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Uttarakhand: नदियों-गदेरों में हैं खतरनाक जीवाणु, इंदौर हादसे के बाद प्रदेश में शुरू होगी पेयजल की जैविक जांच

Fri, 30 Jan 2026 07:30 AM IST
रेनू सकलानी आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 30 Jan 2026 07:30 AM IST
सार

उत्तराखंड में जल संस्थान की 13 जिलास्तरीय, एक राज्यस्तरीय और 13 उपखंडीय लैब है। ये सभी लैब नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज (एनएबीएल) से मान्य हैं। लेकिन इनको अभी तक पानी की फिजियो केमिकल (पीएच, टीडीएस, क्लोराइड, फ्लोराइड, आयरन आदि) जांच के लिए ही मान्यता मिली है।

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Dangerous bacteria are present in rivers and streams biological testing of drinking water will now begin
नदी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड की नदियों, गाड-गदेरों में खतरनाक बैक्टीरिया, वायरस, कवक और परजीवी पनप रहे हैं। बैक्टीरिया जनित यह पानी लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। इंदौर में पिछले दिनों सामने आई दूषित पेयजल से मौतों जैसी घटना से बचाव के लिए जल संस्थान की 27 लैब में अब पेयजल की माइक्रोबायोलॉजी जांच शुरू होने जा रही है।

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इसके उपकरणों की खरीद के लिए शासन ने बजट जारी कर दिया है। प्रदेश में जल संस्थान की 13 जिलास्तरीय, एक राज्यस्तरीय और 13 उपखंडीय लैब है। ये सभी लैब नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज (एनएबीएल) से मान्य हैं। लेकिन इनको अभी तक पानी की फिजियो केमिकल (पीएच, टीडीएस, क्लोराइड, फ्लोराइड, आयरन आदि) जांच के लिए ही मान्यता मिली है, माइक्रोबायोलॉजी जांच के लिए नहीं। जल संस्थान ने इसकी कवायद शुरू कर दी है।
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शासन ने एनएबीएल से माइक्रोबायोलॉजी जांच की मान्यता के लिए 192 लाख रुपये जारी किए हैं। इस बजट से लैबों में बायोसेफ्टी कैबिनेट, इंक्यूबेटर, ऑटोक्लेव, मेंब्रेन फिल्ट्रेशन असेंबली, कॉलोनी काउंटर, सूक्ष्मदर्शी और तुला जैसे जरूरी उपकरण खरीदे जाएंगे। इसके बाद पेयजल की सभी लैब में माइक्रोबायोलॉजी जांच भी शुरू हो जाएगी।



 

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