'यमराज की गली' पार कर 12 हजार पहुंचे शिलासमुद्र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
5333 मीटर की दुर्गम ऊंचाई पर स्थित ज्यूंरागली (यमराज की गली) को पार करते हुए नंदा राजजात यात्रा मंगलवार को शाम पांच बजकर 45 मिनट पर अपने चौथे निर्जन पड़ाव शिलासमुद्र पहुंच गई है।
मौसम की चुनौतियों और तमाम बाधाओं को धता बताकर 12 हजार श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं। सोमवार रात्रि को रूपकुंड ट्रैक पर हिमखंड टूट जाने से राजजात मार्ग जानलेवा बन गया है।
हालांकि टूटे हिमखंड के ऊपर से ही गुजरी यात्रा सकुशल शिलासमुद्र पहुंच गई है। पातर नचौणियां से शिलासमुद्र तक रिमझिम बारिश होती रही।
पातर नचौणियां से नंदा राजजात यात्रा सुबह नौ बजकर 12 मिनट पर रवाना हुई। यात्रा के साथ शुरुआत में करीब 12 सौ यात्री रवाना हुए थे लेकिन कैल विनायक, बगुवावासा और स्वेलफड़ा से यात्री राजजात यात्रा को छोड़कर पहले ही शिलासमुद्र के लिए निकल गए।
बर्फ पिघलाकर भक्त पी रहे पानी
दोपहर बाद बगुवावासा से छाए घने कोहरे के कारण नंदा की डोली और छंतोलियों को ले जा रहे लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आलम यह रहा कि ज्यूंरागली से शिलासमुद्र तक राजजात ले जा रहे लोगों को हाथ पकड़ कर आगे जाना पड़ा। लोग एक दूसरे का चेहरा तक पूरी तरह नहीं देख पा रहे थे।
हालांकि शाम छह बजे शिलासमुद्र में कोहरा छंट गया था। शिलासमुद्र में पेयजल और शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। यहां यात्री प्राकृतिक जलस्रोत और हिमखंडों को पिघलाकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। जिलाधिकारी चमोली एसए मुरुगेशन और एसपी चमोली सुनील कुमार मीणा भी यात्रा के साथ चल रहे हैं।
ज्यूंरागली से शिलासमुद्र तक पहुंचने के लिए यात्रा को पूरे दो घंटे का समय लगा जबकि यात्रा कैलविनायक में साढे़ ग्यारह बजे, बगुवावासा में दोपहर एक बजे और रूपकुंड में साढे़ तीन बजे पहुंची।