उत्तराखंड चुनाव: पाला बदलने वालों से नहीं, भितरघात से है ज्यादा डर
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उत्तराखंड में प्रत्याशी सूची में बाहरियों की भरमार से परेशान भाजपा के पुराने चेहरों के बढ़ते असंतोष का डैमेज कंट्रोल आसान नहीं दिख रहा है। पार्टी शीर्ष नेतृत्व की ज्यादा चिंता उनकी नहीं है जो पाला बदलने वाले या फिर निर्दलीय मैदान में कूदने वाले हैं बल्कि असली चुनौती उनसे हैं जो दल में बने रहेंगे।
केंद्रीय नेतृत्व वर्ष 2012 में पार्टी की टिकट कटने वालों से मिली हार से सबक नहीं लेगी तो नतीजों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में पार्टी अब दो तरह से रणनीति अपना रही है कि भितरघात से कैसे बचा जाए।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक बाहरियों को डेढ़ दर्जन टिकट देने की नाराजगी सबसे अधिक है। अब पार्टी के सामने दोहरी चुनौती है।
दो दर्जन सीटों पर दावेदार खुलकर सामने
टिकट कटने से गुस्साए कुछ लोग तो निर्दलीय या कांग्रेस तक ज्वाइन कर भाजपा को हराने के लिए तैयार हो चुके हैं जबकि दूसरा खेमा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि और पुराने नेताओं का है जो भले पार्टी न छोड़े लेकिन बाहरियों को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
अभी तक दो दर्जन सीटों पर दावेदारों मुखर होकर सामने आने लगे हैं। चार भाजपा पूर्व विधायकों के कांग्रेस से संपर्क होने की बात सामने आई है। लगभग आधा दर्जन ऐसे हैं जो निर्दलीय उतरने की तैयारी कर रहे हैं।