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नाम बदलने के बावजूद भी मौत ने पीछा नहीं छोड़ा

Sun, 02 Feb 2014 12:46 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 02 Feb 2014 12:46 PM IST
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man killed in property dispute

देहरादून के आनंद ग्राम में प्रॉपर्टी डीलर संजय नागर की हत्या के बाद उसकी जिंदगी के राज खुलने लगे हैं।

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पुलिस को मालूम चला है कि उसका नाम संजय नागर नहीं, बल्कि अनिल कुमार है। वह दिल्ली का नहीं बल्कि गाजियाबाद का रहने वाला था। हत्या के एक मामले में उसकी गिरफ्तारी हुई थी।

नाम बदल कर रहने लगा था दून
पैरोल पर छूटने के बाद वह फिर जेल नहीं गया और दून आकर नाम एवं काम बदल कर रहने लगा। यहां पर उसने अपनी हकीकत छिपाकर दूसरी शादी भी कर ली थी। पुलिस मान रही है कि वह गैंगवार में मारा गया।
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शुक्रवार सुबह आनंदग्राम में एक प्रॉपर्टी डीलर को तीन बदमाशों ने गोलियों से भून दिया था। हत्या के तरीके से ही लग रहा था कि इसमें पेशेवर अपराधियों का हाथ है।
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छानबीन में पुलिस को प्रापर्टी डीलर का नाम संजय नागर निवासी वजीराबाद दिल्ली पता चला था। लेकिन शनिवार को जांच में पुलिस को मालूम हुआ कि वह संजय नहीं, गाजियाबाद के निकट दादरी स्थित बल्ली गांव का अनिल कुमार था।

दो साल पहले उसने दून में लक्ष्मी नामक महिला से शादी की थी, लेकिन अपने बारे में उसने सच नहीं बताया था। सूत्रों के मुताबिक 90 के दशक में अनिल उर्फ संजय और उसके साथियों ने बुलंदशहर के सुंदर राठी गैंग के एक सदस्य टीटू को मार डाला था।

इस मामले में अनिल को बुलंदशहर जेल भेज दिया गया था। वर्ष 2006 में वह पैरोल पर छूटा लेकिन अवधि समाप्त होने के बाद जेल नहीं गया। कुछ समय इधर-उधर रहने के बाद ढाई साल पूर्व वह देहरादून आ गया और प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू कर दिया।

हाल ही में दिल्ली में जय भगवान नाम के शख्स की हत्या की गई थी। सूत्र बताते हैं कि जय भगवान अनिल का पुराना साथी था। उसकी मौत की खबर के बाद से ही अनिल परेशान था। माना जा रहा है कि जय भगवान को मारने वालों ने ही अनिल की हत्या की।

सीधा-सादा था संजय
अनिल उर्फ संजय दून आने के बाद से रायपुर के आनंदग्राम में रह रहा था। यहीं पड़ोसी मदन सिंह की बेटी से उसने शादी कर ली थी। ससुर की दी हुई जमीन पर वह इन दिनों मकान बनवा रहा था। कॉलोनी में संजय लोगों से कम बातचीत करता था। लोगों का कहना है कि संजय सरल और सीधे स्वभाव का था।

परिजनों ने झाड़ा पल्ला
पुलिस ने अनिल उर्फ संजय की डायरियों में मिले नंबरों के जरिये उसके गांव बल्ली जाकर परिजनों से पूछताछ की। पुलिस संजय का नाम लेती रही तो परिजनों ने इस नाम के शख्स को जानने से इनकार कर दिया।

तस्वीर दिखाने के बाद उन्होंने उसकी तस्दीक अनिल के तौर पर की। परिजनों ने साफ कहा कि उन्हें अनिल से या उसके किसी काम से कोई मतलब नहीं। बताया कि उन्हें यह भी पता नहीं था कि अनिल कहां रह रहा था।

जमीन के विवाद पर जांच
पुलिस जांच में पता चला है कि लक्ष्मी अनिल की दूसरी पत्नी थी। बच्चा नहीं होने के कारण उसने पहली पत्नी को छोड़ दिया था। पहली पत्नी के नाम पर अनिल ने सहस्त्रधारा रोड पर जमीन ली थी।

बादलपुर, गाजियाबाद में भी अनिल के नाम 11 बीघा जमीन है। पता चला है कि दोनों जगह उसके कुछ करीबी अपना हिस्सा मांग रहे थे। इस पर विवाद चल रहा था।

सुपारी किलरों की आशंका
पुलिस को संदेह है कि रंजिशन सुपारी किलरों से अनिल की हत्या कराई गई। मौके पर जिस 9 एमएम पिस्टल की गोलियों के खोखे मिले हैं, उसका लाइसेंस आम आदमी को नहीं मिलता। यह भी जांच की जा रही है कि पिस्टल कहां से आई।

साथियों से भी पूछताछ
पुलिस ने अनिल के साथ काम कर चुके प्रॉपर्टी डीलर अजय बिष्ट समेत एक दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ की है। दो युवकों को हिरासत में लिया है। दिल्ली और नोएडा गई टीमों ने आधा दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। यूपी पुलिस की भी मदद ली जा रही है।

पुलिस के सत्यापन पर सवाल
पैरोल पर छूटा बदमाश दून में पहचान बदलकर न सिर्फ रह रहा था, बल्कि प्रापर्टी का धंधा भी करने लगा था। लेकिन ढाई साल बाद भी दून पुलिस को इसकी भनक नहीं लगी। इससे पुलिस की सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।

पहले भी पुलिस की इस तरह की लापरवाही सामने आती रही है। वर्ष 2005 में आर्यनगर से छोटा राजन गिरोह के गुर्गों को मुंबई क्राइम ब्रांच ने पकड़ा था। वे भी यहां प्रापर्टी डीलिंग का काम कर रहे थे। अप्रैल 2013 में जीएमएस रोड से बिहार एसटीएफ ने शंभू सिंह निवासी मुजफ्फरपुर, बिहार को गिरफ्तार किया था।


छानबीन में पता चला है कि अनिल उर्फ संजय को बुलंदशहर में आजीवान कारावास की सजा सुनाई गई थी। उस पर बुलंदशहर की बादलपुर कोतवाली में केस दर्ज है। पैरोल पर जेल से छूटने के बाद वह फरार हो गया था। फिलहाल पुलिस टीमें जांच में लगी हुई हैं।
- नवनीत भुल्लर, एसपी सिटी

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