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निमोनिया से हुई हाथी के बच्चे की मौत

Tue, 18 Nov 2014 02:37 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, श्यामपुर
ब्यूरो / अमर उजाला, श्यामपुर Updated Tue, 18 Nov 2014 02:37 PM IST
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death of a baby elephant.

हरिद्वार जिले की श्यामपुर रेंज में मिले बीमारी हाथी के बच्चे की रेस्क्यू सेंटर में मौत हो गई। बीमारी का कारण निमोनिया बताया जा रहा है। वन विभाग की ओर से हाथी के बच्चे का पोस्टमार्टम कर शव को दफनाया दिया गया।

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रविवार को श्यामपुर रेंज में गश्त के दौरान वनकर्मियों को बीमारी हाथी का बच्चा मिला था। जो बीमारी से काफी कमजोर हो चुका था और ठंड से कांप रहा था। वन कर्मियों की सूचना पर पहुंचे डॉक्टरों ने हाथी के बच्चे का इलाज किया।
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उसके बाद उसे चिड़ियापुर स्थित रेस्क्यू सेंटर में शिफ्ट कर दिया था। सोमवार सुबह सात बजे वनकर्मी जब रेस्क्यू सेंटर की रूटीन चेकिंग में गए तो उन्हें हाथी का बच्चा मृत मिला। सूचना पर उपप्रभागीय वनाधिकारी संतराम भी पहुंचे।
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उन्होंने बताया कि सुबह सात हाथी के बच्चे की मौत की खबर वनकर्मियों से मिली। बताया कि उसकी आयु करीब आठ-नौ माह थी। वह अपने झुंड से अलग हो गया था। पर्याप्त भोजन नहीं मिलने से वह काफी कमजोर हो गया था।

पशुपालन विभाग के डाक्टर अशोक कुमार ने बताया कि हाथी के बच्चे की निमोनिया से मौत हुई होगी। उसके शरीर में प्रोटीन की काफी कमी थी।

संदिग्ध हालात में मृत मिली हथिनी

death of a baby elephant.

डोईवाला की बड़कोट वन रेंज के जाखन बीट में संदिग्ध परिस्थितियों में एक हथिनी मृत अवस्था मिली। गश्ती दल की सूचना पर विभागीय अधिकारियों ने मौका मुआयना कर जायजा लिया। चिकित्सकों की टीम के पोस्टमार्टम के बाद हथिनी के शव को जंगल में दफना दिया।

सोमवार सुबह बड़कोट वन रेंज में हथिनी का शव मिलने से हड़कंप मच गया। रोज की तरह बीट अधिकारी रमेश थपलियाल गश्त कर रहे थे। इसी बीच झाड़ियों में लिपटे एक हाथी को पडे़ देखा। पास जाकर देखने पर मूवमेंट नहीं होने पर इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को दी।

मौके पर पहुंचे अफसरों ने घटनास्थल का मुआयना किया। आसपास की झाडियां बुरी तरह से दबी हुई थी, जिसे देखकर माना जा रहा है कि संभवत: पेट आदि दर्द के कारण हथिनी जमीन पर तड़पी होगी। प्रथम दृष्टया मौत की वजह स्वाभाविक माना जा रहा है।

पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वीएस कठैत के नेतृत्व में तीन सदस्यीय चिकित्सक टीम मौके पर पहुंची। चिकित्सकों के मुताबिक शव लगभग 25 से 30 घंटे पुराना है। हथिनी की आयु 15 साल के आसपास है। चिकित्सक दल मौत की पड़ताल कर रहा है। रेंजर हरि सिंह रावत ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम होने के बाद जंगल में ही दफना दिया गया।

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