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Dehradun News: उपेक्षाओं के चलते बर्बाद हो गया रामपुर मंडी का डीयर पार्क
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रामपुर मंडी स्थित डीयर पार्क उपेक्षाओं के चलते अपनी पहचान खो दी है। एक समय तक पर्यटकों की पहली पसंद रहे पार्क से अब लोगों ने मुंह मोड़ लिया है। पर्यटन केंद्र को सजाने-संवारने में पर्यटन और वन विभाग भी कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है।
रामपुर मंडी के वन आरक्षी प्रशिक्षण केंद्र परिसर में मौजूद डीयर पार्क एक समय तक पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हुआ करता था। परिसर में बने बाड़े में मौजूद हिरन पर्यटकों को आकर्षित करते थे। आसपास क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता लोगों को खूब भाती थी। आसन वैटलेंड और यमुना नदी के बीचोबीच स्थित यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीव और प्रवासी पक्षियों की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। पहले परिसर में बने पार्क में बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के झूले, नाश्ते आदि के लिए कैंटीन जैसी सभी सुविधाएं मिलती थी। प्रदेश में पहली सरकार बनने के बाद परिसर स्थित बाड़े से हिरनों को निकालकर देहरादून के मालसी चिड़ियाघर भेज दिया गया। तभी से यहां पर्यटकों की आवाजाही कम हो गई। उधर, पार्क की साफ-सफाई व झूलों का रख-रखाव नहीं होने से पर्यटकों ने यहां आना ही छोड़ दिया।
पर्यटन विकास की बननी चाहिए योजना
रामपुर मंडी के आसपास के ग्रामीणों को पर्यटन से जोड़ने और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए 2004 में बनाई गई ईको समिति के अध्यक्ष मोहम्मद आरिफ व मोहम्मद इकबाल का कहना है कि यमुना के किनारे पर स्थित इस खूबसूरत स्थान को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए वृहद स्तर पर योजना बनाई जानी चाहिए। इसमें बर्ड वाचिंग के साथ जंगल सफारी, पैदल ट्रैक, रात्रि विश्राम, खान-पान, सेल्फी स्थल आदि की सुविधा शुरू होनी चाहिए। क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य का नजारा लेने के लिए दूरबीन से लैस टावर आदि का निर्माण भी कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय निवासियों को नेचर गाइड, कैंटीन आदि व्यवसाय से जोड़ा जाना चाहिए।
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विधायक विकासनगर मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि वास्तव में रामपुर मंडी प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण स्थान है। इसको पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए वन विभाग, पर्यटन और शासन स्तर पर बात की जाएगी। इसकी खोई हुई पहचान को वापस लाने का प्रयास किया जाएगा।
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रामपुर मंडी के वन आरक्षी प्रशिक्षण केंद्र परिसर में मौजूद डीयर पार्क एक समय तक पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हुआ करता था। परिसर में बने बाड़े में मौजूद हिरन पर्यटकों को आकर्षित करते थे। आसपास क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता लोगों को खूब भाती थी। आसन वैटलेंड और यमुना नदी के बीचोबीच स्थित यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीव और प्रवासी पक्षियों की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। पहले परिसर में बने पार्क में बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के झूले, नाश्ते आदि के लिए कैंटीन जैसी सभी सुविधाएं मिलती थी। प्रदेश में पहली सरकार बनने के बाद परिसर स्थित बाड़े से हिरनों को निकालकर देहरादून के मालसी चिड़ियाघर भेज दिया गया। तभी से यहां पर्यटकों की आवाजाही कम हो गई। उधर, पार्क की साफ-सफाई व झूलों का रख-रखाव नहीं होने से पर्यटकों ने यहां आना ही छोड़ दिया।
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पर्यटन विकास की बननी चाहिए योजना
रामपुर मंडी के आसपास के ग्रामीणों को पर्यटन से जोड़ने और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए 2004 में बनाई गई ईको समिति के अध्यक्ष मोहम्मद आरिफ व मोहम्मद इकबाल का कहना है कि यमुना के किनारे पर स्थित इस खूबसूरत स्थान को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए वृहद स्तर पर योजना बनाई जानी चाहिए। इसमें बर्ड वाचिंग के साथ जंगल सफारी, पैदल ट्रैक, रात्रि विश्राम, खान-पान, सेल्फी स्थल आदि की सुविधा शुरू होनी चाहिए। क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य का नजारा लेने के लिए दूरबीन से लैस टावर आदि का निर्माण भी कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय निवासियों को नेचर गाइड, कैंटीन आदि व्यवसाय से जोड़ा जाना चाहिए।
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विधायक विकासनगर मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि वास्तव में रामपुर मंडी प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण स्थान है। इसको पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए वन विभाग, पर्यटन और शासन स्तर पर बात की जाएगी। इसकी खोई हुई पहचान को वापस लाने का प्रयास किया जाएगा।