उत्तराखंडः गांव की बेटी ने बुझने नहीं दी शिक्षा की लौ
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उत्तराखंड स्थित कर्णप्रयाग में गांव की एक युवती ने अपने अकेले के प्रयास से शिक्षा की लौ को बुझने नहीं दिया।
24 दिनों से बंद पड़े कर्ण का प्राइमरी स्कूल सोनी, दीपा की पहल से 25वें दिन खुला। हालांकि स्कूल में शिक्षक की तैनाती नहीं हुई है लेकिन यहां शिक्षक के न आने तक गांव की यह युवती दीपा ही बच्चों को पढ़ाएगी।
मंगलवार को दीपा ने स्कूल पहुंचे करीब दस बच्चों को भी पढ़ाया। वहीं बीईओ ने स्कूल के लिए पूर्व में व्यवस्था के तहत भेजे गए शिक्षक का एक माह का वेतन रोके जाने के निर्देश दिए हैं।
ग्राम प्रधान कांति देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य मालदत्त पुरोहित, जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी जोशी, सामाजिक कार्यकर्ता बीरेंद्र कुमार ने बताया कि तीन जुलाई को स्कूल में तैनात शिक्षक का तबादला हो गया था, लेकिन उसके बाद विभाग ने यहां कोई तैनाती नहीं की।
इस कारण स्कूल 24 दिन तक बंद रहा। ग्रामीणों की लगातार शिकायत के बाद संकुल समन्वयक शिव सिंह ने यहां शिक्षक की व्यवस्था तो नहीं की लेकिन गांव की स्नातक कर रही युवती दीपा से स्कूल खोलने के लिए कह दिया और स्कूल की चाबी उन्हें सौंप दी।
25वें दिन दीपा ने खोला स्कूल
इस पर मंगलवार को 25वें दिन दीपा ने स्कूल खोला। खंड शिक्षा अधिकारी बीपीएस बिष्ट ने कहा कि नौ जुलाई को प्राथमिक विद्यालय नौली-हिंडोली से शिक्षक नरेश कुमार को सोनी भेजे जाने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन शिक्षक नहीं गया ऐसे में शिक्षक का एक माह का वेतन रोके जाने के निर्देश हुए हैं।
वहीं 27 जुलाई को प्राथमिक विद्यालय बारों से शिक्षक प्रवीन चंद्र को प्राथमिक विद्यालय सोनी भेजे जाने के निर्देश दिए गए हैं। बुधवार को शिक्षक स्कूल पहुंच जाएगा।
शिक्षकों के लिए चार घंटे दिया धरना
उधर, थराली के राजकीय महाविद्यालय तलवाड़ी में शिक्षकों की नियुक्ति सहित अन्य मांगों को लेकर छात्रों का क्रमिक अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। छात्र संघ अध्यक्ष प्रदीप जोशी ने कहा कि यहां स्वीकृत 15 शिक्षकों के पदों में से महज दो ही शिक्षक हैं।
ऐसे में छात्र-छात्राओं की पढ़ाई चौपट हो रही है। मांगों के समर्थन में छात्र-छात्राओं ने मंगलवार सुबह दस बजे से अपराह्न दो बजे तक धरना दिया। धरने पर बैठने वालों में छात्र संघ उपाध्यक्ष दमयंती बिष्ट, मुकेश बिष्ट, मनोज, रोशनी, मुक्ता, पूजा और कविता आदि शामिल थे।