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‘अरे डीएम नहीं, कलेक्टर है भाई...’

Mon, 28 Apr 2014 05:05 PM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 28 Apr 2014 05:05 PM IST
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डीएम और कलेक्टर। काम अलग, जिम्मेदारी भी अलग, लेकिन इन्हें निभाने वाला अफसर एक। प्रशासनिक ढांचे की यह जानकारी अधिकतर नागरिकों को होगी, लेकिन दून पुलिस इतनी नादान है कि डीएम और कलेक्टर को अलग-अलग समझने की भूल कर बैठी।

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कोर्ट से आए एक आदेश पर मुकदमा दर्ज करने के दौरान कोतवाली पुलिस में इन शब्दों पर बाकायदा बहस भी चली। आखिर वही पक्ष भारी पड़ा, जिसका मानना था, ‘आदेश में डीएम नहीं, कलेक्टर लिखा है भाई...।’ लेकिन मुकदमा दर्ज हुआ और वरिष्ठ अफसर फोन घनघनाने लगे, तो कोतवाली पुलिस के हाथ-पांव फूल गए।
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एसएसपी को जानकारी ही नहीं
स्थिति यह थी कि डीएम बीवीआरसी पुरुषोत्तम यह मानने के लिए तैयार नहीं थे कि बिना शासन की अनुमति के उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वहीं, एसएसपी अजय रौतेला को पहले तो कोई जानकारी ही नहीं थी, लेकिन बाद में वह कोर्ट के आदेश का हवाला देकर मामला संभालते नजर आए।
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संपत्ति बंटवारे के कागजों में हेराफेरी और पत्रावली गायब होने के मुकदमे में पहले दो नंबर पर दो भाइयों, तीसरे नंबर पर दून कलेक्टर और चौथे नंबर पर अपर तहसीलदार शुजाउद्दीन का नाम लिखा है। शुक्रवार दोपहर आदेश कोतवाली पुलिस पहुंचा तो प्रभारी निरीक्षक ने इसे रूटीन मानकर मुकदमा दर्ज करने के लिए कह दिया।

मुंशी ने भी हूबहू रिपोर्ट दर्ज कर वादी को प्रति उपलब्ध करा दी। बाद में एक बुजुर्ग विवेचक ने रिपोर्ट पढ़ी तो कोतवाली में गहमागहमी शुरू हो गई।

विवेचक ने समझाया कि केस डीएम के खिलाफ दर्ज हुआ है, लेकिन बाकी मानने के लिए तैयार नहीं हुए। वे तो कलेक्टर और अपर तहसीलदार की रट लगाए रहे। काफी देर बाद स्थिति स्पष्ट हुई, तो मुकदमा लिखने वाले को कोसा जाने लगा।

खुद पुलिस कप्तान अजय रौतेला भी वाकिफ नहीं थे कि डीएम के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज हुआ है। जिलाधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम भी यही कहते रहे कि बिना अनुमति के उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं हो सकता है। बाकायदा उन्होंने प्रावधान का भी जिक्र किया। लेकिन बाद में कोर्ट के आदेश की बात कहे जाने पर वह मान गए।

गायब पत्रावली की तलाश शुरू
जमनीवाला के संपत्ति विवाद से जुड़ी पत्रावली पर तहसील में अफरातफरी मच गई। डीएम पर मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलते ही कर्मचारी तहसील और अपर तहसीलदार कोर्ट में पत्रावली की खोज में जुट गए।

डीएम ने लगाई अदालत में अर्जी

मुकदमा दर्ज करने के खिलाफ डीएम बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने सीजेएम कोर्ट में अर्जी लगा दी है। डीएम का कहना है कि मामले में उनकी नामजदगी गलत ढंग से कराई गई है। डीएम ने अर्जी में कहा है कि संबंधित पत्रावली नए सिरे से तैयार करने के मामले में दोनों पक्षों में सहमति बन चुकी है।


एडीएम करेंगे जांच
पत्रावली गायब होने के मामले में कुछ कर्मियों पर गाज गिरना तय है। डीएम ने मामले की जांच अपर जिलाधिकारी को सौंप दी है। पत्रावली कैसे गायब हो गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, ये जांच के मुख्य बिंदु रहेंगे। जिलाधिकारी का कहना है कि उन्हें इस प्रकरण की जानकारी पहले से थी, जिस पर कार्रवाई भी चल रही है।

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