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उत्तराखंड के पूर्व दर्जाधारी मंत्री निकले महा ठग!

Mon, 24 Nov 2014 02:09 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 24 Nov 2014 02:09 PM IST
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uttarakhand former minister involved in fraud.

लाखों रुपयों की धोखाधड़ी के आरोप में उत्तराखंड के दर्जाधारी राज्यमंत्री रहे शैलेश वर्मा जेल चले गए। एनडी तिवारी सरकार के दौरान स्पेशल कंपोनेंट प्लान बोर्ड के सदस्य रहे वर्मा पर परिवहन निगम में ठेके दिलाने के नाम पर लाखों रुपए ठगने का आरोप है।

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रविवार को राजपुर पुलिस ने वर्मा को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।

शैलेश वर्मा के खिलाफ प्लीजेंट वैली निवासी प्रॉपर्टी डीलर आशिक मसूद ने 14 सितंबर 2014 को शैलेश वर्मा पुत्र शशिभानू वर्मा निवासी किशनपुर के खिलाफ राजपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
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आशिक के आरोप के अनुसार, अक्तूबर 2013 में शैलेश ने उसे साझेदारी में काम करने का प्रस्ताव दिया था। कहा था कि उसे रोडवेज में बसों की धुलाई एवं सफाई के साथ ही कैंटीन का ठेका मिला है। लाखों के फायदे वाले इस काम के लिए उसे फाइनेंशर की जरूरत है।

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मंत्रीजी के पास हैं हर विभाग की फर्जी मुहर

uttarakhand former minister involved in fraud.

शैलेश ने आशिक को रोडवेज से हुए एग्रीमेंट की कॉपी दिखाई तो वह साथ काम करने को तैयार हो गया। इसके बाद आशिक ने काम शुरू करने के लिए वर्मा को 22 लाख रुपए दे दिए।

यह पेमेंट चेक के माध्यम से की गई थी। लेकिन जब बहुत दिनों तक काम शुरू नहीं हुआ तो आशिक ने रोडवेज के अधिकारियों से संपर्क किया। अधिकारियों से उसे पता चला कि शैलेश वर्मा के साथ रोडवेज का कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ है।

समझौते की कॉपी में जो मुहर लगी है वह भी फर्जी है। इसके बाद आशिक ने शैलेश से अपने रुपए मांगे तो उसे जान से मारने की धमकी मिलने लगी। हारकर आशिक ने पुलिस में केस दर्ज कराया।

एसओ राजपुर राजेश शाह ने बताया कि वर्मा को उसके किशनपुर स्थित आवास के कुछ आगे से गिरफ्तार किया गया। जब वर्मा के घर की तलाशी ली गई तो लगभग 24 विभागों की फर्जी मुहरें मिलीं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

विस कैंटीन में भी वित्तीय घोटाला
शैलेश वर्मा पर विधानसभा स्थित कैंटीन के बिलों में भी घोटाला करने का आरोप लगा था। आरोप था कि रकम प्राप्त करने के लिए उसने फर्जी बिल बनाए थे। 

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