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इन सड़कों पर बाहें फैलाए मौत करती है इतंजार
अमर उजाला, विकासनगर
Updated Fri, 03 Jan 2014 01:29 PM IST
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उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र में सड़कों की हालत किसी से छिपी नहीं है। लाखामंडल-नाडा मोटर मार्ग पर गुरुवार को हुई दुर्घटना की वजह भी सड़क की बदहाली ही है।
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सफर जानलेवा बना हुआ
जौनसार बावर में संपर्क मार्गों के साथ ही मुख्य मार्गों का हाल भी बुरा है। कालसी-चकराता, चकराता-त्यूनी और हरिपुर-कोटी-इच्छाड़ी जैसे प्रमुख मार्गों में सफर जानलेवा बना हुआ है।
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जर्जर मार्गों की इस दशा के लिए लोक निर्माण विभाग और यहां के जनप्रतिनिधि बराबर के दोषी हैं। जौनसार बावर क्षेत्र का हरिपुर-कोटी-इच्छाड़ी मोटर मार्ग करीब 70 किलोमीटर लंबा है। लेकिन बदहाली के कारण इस सड़क पर यह पहचानना मुश्किल है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क।
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लाइफ लाइन कहे जाने वाले 38 किलोमीटर लंबे कालसी-चकराता मोटर मार्ग का भी कमोवेश यही हाल है। मार्ग से गेट सिस्टम तो खत्म हुआ, लेकिन आज तक इसका चौड़ीकरण नहीं हो सका।
गड्ढों की खदान है राष्ट्रीय राजमार्ग
कालसी से साहिया के बीच में मार्ग कई जगह पर खतरनाक स्थिति में है। इसके बाद भी हर रोज इन मार्गों से सैकड़ों वाहन गुजरते हैं। भूस्खलन की दृष्टि से अति संवेदनशील असनाड़ी, चामड़खील, झझरेट के पास कोई सुरक्षा इंतजाम भी नहीं किए गए हैं।
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चापनू के पास कटाव को महज रेत के कट्टों के सहारे भरकर यातायात बहाल किया गया है। दिल्ली-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग भी कालसी से आगे कुछ ऐसा ही नजर आता है। कालसी के आगे यह पहचानना मुश्किल हैं कि यह राष्ट्रीय राजमार्ग है या गड्ढों की खदान।
विकासनगर को बिन्हार क्षेत्र से जोड़ने वाली बाड़वाला-जुड्डो मोटर मार्ग भी जगह-जगह मलबे के ढेर और क्षतिग्रस्त सुरक्षा दीवारों के कारण सड़क इस कदर संकरी हो गई है कि लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर तय करना पड़ रहा है।
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15 किलोमीटर लंबी इस सड़क का सदनपुल से जुड्डो के बीच 1 किलोमीटर का हिस्सा पूरा डेंजर जोन में तब्दील है।
ये भी हैं बदहाली के शिकार
साहिया-क्वानू, साहिया समाल्टा, पाटाबैंड-माख्टी, इनारीबैंड-दातनू-बड़नू, हईया-सकनी-पंजिया, साहिया-उत्पाल्टा, लालपुल-निथला-बिसोई, पजिटिलानी-भंजरा, पजिटिलानी-ऊभरिऊ, पजिटिलानी-चंदऊ-खोई, चेताबैंड-चंदऊ, कालसी-बैराटखाई, कोटी-कालोनी-डांडा, मुंशीघाटी-देऊ, त्यूनी-चकराता, त्यूनी-अटाल, हनोल-मोरी, त्यूनी-दारागाड़, दारागाड़-कथियान, चकराता-लाखामंडल, सैंज-अटाल, रिखनाड़ मोटर मार्ग, ककनोई मोटर मार्ग समेत दो दर्जन मोटर मार्ग क्षतिग्रस्त पड़े हैं।
वन मोटर मार्ग ले रहे जान
लोनिवि को वन मार्ग हस्तांतरित नहीं होने से जानलेवा बनी है सड़क
दो साल में मार्ग पर अब तक हुई दो बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं
एक वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी समेत 21 लोग गंवा चुके हैं जान
लाखामंडल-नाडा वन मार्ग हस्तांतरण की मांग पर जिम्मेदार गंभीर नहीं
कहां से करें आवाजाही
वन विभाग के मार्ग के अलावा नाडा, घणसार, लेवसाणा, खाटुवा, लावणी, दतरोटा, सखाड़ा समेत करीब एक दर्जन गांवों की आबादी के पास यातायात के लिए कोई विकल्प नहीं।