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देहरादून के डीएम ने पास से देखी 'मौत'

Thu, 29 Aug 2013 09:35 AM IST
अमर उजाला, रजा शास्त्री, देहरादून
अमर उजाला, रजा शास्त्री, देहरादून Updated Thu, 29 Aug 2013 09:35 AM IST
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dehradun DM saw disaster

पहाड़ों पर जलप्रलय से तबाही-बरबादी के ‘जख्म’ भले ही अभी हरे हैं लेकिन नव-निर्माण का चक्र चल पड़ा है।

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उजाड़ केदारघाटी और दूसरे क्षेत्रों के पुनर्वास की चुनौतियां पहाड़ जैसी हैं। इनसे निपटने के लिए आठ सूत्री पुनर्वास रणनीति सरीखी कई योजनाएं लागू की जा रही हैं।

रुद्रप्रयाग के राहत आयुक्त रहे बीवीआरसी पुरुषोत्तम कहते हैं कि केदारघाटी के 26 दिन का अनुभव डीएम के दस साल से बिल्कुल अलग है। बीवीआरसी पुरुषोत्तम रुद्रप्रयाग से प्रशासनिक चुनौतियों का नया पाठ पढ़कर लौटे हैं।
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बुधवार सुबह जिलाधिकारी देहरादून का कार्यभार ग्रहण करने के पहले उन्होंने अमर उजाला से अपने राहत आयुक्त कार्यकाल के अनुभव साझा किए। उन्होंने 26 जुलाई को रुद्रप्रयाग के राहत आयुक्त की जिम्मेदारी संभाली थी। बताते हैं कि जिस दिन गुप्तकाशी पहुंचे उसके बाद छह दिन के लिए कट-आफ हो गए।

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इसी तरह तीन दिन केदारघाटी में फंस गए थे। जो पुलिसवाले कैंप में रह रहे थे उन्होंने खाने-पीने की व्यवस्था की थी। आपदाग्रस्त गांवों की अर्थव्यवस्था का बुनियादी ढांचा ढह गया है। संसाधन बह गए। इनके नवनिर्माण के लिए ग्रामसभाओं की बैठकें कीं।

क्षेत्रीय लोगों के मशविरे से बिजनेस मॉडल तैयार किया। एटीआई एनजीओ से लोगों की जरूरतों की फेहरिस्त तैयार कराई। ढाबा, डेयरी, मुर्गी पालन समेत विभिन्न विभागों की योजनाओं को मिलाकर आठ सूत्री पुनर्वास रणनीति तैयार की है।

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आपदाग्रस्त क्षेत्रों में बिजली तो पहुंच गई है। सबसे बड़ी चुनौती सड़कों को फिर से बनाना है। पीडब्लूडी का स्थायी डिवीजन खोल दिया गया है। श्रीनगर के अधीक्षण अभियंता को गुप्तकाशी में तैनात किया गया है। वहां माल्टा कल्टीवेशन व्यवस्था फिर से लागू किए जाने की जरूरत है।


आपदाग्रस्त क्षेत्रों के पुनर्निर्माण में सबसे बड़ी अड़चन बारिश है। दिन भर के काम पर रात की बारिश पानी फेर जाती है। कुछ नहीं बचता। लेकिन थोड़ा सा मौका मिलते ही काम शुरू कर दिया जाता है।

जिला पंचायत के रिकॉर्ड गायब
जलप्रलय में गौरीकुंड जिला पंचायत के सभी रिकॉर्ड बह गए हैं। किसी की संपत्ति का कोई रिकॉर्ड नहीं है। आर्थिक जनगणना के रिकार्ड से इसे फिर से तैयार करवाया जा रहा है। होटलों का सर्वे करके मुआवजा वितरित कर दिया गया है।

नब्ज टटोल नदी में कूद गई
आपदा के दौरान एक महिला, उसका पति और बेटा मलबे में दब गये। महिला किसी तरह मलबे से निकल आई, लेकिन उसका पति और बेटा मर गये थे। उसने पति और बेटे की नब्ज टटोली और उसके बाद नदी में छलांग लगाकर खुदकुशी कर ली। एनडीआरएफ के जवान इस घटना के गवाह बने।

रेस्क्यू टीम को रेस्क्यू करना पड़ा
आपदाग्रस्त क्षेत्रों में किसी के जाते ही फिक्र होने लगती है। पीडब्लूडी की 15 सदस्यीय टीम लापता हो गई। उनका पता लगाने के लिए रेस्क्यू टीम भेजी गई। वह जंगल में भटक गए। वायरसलैस मेसेज पर उन्हें एयर लिफ्ट कराया गया। तीन दिन बाद एक गांव में पीडब्लूडी की भी टीम मिल गई।

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