्यूएस फ्लैट का निर्माण करने या उसके बराबर शेल्टर फंड जमा कराने के निर्देश दिए थे।

शेल्टर फंड जमा कराने वाले बिल्डरों के सामने दिक्कत यह रहेगी कि अब उन्हें प्रोजेक्ट का रिवाइज मैप पास कराना होगा। इसमें उस जमीन का उपयोग दर्शाना होगा, जिसमें पहले उन्होंने इडब्ल्यूएस का प्रोजेक्ट दर्शाकर नक्शा पास कराया था। 

राजधानी में बन रहे सभी हाउसिंग प्रोजेक्ट की एमडीडीए अधिकारी जांच करेंगे। सचिव पीसी दुमका ने सभी सहायक अभियंताओं और अवर अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्र में बन रहे प्रोजेक्ट का मौका मुआयना करने के निर्देश दिए। प्रोजेक्ट में शेल्टर फंड ना देने वाले बिल्डर के मुख्य प्रोजेक्ट के साथ ही इडब्ल्यूएस के निर्माण की समीक्षा की जाएगी। बिल्डर को मुख्य प्रोजेक्ट के साथ-साथ और बराबर इडब्ल्यूएस फ्लैट भी तैयार करने होंगे। उसके निर्माण के बिना प्रोजेक्ट तैयार नहीं किया जा सकेगा। 


बिल्डर को इडब्ल्यूएस निर्माण की जमीन पर नए निर्माण का रिवाइज्ड मैप पास कराना होगा। साथ ही नए निर्माण को एप्रूव्ड भी कराना होगा। शेल्टर फंड ना जमा कराने वालों के प्रोजेक्ट की जांच कर इडब्ल्यूएस के निर्माण की समीक्षा की जाएगी।
- पीसी दुमका, सचिव, एमडीडीए

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