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भांजे के प्यार में पड़कर धड़ से अलग किया पति का सिर

Sun, 30 Nov 2014 08:19 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, ऋषिकेश
ब्यूरो / अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Sun, 30 Nov 2014 08:19 AM IST
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wife kills husband at rishikesh.

ऋषिकेश में प्रतीतनगर के बहुचर्चित बलबीर हत्याकांड में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश आरके खुल्बे की अदालत ने मामी और भांजे को उम्रकैद और 24 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है।

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भांजे से अवैध संबंध के चलते बेरहम पत्नी ने पति को मौत के घाट उतार दिया था। हत्या में भांजा भी शामिल था। बीते 18 अगस्त, 2011 की रात रायवाला पुलिस ने सुसवा नदी से एक युवक की सिर कटी लाश बरामद की थी।
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छानबीन में उसकी शिनाख्त बलबीर सिंह चौहान (32) पुत्र मुरली चौहान निवासी प्रतीतनगर, रायवाला के रूप में हुई थी। मामले में मृतक के पिता ने 25 अगस्त, 2011 को रायवाला थाने में तहरीर दी।
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आरोप लगाया कि पुत्रवधु जुप्पा देवी और नाती (लड़की के पुत्र) संदीप कपसूड़ी के बीच नाजायज संबंध हैं, इसी के चलते उन्होंने बलबीर की कुल्हाड़ी से गर्दन काटकर हत्या कर दी। सिर कहीं छिपा दिया और धड़ सुसवा नदी में फेंक दिया।

ऐसे हुआ हत्याकांड का खुलासा

wife kills husband at rishikesh.

पुलिस ने पत्नी और भांजे के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 सपठित धारा 34 और 201 सपठित धारा 34 के तहत केस दर्ज किया और छानबीन में जुट गई। पुलिस ने 15 फरवरी 2012 को हत्याकांड की चार्जशीट सत्र न्यायालय में सुपुर्द की।

गुरुवार को मामले की सुनवाई प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश आरके खुल्बे की अदालत में हुई। आरोप साबित होने पर कोर्ट ने फैसला सुनाया।

सजा और जुर्माना
धारा 302 और सपठित धारा 34 में जुप्पा देवी और संदीप कपसूड़ी को आजीवन कारावास और 10-10 हजार रुपए का जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास।

धारा 201 और सपठित धारा 34 में दोनों हत्यारोपियों को तीन-तीन वर्ष का कारावास और दो-दो हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड नहीं देने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास। कोर्ट के मुताबिक सभी सजाए साथ चलेंगी।

बलबीर की हरकीपैड़ी, हरिद्वार में चूड़ी बिंदी की दुकान थी। 17 अगस्त, 2011 को वह बच्चों से मिलने प्रतीतनगर घर आया था। 18 अगस्त की सुबह बेटा घर पर नहीं दिखा तो पिता मुरली सिंह ने पुत्रवधु जुप्पा देवी से पूछा।

उसने बताया कि वह हरिद्वार दुकान चले गए हैं, लेकिन बलबीर दुकान नहीं पहुंचा। काफी खोजबीन के बाद भी उसका सुराग नहीं लगा तो पिता ने पुलिस को सूचित किया।

पुलिस को आशंका हुई और सिर कटा अज्ञात शव परिजनों को दिखाया। परिजनों ने शव की शिनाख्त लापता बलबीर के रूप में की। इसके बाद परत दर परत कड़ियां खुलती चली गईं और हत्याकांड का खुलासा हो गया। रिश्ते को तार-तार करने वाली इस घटना से लोग सन्न रह गए। शिनाख्त 26 अगस्त, 2011 को हुई।

मामा ने ही किया था भांजे का पालन-पोषण

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पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक संदीप कपसूड़ी का मामा बलबीर ने ही पालन पोषण किया था। उसे होटल मैनेजमेंट का कोर्स कराया और किसी होटल में काम भी दिलवाया था।

इसी भांजे ने मामी के साथ मिलकर मामा की नृशंस हत्या कर दी। पवित्र रिश्ता तो दूर उसे मामा के दो छोटे बच्चों का भी ख्याल नहीं रहा।

शिनाख्त छिपाने का प्रयास

हत्यारे इतने शातिर थे। उन्होंने हत्या के बाद बलबीर के दाहिने हाथ में गुदा ऊं के हिस्से की खाल को काटकर हटा दिया था।  चर्चित बलबीर हत्याकांड के हत्यारोपी कोर्ट के अंतिम फैसले से पहले जमानत पर बाहर थे।

सिर आज तक नहीं मिला
बलबीर का धड़ तो सुसवा नदी से बरामद हुआ। पुलिस ने बताया कि सिर नहीं मिला है। काफी छानबीन की लेकिन सफलता नहीं मिली।

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