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दीपदान करने की यह घड़ी है सबसे शुभ

Wed, 30 Oct 2013 08:15 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 30 Oct 2013 08:15 PM IST
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deepawali right deep celebration time

इस दीपावली को प्रदोष काल में दीपदान एवं लक्ष्मी पूजन करना शुभ रहेगा। ज्योषियों की माने तो इस दिन रात्रि 10 बजकर 52 मिनट तक स्वाति नक्षत्र रहेगा।

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आयुष्मान योग एवं तुला राशि का चंद्रमा होने से यह अमावस्या पुष्प-दायक रहेगी। इस दिन रात्रि में चार मुखी दीप जलाकर श्रीसूक्त लक्ष्मी सूक्त एवं कनकधारा स्त्रोत का पाठ करना शुभ होगा। इसके साथ ही लक्ष्मी-गणेश, काली-कुबेर पूजन करना शुभ माना जाता है।

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ये हैं शुभ मुहूर्त
बही खाता पूजन- शाम 6 बजकर 5 मिनट से 7 बजकर 58 मिनट तक वृष (स्थिर) लग्न और तुला राशि के सूर्य-चंद्रमा होने से यह समय अत्यंत शुभ रहेगा।

शाम 5 बजकर 25 मिनट से 7 बजकर 04 मिनट तक शुभ की चौघड़िया रहेगी। इसके बाद 7 बजकर 04 मिनट से 8 बजकर 43 मिनट तक अमृत की चौघड़िया रहेगी। इस योग में दीपदान, बहीखाता पूजन, कुबैर और श्रीमहालक्ष्मी पूजन दीप प्रज्जवलित करना शुभ रहेगा।
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प्रदोष काल शाम 5 बजकर 25 मिनट से 8 बजकर 5 मिनट तक है। निशीथ काल- तीन नवंबर को निशिथ काल रात्रि 8 बजकर 5 मिनट से 10 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। रात्रि 8 बजकर 43 मिनट से 10 बजकर 22 मिनट तक चर की चौघड़िया रहेगी। इस अवधि में श्रीसूक्त लक्ष्मी स्त्रोत आदि मंत्रों का अनुष्ठान कर सकते हैं।

महानिशिथ काल- रात्रि 10 बजकर 43 मिनट से अर्धरात्रि 1 बजकर 22 मिनट तक महानिशीथ काल रहेगा। इस अवधि में रात्रि 10 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक कर्क लग्न तदुपरांत सिंह लग्न भी उपासना, जप-पाठ आदि के लिए विशेष शुभ है। महालक्ष्मी पूजन रात्रि 10 बजकर 22 मिनट तक किया जा सकता है।

प्रदोष-काल, स्थिर लग्न शुभ
आचार्य भरत राम तिवारी ने बताया कि ब्रह्मपुराण के अनुसार लक्ष्मी पूजा दीपदान आदि के लिए प्रदोष तथा स्थितर लग्न ही विशेष शुभ माना जाता है। इस दिन क्षीर सागर से लक्ष्मी जी प्रकट हुई थी।


भगवान श्रीराम का राजतिलक हुआ था। भगवान ने राजा बलि को पाताल का इंद्र बनाया था। इसी दिन राजा विक्रमादित्य ने अपने संवत की रचना की थी। ऐसा वर्णन दीपावाली मनाए जाने के बारे में पुराणों में मिलता है।

ऐसे करें पूजन
आचार्य डॉ. सुशांत राज ने बताया कि स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन प्रात: काल स्नान आदि से निवृत होकर सभी देवताओं की पूजा करनी चाहिए। इस दिन संभव हो तो दिन में भोजन नहीं करना चाहिए। इसके बाद प्रदोष काल में माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। माता की स्तुति और पूजा के बाद दीप दान करना चाहिए।

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