डांटने पर रची थी बड़े भाई के कत्ल की साजिश, हत्या के बाद खुला राज
- - नारसन खुर्द मार्ग पर मिला था टिकौला निवासी सोनू का शव
- - पुलिस और परिजन अभी तक मान रहे थे महज सड़क हादसा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रुड़की के मंगलौर क्षेत्र स्थित टिकौला गांव निवासी सोनू की मौत सड़क हादसे में नहीं बल्कि सगे छोटे भाई ने गोली मारकर उसकी हत्या की थी। घर से पैसे चुराने पर सोनू और उसके परिजनों ने छोटे भाई सुमित को डांट फटकार दिया था।
गुस्से में सुमित ने पूरी प्लानिंग के तहत उसे घर से बुलाकर मौत के घाट उतार दिया। परिजनों ने खुद आरोपी को पुलिस के हवाले किया। मंगलौर पुलिस ने पूछताछ के बाद तमंचा बरामद करते हुए हत्या का खुलासा कर दिया।
टिकौला निवासी सोनू पुत्र रतिराम का शव 20 मई को नारसन कलां से नारसन खुर्द जाने वाले रास्ते पर खून से लथपथ हालत में मिला था। सोनू के सिर से काफी खून बह चुका था। उसकी बाइक भी मौके से बरामद हुई थी। पुलिस और परिजनों ने इसे महज एक हादसा मानकर रिपोर्ट दर्ज कराने की जरूरत नहीं समझी। हालांकि पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया, मगर अभी तक उसकी रिपोर्ट नहीं आ पाई थी।
पिटाई से नाराज होकर बुना भाई हत्या का ताना-बाना
सोनू की मौत के बाद उसका छोटा भाई अचानक गायब हो गया। वह सोनू के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हुआ। इस पर परिजनों को शक हुआ और उन्होंने टपरी गांव में अपने रिश्तेदार के घर से उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।
पुलिस ने उससे सख्ती पूछताछ की तो उसने बड़े भाई सोनू की गोली मारकर हत्या करने की बात कुबूल कर ली। बृहस्पतिवार को मंगलौर कोतवाली में हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए एएसपी लोकेश्वर सिंह ने बताया कि आरोपी सुमित उर्फ सुन्ना की आदतें खराब थी। उसने हाल में अपने घर से पैसे चुराए थे। बड़े भाई सोनू ने उसकी पिटाई कर दी थी।
परिजनों के दबाव पर सुमित ने बहाना बनाया कि उसने एक ठेकेदार को अपनी नौकरी लगवाने के लिए पैसे दिए हैं। प्लानिंग के तहत उसने 20 मई को सोनू को ठेकेदार से पैसे वापस दिलाने के नाम पर बुलाया और सिर में गोली मारकर हत्या करने के बाद फरार हो गया।
परिजनों ने ही कर दिया खुलासा
पुलिस ने उसकी निशानदेही पर एक खेत से हत्या में प्रयुक्त तमंचा व खोखा बरामद कर लिया है। खुलासा करने वाली पुलिस टीम में कोतवाल उत्तम सिंह जिमिवाल, नारसन चौकी प्रभारी सुखपाल सिंह मान, बाबू खां, अरुण कुमार, अजयवीर, नन्दकिशोर, अशोक तिवारी व सुधीर शामिल रहे।
सोनू की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के छह दिन बाद भी उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को नहीं मिल पाई। हालांकि प्रथम दृष्ट्या सड़क हादसे का एंगल संदिग्ध प्रतीत हो रहा था, मगर पुलिस की मानें तो डॉक्टर ने भी शुरूआती जांच में इसे सड़क हादसा ही मान लिया था। इसी बीच परिजनों को शक हुआ और उन्होंने उससे कुछ बातें उगलवाते हुए उसे पुलिस के सुपुर्द कर दिया।