देहरादून क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल: दास्तान ए देशी पल्प...रोचक सत्र, बोले वक्ता- लुगदी पढ़कर बने नामी साहित्यकार
देहरादून क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल में लोकप्रिय साहित्य और उसके सामाजिक शैक्षिक महत्व पर चर्चा की गई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि लुगदी साहित्य सिर्फ मनोरंजन नहीं बौद्धिक विकास का भी जरिया है।
विस्तार
क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल ऑफ इंडिया के दूसरे दिन दास्तान ए देशी पल्प नामक एक रोचक सत्र का आयोजन किया गया। इसमें लोकप्रिय साहित्य और उसके सामाजिक शैक्षिक महत्व पर गहन चर्चा हुई। सत्र का संचालन पत्रकार संजीव मिश्रा ने किया, जिसमें पैनलिस्ट के तौर पर लेखक-संपादक सुबोध भारतीय, लेखक यशवंत व्यास और प्रकाशक रणधीर के. अरोड़ा शामिल हुए।
लुगदी साहित्य की मांग दुनिया में सबसे ज्यादा
सत्र की शुरुआत लुगदी साहित्य की परिभाषा पर चर्चा से हुई। लेखक सुबोध ने लुगदी को लोकप्रिय साहित्य बताया जिसे हर वर्ग पढ़ सके और जिससे उनका मनोरंजन हो सके। लेखक यशवंत व्यास ने इसे लोकप्रिय साहित्य, सिनेमा और अब ओटीटी के साथ जोड़ा। उन्होंने गुलशन नन्दा, वेद प्रकाश शर्मा और सुरेंद्र पाठक जैसे लेखकों का उदाहरण दिया जिनकी किताबें भारी मात्रा में बिकती थीं, लेकिन उन्हें अक्सर हल्का समझा जाता था।
बुल वर्ल्ड के प्रकाशक रणधीर के. अरोड़ा ने लुगदी साहित्य के शैक्षिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, बौद्धिक विकास स्कूल की किताबों के अलावा लुगदी साहित्य और जनरल किताबें पढ़कर भी होता है। हम बच्चों को जितनी अधिक किताबें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेंगे, उनका बौद्धिक विकास उतना ही होगा। उन्होंने 65 लाख की डकैती जैसी किताबों की भारी सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कोविड के बाद हिंदी की किताबों की सेल बहुत बढ़ी है, चाहे ऑनलाइन या ऑफलाइन बिक्री हो डिमांड में खासा इजाफा हुआ।
लुगदी पढ़कर बने नामी साहित्यकार
सुबोध ने एक महत्वपूर्ण बात साझा की कि लुगदी साहित्य पढ़कर ही नए लोग अच्छे स्तर के साहित्यकार बन गए। संजीव मिश्रा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि क्यों माता-पिता अक्सर बच्चों को हिंदी की लोकप्रिय किताबें पढ़ने से मना करते थे और अंग्रेजी किताबें पढ़ने को प्रोत्साहित करते थे।
लेखक यशवंत ने भी इस पर चिंता व्यक्त की कि मेरी अपनी किताब अंग्रेजी में जाएगी तो ज्यादा पढ़ी जाएगी, उन्होंने कहा कि असल में आज यह एक प्रणाली बन गई है, जिससे निकलने की जरूरत है। यह जिम्मेदारी लेखकों तथा सामाजिक नेतृत्व करने वालों की है कि वे हिंदी भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाएं। सुबोध ने बताया कि बच्चों को हिंदी की ओर आकर्षित करने के लिए अब सरकार की नीतियां और सीबीएसई बोर्ड के प्रयास नजर आ रहे हैं, जिसका लाभ भी मिलता नजर आ रहा है।
जेल से नामी लुगदी लेखक बने
अमर उजाला के समूह संपादकीय सलाहकार यशवंत व्यास ने कहा कि लुगदी साहित्यकार समाज के हर हिस्से से जुड़े हैं, इसलिए उसकी नब्ज जानते हैं। उन्होंने जेल से लेखक बने परशुराम ममगई की कहानी सुनाई, जो प्रेम और घर से भागने की घटना के बाद उसी लड़की के दुष्कर्म के आरोप में जेल पहुंचे, बाद में उसी लड़की ने उनके खिलाफ गवाही (भले परिवार के दवाब में) दी, जिससे उनका जीवन बदल गया। उन्होंने जेल को अपना लिया, बाद में जेल के एक कार्यक्रम के लिए नाट्य रूपांतरण किया, जिसके बाद एक पब्लिशर ने उनसे संपर्क किया, उसके बाद जेल में रहते हुए उनके उपन्यास छपने शुरू हुए। उन्होंने लुगदी साहित्यकार ओम प्रकाश शर्मा का भी उदाहरण दिया, जो मिल मजदूर होते हुए भी लैंप पोस्ट के नीचे बैठकर जासूसी उपन्यास लिखते थे।
नए पाठक और भविष्य की दिशा
चर्चा के दौरान नई पीढ़ी की पढ़ने की आदतों पर भी बात हुई। यशवंत ने कहा कि नॉन-फिक्शन पढ़ा जा रहा है और लेखक को हमेशा अपने पाठकों से ऊपर होना चाहिए। प्रकाशक रणधीर के. अरोड़ा ने बताया कि नए पाठकों को 200 पेज तक की किताब सुलभ लगती है और उनकी सेल अच्छी है। उन्होंने बताया कि अब एआई जनरेटेड फिक्शन की मांग भी देखी जा रही है।
यशवंत व्यास की किताब का विमोचन और अवॉर्ड की घोषणा
सत्र का समापन एक महत्वपूर्ण घोषणा के साथ हुआ। पैनलिस्ट यशवंत की नई किताब बेगमपुल से दरियागंज का विमोचन किया गया, जिसे पेंगुइन स्वदेश ने प्रकाशित किया है। इस मौके पर लेखक कुलभूषण कैन ने कहा कि उन्होंने आज तक अंग्रेजी की किताबें ही पढ़ी हैं, लेकिन बेगमपुल से दरियागंज पहली ऐसी किताब होगी जिसे वह रुचि की वजह से पढ़ रहे हैं। इसी दौरान घोषणा की कि अगले साल से क्राइम राइटिंग करने वालों के लिए ऑडियो-विजुअल समेत विभिन्न श्रेणियों में अवॉर्ड शुरू किए जाएंगे। ऐसा पूरी दुनिया में पहली शुरुआत होगी।
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क्राइम फेस्टिवल का आज आखिरी दिन
प्रकाशक रणधीर के. अरोड़ा ने बताया कि क्राइम फेस्टिवल में आम लोगों को जोड़ने के लिए हयात सेंट्रिक स्थित कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश निशुल्क है, लोग ज्यादा से ज्यादा भाग लेकर सामाजिक सरोकार से जुड़ी चर्चाओं में भाग लें और सामाजिक जागरूकता बढ़े, यही कार्यक्रम का मकसद है