उत्तराखंड में कहर ढाने को तैयार उफनती नदियां
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आपदा के एक वर्ष बाद भी नदी किनारे बस्तियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हो पाए हैं। नींव की खुदाई में नदी का पानी भरने लगा है। ऐसे में यहां काम करने में दिक्कत हो रही है।
पिछले वर्ष जून माह में आई बाढ़ और भूस्खलन से सुमाड़ी, तिलवाड़ा, सिल्ली, सौरगढ़, विजयनगर, अगस्त्यमुनि, चाका, गंगानगर, जवाहरनगर, बनियाड़ी, पुराना देवल, सौड़ी, चंद्रापुरी, गबनीगांव, भटवाड़ी सुनार, कालीमठ, सोनप्रयाग, सीतापुर, गौरीकुंड सहित कई गांवों में मंदाकिनी नदी ने कहर बरपाया था।
सैकड़ों नाली खेती, भवन और सड़क बाढ़ में बह गए। सिंचाई विभाग ने अब काम शुरू तो किया, लेकिन इस बीच सिल्ली और विजयनगर में घरों तक नदी का पानी पहुंच गया है।
बहुद्देशीय शरणालय भी फाइलों में
रुद्रप्रयाग जिले के विभिन्न क्षेत्रों में एडीबी के आर्थिक सहयोग से घोषित 14 आपातकालीन बहुद्देश्यीय शेल्टर के निर्माण भी नहीं हो पाए हैं।
केदारनाथ जल प्रलय से सबक लेते हुए रांसी, मनसूना, गुप्तकाशी और न्यालसू सहित यात्रा मार्ग पर स्थित अन्य स्थानों पर स्थित सरकारी स्कूलों में आपातकालीन बहुद्देश्यीय शेल्टर बनाने के प्रस्तावों को अब तक शासन से स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
नहीं बने हेलीड्रोम और हेलीपोर्ट
आपदा के बाद बनाई गई अधिकतर योजनाएं हवाई ही साबित हुई।
जिले में वर्ल्ड बैंक की मदद से केदारनाथ क्षेत्र में एक समय पर छह चॉपर लेंड करने के लिए आठ हजार वर्गमीटर का हेलीड्रोम और अगस्त्यमुनि, गुलाबराय सिद्धसौड़, बक्सीर और नाला में पांच हेलीपोर्ट स्वीकृत हुए थे।
इसके साथ ही 16 अन्य स्थानों पर दो चॉपर उतरने के लिए हेलीपैड का निर्माण होना था।
इनका मकसद आपदा के दौरान त्वरित राहत कार्य शुरू कराना था। लेकिन अब तक केवल भीमबली और लिनचोली में ही स्थायी हेलीपैड का निर्माण हो पाया है।
यहां ट्राली बनी सहारा
विजयनगर और चंद्रापुरी में लोगों को ट्राली से नदी पार करनी पड़ रही है। हालांकि चंद्रापुरी में ग्रामीणों द्वारा बनाए गए पुल से भी लोग नदी पार कर कर रहे हैं।
ट्राली से नदी पार करने के लिए लंबी लाइन लग रही है। जुलाई माह से स्कूल खुलने के बाद स्थिति और खराब हो जाएगी। चंद्रापुरी में पुरानी ट्राली के स्थान पर मोटराइज्ड ट्राली लगाई जा रही है।
नई ट्राली लगाने पर पुरानी को खोलना पड़ेगा। तब तक लोगों के सामने नदी पार करने की चुनौती रहेगी।
842 परिवार किराए के घरों में
रुद्रप्रयाग जिले में 56 गांवों का आंशिक विस्थापन होना है। अब तक छातीखाल गांव के चार परिवारों का ही विस्थापन हुआ है। पिछले वर्ष आपदा से 861 परिवार बेघर हो गए थे।
इसमें 842 परिवार किराए के भवनों में रह रहे हैं। इन परिवारों के लिए वर्ल्ड बैंक की मदद से दो कमरों का भवन बनाया जा रहा है।
आपदा के एक साल बाद 830 परिवारों को भवन निर्माण के लिए पहली और 182 परिवारों के लिए दूसरी किस्त जारी हुई है। इस योजना में चार चरणों में किस्त जारी होनी है।
लोनिवि को मोटराइज्ड ट्राली का निर्माण तीन शिफ्ट में काम करने के निर्देश दिए गए हैं। मैं स्वयं बाढ़ सुरक्षा कार्य का निरीक्षण कर रहा हूं। यात्रा मार्ग पर एक-एक माह का अतिरिक्त खाद्यान्न स्टोर किया गया है। केदारनाथ और बचाव प्लान बनाया जा रहा है। शेल्टर के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं।
- डॉ. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग
बिना बारिश बढ़ रहा नदियों का जल स्तर
रुद्रप्रयाग में मानसून आने से पहले ही बरसात की सी स्थिति हो गई है। बिना बारिश के नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है।
पानी बढ़ने से नदियों को डायवर्ट करने के लिए बनाए गए डायवर्जन ध्वस्त हो गए हैं। नदी का पानी आपदा के समय बह रहे प्रवाह क्षेत्र में लौट आया है। वहीं अस्थायी पुलों के संपर्क मार्गों में पानी बहने से इन पर आवाजाही बंद हो गई है।
जून माह में नाममात्र की बारिश हुई है। अलकनंदा, मंदाकिनी, मधुगंगा और काली नदियां प्रचंड वेग में बहने लगी है। नदियां अपने साथ मिट्टी बहाकर लाने लगी हैं।
इसका कारण हिमालय की चोटियों में बर्फ का तेजी से गलना है। रोजाना रात के वक्त नदियों के जल स्तर में डेढ़ मीटर तक बढ़ोत्तरी हो रही है। जबकि दिन में पानी का लेबल कम हो जा रहा है।
केंद्रीय जल आयोग सुबह आठ बजे के वक्त जल स्तर मापता है। जिसके चलते आयोग की गणना में ज्यादा अंतर नहीं दिखाई दे रहा है।
राजमार्ग और बस्तियों की ओर मुड़ गया नदी का पानी
विजयनगर और चंद्रापुरी में मंदाकनी नदी को केदारनाथ हाईवे और बस्ती से दूर करने के लिए डायवर्जन किया गया था।
अब डायवर्जन पानी का वेग सहन नहीं कर पाए और टूट गए। पानी दोनों स्थानों पर राजमार्ग और बस्तियों की ओर मुड़ गया है। विजयनगर-पुराना देवल में मंदाकिनी वायरक्रेट की दीवार पर चोट कर रही है।
इससे आगे विजयनगर और सिल्ली में पानी घरों को छूने लगा है।
नदियों का जल स्तर (मीटर)
दिनांक - अलकनंदा - मंदाकिनी - बारिश (एमएम)
15 जून - 620.25 - 619.54 - शून्य
19 जून - 621.08 - 619.81 - 7.00
21 जून - 621.60 - 620.80 - शून्य
नदियों के जल स्तर पर पूरी नजर रखी जा रही है। सिंचाई विभाग को त्वरित गति से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी परिस्थिति के लिए प्रशासन तैयार है।
- डॉ. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग