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DCB Recruitment Scam: घोटाले की जांच अब न्याय विभाग में अटकी, तीन जिलों की रिपोर्ट शासन को सौंपी गई

Thu, 08 Dec 2022 01:22 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Thu, 08 Dec 2022 01:22 PM IST
सार

जिला सहकारी बैंक घोटाले के मामले में संयुक्त निबंधक सहकारी समितियां नीरज बैलवाल की अध्यक्षता में बनी जांच समिति तीनों जिलों की जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को सौंप चुकी है। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कूट रचना कर अंकों में छेड़छाड़ कर चहेतों को फायदा पहुंचाने, शैक्षणिक गतिविधियों के नंबरों में खेल, फर्जी खेल प्रमाणपत्रों के जरिए कुछ आवेदकों को लाभ पहुंचाने जैसी बातों का उल्लेख किया गया है।

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DCB recruitment scam investigation now stuck in Justice Department Dehradun Uttarakhand news
छात्रवृत्ति घोटाला - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

शासन में मेरी फाइल-तेरी फाइल की प्रवृत्ति से सहकारिता विभाग में जिला सहकारी बैंकों (डीसीबी) में हुई भर्तियों में गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट अब न्याय विभाग में अटक गई है। जांच समिति दो महीने पहले ही जांच रिपोर्ट शासन को सौंप चुकी है, लेकिन इस पर कार्रवाई होना तो दूर, अभी तक जांच के तथ्यों का ही खुलासा नहीं किया गया है।

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वर्ष 2020 में जिला सहकारी बैंकों में चतुर्थ श्रेणी के 432 पदों के लिए शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया शुरू होते ही विवादों में आ गई थी। इसके बाद 29 मार्च 2022 को विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के आदेश पर देहरादून, ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ डीसीबी की जांच के आदेश शासन की ओर से दिए गए थे।
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मामले में संयुक्त निबंधक सहकारी समितियां नीरज बैलवाल की अध्यक्षता में बनी जांच समिति तीनों जिलों की जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को सौंप चुकी है। जांच समिति ने सबसे पहले जून में देहरादून डीसीबी, सितंबर में पिथौरागढ़ और अक्तूबर में ऊधमसिंह नगर डीसीबी की जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी। 

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शासन की मंशा पर भी उठ रहे सवाल
सूत्रों की मानें, तो जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कूट रचना कर अंकों में छेड़छाड़ कर चहेतों को फायदा पहुंचाने, शैक्षणिक गतिविधियों के नंबरों में खेल, फर्जी खेल प्रमाणपत्रों के जरिए कुछ आवेदकों को लाभ पहुंचाने जैसी बातों का उल्लेख किया गया है।

बताया जा रहा कि यदि इस जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई हुई तो जिला सहकारी बैंकों के अध्यक्ष, प्रबंधक और जिला सहायक निबंधक तक कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट को शासन में एक टेबल से दूसरी टेबल में घुमाया जा रहा है, उससे शासन की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं। 

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‘मेरे पास जब फाइल आएगी, तभी कर पाऊंगा कोई कार्रवाई’
विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का कहना है कि जहां तक उनकी जानकारी है, फाइल न्याय विभाग को भेजी गई है। जब तक फाइल लौटकर उनके पास नहीं आ जाती, वह इस बारे में कुछ नहीं कह सकते। उधर, सचिव डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने कहा कि जांच रिपोर्ट न्याय विभाग के पास विधिक परामर्श के लिए भेजी गई है। रिपोर्ट वापस कब तक आएगी, इस बारे में वह कुछ नहीं कह सकते हैं। 

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