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ज्यादा ‘स्मार्ट’ बनने की कोशिश में लगा देहरादून को झटका

Fri, 29 Jan 2016 01:00 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 29 Jan 2016 01:00 PM IST
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dehradun have no place in smart city project first phase.

स्मार्ट दून के लिए आसान रास्ता अपनाना उत्तराखंड सरकार को आखिरकार झटका दे ही गया। पहले 20 स्मार्ट शहर से दून बाहर भी हो गया और बैठे-बिठाए सरकार के गले में चाय बागान का विवाद और पड़ गया।

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अब अगली सूची में शामिल हो जाने के इंतजार के अलावा प्रदेश सरकार के पास कोई अन्य विकल्प बचा ही नहीं है। मुख्यमंत्री हरीश रावत फिलहाल अगली प्रतिस्पर्धा की तैयारी पर ही जोर दे रहे हैं और उनका कहना है कि ग्रीन फील्ड के अलावा और कोई विकल्प था ही नहीं।
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स्मार्ट शहर के विकास के लिए केंद्र ने तीन विकल्प दिए थे। राज्य चाहते तो रेट्रोफिटिंग (वर्तमान शहर में ही उपलब्ध संरचनाओं का विकास कर स्मार्ट शहर बनाना), रीडेवलपमेंट (वर्तमान शहर को स्मार्ट बनाना) करते या फिर ग्रीन फील्ड (खाली क्षेत्र में स्मार्ट शहर बसाना) का विकल्प चुनते। प्रदेश में तीसरे विकल्प को चुना।
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प्रदेश सरकार को यह रास्ता आसान भी नजर आया। देहरादून से सटी चाय बागान की भूमि को इसके लिए चुना गया। कहा गया कि पहले दो विकल्प अपनाए गए तो दून में रह रहे कई लोगों के साथ करार करना पड़ेगा।

तीसरा विकल्प चुनने के कारण प्रदेश सरकार के गले मेंचाय बागान की भूमि का विवाद भी पड़ा और ठीक इसी वजह से दून पहले 20 शहरों की सूची में शामिल होने की दौड़ से भी बाहर हो गया। अधिकारियों के मुताबिक केंद्र ने ग्रीन फील्ड वाली सारी परियोजनाओं को रोक लिया। कहा गया कि इसमें भूमि की विस्तृत जानकारी जुटानी जरूरी है।

सारा ठीकरा केंद्र के सर

dehradun have no place in smart city project first phase.

अब प्रदेश सरकार के सामने राजनीतिक स्टंट के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचा है। कारण यह है कि स्मार्ट शहर के विकास के लिए कम से कम दो हजार करोड़ रुपये के सीधे निवेश की जरूरत है। इतने पैसे जुटाना प्रदेश सरकार के लिए आसान नहीं है। लिहाजा अब सारा ठीकरा केंद्र के सर फोड़ा जा रहा है।

अब अगले 20 शहरों की सूची में दून के प्रस्ताव को शामिल कराने के लिए उत्तराखंड को बाकी बचे 80 शहरों के बीच की प्रतिस्पर्धा से गुजरना होगा। अधिकारियों के मुताबिक केंद्र की ओर से निर्देश जारी होने के बाद प्रस्ताव को परखा जाएगा।

सवाल ग्रीन फील्ड का नहीं है। ग्रीन फील्ड का हमारा प्रस्ताव सही नहीं था तो तक नीकी परीक्षण में हमारा प्रस्ताव स्वीकार कैसे कर लिया गया। रीडेवलपमेंट में रिवर फ्रंट डेवलपमेंट में हमारा प्रस्ताव पहले से ही केंद्र के पास है। रेट्रोफिटिंग में हम मानक पूरे नहीं कर रहे थे।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री

हमारा प्रस्ताव हर तरह से पूरा था। फिर भी दून को पहले 20 शहरों में शामिल नहीं किया गया। यह उत्तराखंड की उपेक्षा है। अब 20 शहरों के लिए होने वाली प्रतिस्पर्धा में दून का प्रस्ताव भेजा जाएगा।
- प्रीतम पंवार, शहरी विकास मंत्री

स्मार्ट सिटी पर झूठी वाहवाही लूटने वाले भाजपा नेताओं को अब प्रदेश के लोगों से माफी मांगनी चाहिए। राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित होकर दून के प्रस्ताव को खारिज किया गया।
- सुरेंद्र कुमार, मुख्यमंत्री के मीडिया प्रभारी

ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट से पिछड़ा स्मार्ट दून

dehradun have no place in smart city project first phase.

स्मार्ट सिटी की दौड़ में दून के पिछड़ने का सबसे बड़ा कारण ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट का चुनाव माना जा रहा है।

दूसरे चरण में जिन 20 शहरों को चुना गया है, उसमें एक भी ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट शामिल नहीं किया है। देशभर से 15 शहरों ने ग्रीन फील्ड (नई जगह पर शहर बसाना) में स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है।

परियोजना के तहत पहले चरण में देशभर से 100 शहरों का चयन होना था। हालांकि बाद में पहले चरण में केवल 98 शहरों का ही चयन हुआ। इन शहरों को अपना स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट तैयार कर तीन माह के भीतर जमा करवाना था।

इसके लिए प्रत्येक राज्य में नोडल अफसरों की तैनाती की गई। उत्तराखंड में एमडीडीए के उपाध्यक्ष आर मीनाक्षी सुंदरम को परियोजना का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया। मौजूदा शहर में विस्तार और निर्माण की सीमित संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने चाय बागान क्षेत्र में नया शहर बनाने का प्रोजेक्ट तैयार किया।

सरकार की यही दांव दूसरे चरण में उल्टा पड़ गया। परियोजना के तहत देहरादून समेत देश के 15 शहरों ने ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट जमा कराया, जिन सभी को मायूसी ही हाथ लगी है। सबसे ज्यादा रेट्रो फिटिंग के 18 और रि डेवलपमेंट व रेट्रो कम रि डेवलपमेंट के एक-एक शहर को चुना गया है।

मूल्यांकन में फंसा पेंच
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट के मूल्यांकन में पेंच फंसने के बाद इस कैटेगरी में शामिल शहरों को अगले चरण में शामिल नहीं किया गया। ग्रीन फील्ड में दिए गए सभी प्रोजेक्ट बहुत अधिक विस्तृत और जटिल थे। नया शहर बसाने और वहां सुविधाएं उपलब्ध कराने का जो खाका खींचा गया, उसका मूल्यांकन करीब 20 दिन में करना खासा मुश्किल था।

इन श्रेणियों में बनने थे प्रोजेक्ट
रेट्रो फिटिंग- मौजूदा ढ़ांचे में सुधार
रि डेवलपमेंट- मौजूदा ढ़ांचे का पुनर्निर्माण
ग्रीन फील्ड- नई जगह, नया विकास

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