कैमरे से नहीं बच पाए बुजुर्गों को लाखों ठगने वाले, गिरफ्तार
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राजधानी में बृहस्पतिवार को छह बुजुर्गों को अलग-अलग जगह बातों में उलझाकर लाखों के जेवरात हड़पने वालों को पुलिस ने 24 घंटे में दबोच लिया। हालांकि ठगी का मास्टर मांइड रात के अंधेरे में फुर्र होने में कामयाब हो गया, लेकिन उसका बेटा साथी सराफ के साथ आशारोडी चेक पोस्ट पर दबोच लिया गया। दोनों घटना में प्रयुक्त अपाची बाइक पर सवार होकर अलीगढ़ जा रहे थे। मुख्य आरोपी की तलाश में देर शाम तक दबिश चलती रही।
शहर में बृहस्पतिवार को अपाची बाइक पर सवार दो लोगों ने एक के बाद एक छह बुजुर्गों से सोने की चेन, अंगुठियां, सोने की चूड़ियां आदि ठग कर शहर में सनसनी फैला दी थी। पुलिस ने फौरन घटनास्थल और शहर के दूसरे हिस्सों के सीसीटीवी कैमरों से फुटेज निकालकर पुलिस के व्हाट्सएप ग्रुप में डाल दिए थे।
खासतौर से दून की सीमा से बाहर जाने वाले तमाम रास्तों में सघन चेकिंग की थी। एसएसपी डॉ. सदानंद दाते और एसपी सिटी अजय सिंह ने रात में टीम के साथ इस ठगी को लेकर होमवर्क करते रहे। आखिरकार पुलिस की भागदौड़ काम आई और दो ठग दबोच लिए गए।
ठगी के मास्टर माइंड बाप-बेटे बुजुर्गों को बनाते थे निशाना
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि क्लेमेंटाउन थाने की आशारोडी चेक पोस्ट पर अपाची मोटर साइकिल सवार विवेक शर्मा निवासी रामघाट रोड राजनगर मोहल्ला देव सैनी थाना क्वारसी (अलीगढ़) और सर्राफ रूप सिंह चौधरी निवासी राम स्नेही नगर थाना क्वारिसी को दबोच लिया।
पूछताछ में पता चला कि विवेक के पिता विनोद कुमार शर्मा डेढ़ दशक से ठगी की घटनाएं करते आ रहे हैं। वृहस्पतिवार को छह बुजुर्गों को शिकार बनाने के दौरान विवेक के साथ उसके पिता विनोद शर्मा शामिल थे। पिता रात में कार में सवार होकर अलीगढ़ चले गए, जबकि ये दोनों सुबह बाइक से अलीगढ़ लौट रहे थे।
बाप-बेटे ने कानपुर, मथुरा, आगरा आदि शहरों में भी ठगी की घटनाओं को अंजाम दिया है। आरोपी बरेली, मुरादाबाद और हरिद्वार से जेल भी जा चुके हैं। पुलिस अधीक्षक नगर अजय सिंह, एएसपी तृप्ति भट्ट और एसओ क्लेमेंटाउन नरेश राठौड इस दौरान मौजूद थे।
रेडियम से हुई बाइक की पहचान
बुजुर्गों से जेवरात ठगने वाले शातिर बाइक के पहियों में लगाई गई रेडियम की वजह पहचाने गए। सीसीटीवी फुटेज में बाइक पर आगे पुलिस और पहियों में रेडियम लगे होने की बात सामने आई थी। एसपी सिटी अजय सिंह ने बताया कि पुलिस कर्मियों को बाइक की पहचान बता दी गई थी। आशारोडी चेक पोस्ट पर तैनात सिपाही दिनेश शाह जय सिंह, विक्रम सिंह रेडियम से बाइक को पहचान लिया था। कुछ दूर पीछा कर उन्हें पकड़ लिया था।
सराफ को मिलते थे रोजाना चार हजार
विवेक के साथ पकड़े गए सर्राफ रूप सिंह चौधरी ने बताया कि बाप-बेटे उसे रोज चार हजार रुपये देने की शर्त पर दून लेकर आए थे। उसका काम जेवरात के असली और नकली की पहचान करना था। बाद में उन जेवरों को रूप सिंह बाप-बेटों से खरीद भी लेता था।
सात हजार में किराए पर ली थी कार
विनोद अपने बेटे विवेक और सर्राफ के साथ सात हजार रुपये में किराए की कार लेकर 26 जुलाई को दून आया था। तीनों पटेलनगर स्थित गढ़वाल गेस्ट हाउस में आकर ठहरे थे। 27 जुलाई को दिन भर बाप-बेटों ने रेकी की। 28 जुलाई को दोनों ने दिनभर अलग-अलग जगह वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस टीम को पुरस्कृत
ठगों का गिरफ्तार करने में शामिल एसओ क्लेमेंटाउन नरेश सिंह राठौड, उप निरीक्षक राजेन्द्र पुजारा, सुनील कुमार, जय सिंह, दिनेश शाह, लाखन सिंह, धर्मवीर, सोवेन्द्र सिंह, धर्मेन्द्र सिंह और पंकज चौधरी को एसएसपी ने नकद पुरस्कार से सम्मानित किया।
ठगी के उस्तादों पर भारी पड़ी तीसरी आंख
छह बुजुर्गों को ठगी का शिकार बनाने वाले बाप-बेटों को अहसास तक नहीं था कि उनकी हर करतूत सीसीटीवी में कैद हो रही है। करीब 25 साल से देश भर में ठगी करने वाले विनोद शर्मा पुलिस की नई तकनीक से वाकिफ नहीं है। उन्हें गुमान था कि दूसरों राज्यों की तरह पुलिस उन तक नहीं पहुंच पाएगी। यही ठग मार खा गए। पुलिस ने करीब 13 कैमरों से उनकी फुटेज निकालकर उनकी घेराबंदी कर ली थी।
विरासत में मिली ठगी का हुनर
विवेक शर्मा को ठगी का हुनर विरासत में मिला है। विनोद शर्मा के तीन बेटों में विवेक सबसे बड़ा है। पुलिस हिरासत में विवेक ने बताया कि करीब एक साल से वह पिता के साथ ठगी की घटनाएं कर रहा है। पिता ने ही ठगी सिखाई है। पिता ने बताया था कि दून में लोग खूब सोना पहनते है। यहां मोटा हाथ लगने की बात कहकर उन्हें यहां लाए थे।