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मौत की दीवार: तंग सड़क के किनारे खड़ा है 60 मी. लंबा मौत का पंजा, डीएवी कॉलेज के छात्रों के लिए टला नहीं खतरा

Sat, 21 Oct 2023 05:15 PM IST
रेनू सकलानी माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 21 Oct 2023 05:15 PM IST
सार

करनपुर स्थित डीएवी कॉलेज की पीछे की दीवार अचानक भरभरा कर गिर गई थी। काॅलेज के आसपास घूम रहे भाई-बहन इसकी चपेट में आ गए। हादसे में बहन की मौत हो गई, जबकि भाई गंभीर रूप से घायल हो गया। यह दीवार एक सदी से ज्यादा पुरानी थी। इस दीवार से सटे हुए कई बड़े पेड़ हैं।

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Death Wall DAV PG College Dehradun 60 meter long claw of death standing on the side of a narrow road
डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून - फोटो : amar ujala

विस्तार

डीबीएस रोड पर डीएवी कॉलेज की पिछली दीवार गिरने के बाद भी खतरा टला नहीं है। अब भी इस तंग सड़क के किनारे दीवार के रूप में 60 मीटर लंबा मौत का पंजा खड़ा है। इस दीवार का ज्यादातर हिस्सा सड़क की ओर झुका है। पीछे खड़े पेड़ साल दर साल इस दीवार को जैसे सड़क की ओर धकेल रहे हैं।

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हालात ये हैं कि अगर इसकी समय से मरम्मत नहीं कराई या ढहाई गई तो यह कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकती है। सुष्मिता और रघुवीर की तरह हर रोज पढ़ने के लिए कोचिंग और अन्य शिक्षण संस्थानों में आने-जाने वाले छात्र इसकी चपेट में आ सकते हैं।
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बता दें कि डीएवी कॉलेज की देहरादून के इतिहास में अपनी अलग पहचान है। वर्ष 1872 में यह कभी डीएवी स्कूल हुआ करता था। इसके बाद इसे 1948 में पीजी कॉलेज का दर्जा मिला। इसका विशालकाय भवन और दीवार आज भी उसी वक्त के बने हुए हैं।

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पेड़ों की जड़ दीवार की बुनियाद में जगह बना चुकी
छोटे-मोटे मरम्मत के काम और कुछ कमरों के निर्माण को छोड़ दें तो यहां इसके बाद से कोई नया निर्माण नहीं हुआ है। डीबीएस रोड पर बृहस्पतिवार को जो दीवार गिरी वह भी एक सदी से ज्यादा पुरानी थी। इस दीवार से सटे हुए कई बड़े पेड़ हैं। बरसों बरस इन पेड़ों की जड़ दीवार की बुनियाद में जगह बना चुकी हैं। यही कारण है कि अब दीवार जर्जर और कमजोर हो चुकी है।

इस मार्ग की बात करें तो डीबीएस रोड बमुश्किल 18 मीटर चौड़ी है। इसी रास्ते से रोज हजारों छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं। दिन में हजारों वाहन आवाजाही करते हैं। इस सड़क किनारे 80 मीटर लंबी यह दीवार है। इसका तकरीबन 20 मीटर का हिस्सा ढह गया, जिसके नीचे दबने से सुष्मिता की मौत हो गई। डीएवी कॉलेज प्रबंधन अपने ऊपर से टालकर इस बात को वन विभाग के पाले में डाल रहा है।

बताया जा रहा है कि इस दीवार के किनारे खड़े पेड़ों को कटवाने के लिए वन विभाग से मिन्नतें की गई थीं। लेकिन, किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। प्रबंधन और वन विभाग के बीच जो भी कुछ हुआ हो लेकिन, उनकी यह लापरवाही अपने कॅरियर की शुरूआत करने जा रही सुष्मिता की जान पर भारी पड़ गई। अब भी प्रबंधन यहां से मलबा हटाने में लगा है, लेकिन अगले 60 मीटर के हिस्से को लेकर कोई जवाब किसी के पास नहीं है।

ये भी पढ़ें...Dehradun DAV College: लड़की की मौत मामले में थम नहीं रहा आक्रोश, टॉवर पर चढ़े छात्र, प्राचार्य का इस्तीफा मांगा

डीएवी के किसी भी अधिकारी ने वन विभाग से फोन पर या किसी माध्यम से संपर्क नहीं किया है। पेड़ काटने की अनुमति के लिए चिट्ठी लिखी थी, जिस पर निरीक्षण करने के बाद 12 अक्तूबर को अनुमति जारी कर दी गई थी। अनुमति के बाद यह पेड़ कटवाना डीएवी प्रबंधन को ही था। घटना के बाद फिर से निरीक्षण किया गया था। लेकिन, पेड़ की वजह से दीवार नहीं गिरी है। - नितिशनमणि त्रिपाठी, डीएफओ, देहरादून

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